‘सरगुजा समय’ की खबर का बड़ा असर: सरकारी सड़क पर कब्जा करने वाले पटवारी त्रिभुवन सिंह को निगम ने थमाया नोटिस, जनहित के मुद्दों पर लगातार मुखर है सरगुजा समय अखबार!
सरगुजा समय अंबिकापुर :- पत्रकारिता लोकतंत्र का वह चौथा स्तंभ है, जो सच को सामने लाकर व्यवस्था को आईना दिखाने का काम करता है। अंबिकापुर के गोधनपुर वार्ड क्रमांक 05 में निवासरत शासकीय पद पर बैठे पटवारी त्रिभुवन सिंह द्वारा सरकारी सीसी रोड पर किए गए अवैध कब्जे के मामले में यह एक बार फिर साबित हो गया है कि ‘सरगुजा समय’ की खबरें सिर्फ सुर्खियां नहीं बटोरतीं, बल्कि उनका सीधा और ठोस असर प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में जमीन पर दिखाई देता है।

‘सरगुजा समय’ की खबर का असर: हरकत में आया नगर निगम प्रशासन:- वार्ड 05 में महेश्वरी मंदिर के सामने सरकारी रास्ते पर पटवारी द्वारा शेड तानने और सीसी रोड़ में टाइल्स लगवाने की मनमानी एवं दबंगई का मामला जब ‘सरगुजा समय’ ने प्रमुखता से उठाया गया, तो प्रशासन की नींद खुली।
खबर के प्रकाशित होते ही नगर निगम हरकत में आ गया। और नगर निगम आयुक्त के आदेश पर निगम के उड़नदस्ता प्रभारी चंदन यादव अपनी टीम के साथ तत्काल मौके पर पहुँचे और स्थिति का जायजा लेते हुए आरोपी पटवारी को नोटिस थमा दिया। यह इस बात का प्रमाण है कि जब मीडिया निष्पक्षता से जनता की आवाज उठाता है, तो बड़े-से-बड़े रसूखदारों को भी कानून के दायरे में झुकना पड़ता है।

जनहित के मुद्दों की बेबाक आवाज है ‘सरगुजा समय’:-
’सरगुजा समय’ ने हमेशा से आम जनता के अधिकारों, प्रशासनिक लापरवाही और जनहित से जुड़े मुद्दों को बिना किसी दबाव के प्रमुखता से उठाया है। चाहे बात सरकारी जमीनों को बचाने की हो, भ्रष्टाचारी अफसरों की पोल खोल हो, स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही हो या आम नागरिकों की तमाम परेशानियों को जिम्मेदारों तक पहुँचाने की, इस अखबार ने हमेशा अपनी पत्रकारिता के धर्म का ईमानदारी से पालन किया है।

गोधनपुर वार्ड का यह मामला इस बात की मिसाल है कि ‘सरगुजा समय’ जनहित के मुद्दों पर किस कदर पहरेदार की भूमिका निभा रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पटवारी साहब के दस्तावेजों की जाँच के बाद निगम प्रशासन इस अवैध कब्जे पर क्या और कितनी सख्त बुलडोजर कार्रवाई करता है।
विशेष सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जब नगर निगम की उड़नदस्ता टीम पटवारी साहब के घर सड़क पर अवैध कब्ज़ा सीसी रोड़ पर सड़क निर्माण एवं सड़क पर लगे टाइल्स की जाँच करने पहुंची तो दबंग पटवारी साहब निगम के कर्मचारियों से मुलाक़ात करने तक की हिम्मत नहीं जुटा पाए, या फिर यह कहाँ जाए की साहब सोच रहे है की निगम के कर्मचारियों से नहीं मिलेंगे तो अवैध निर्माण बच जायेगा, लेकिन अगर पूरा मामला का है और अवैध निर्माण साबित हो जाता है तो इसे बचाने की हर संभव कोशिश नाकाम ही साबित होंगी।

