12/07/2026
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सरगुजा समय अंबिकापुर :- एक बड़ा पुराना कहावत हैं की ‘भैंस के आगे बीन बजाओ

सरगुजा समय अंबिकापुर :- एक बड़ा पुराना कहावत हैं की ‘भैंस के आगे बीन बजाओ और भैंस खड़ी पगुराय ठीक ऐसा ही हाल सरगुजा जिला की क़ृषि विभाग का होना माना जा सकता हैं।

ऐसा हम नहीं कहा रहे हैं यह कहावत चरितार्थ कर रहा हैं क़ृषि विभाग सरगुजा के मुखिया उप संचालक क़ृषि, सयुंक्त संचालक सरगुजा के प्रभारी अधिकारी साथ साथ प्रभारी प्राचार्य कृषक प्रशिक्षण केंद्र अंबिकापुर भी हैं। इन तीनों पदों पर अलग अलग अफसर नहीं हैं इस तीनों पद पर एक ही अफसर आशीन हैं और उनका नाम पीताम्बर सिंह दीवान हैं। अगर एक अधिकारी तीन तीन पद पर आसीन हो तो यह समझने में तनिक भी विलम्ब नहीं करना चाहिए की ये महोदय कितना पहुंच और जुगाड़ वाले होंगे।

खैर अब हम आपको उस कहावत के बारे में बता रहे की ‘भैंस के आगे बीन बजाओ और भैंस खड़ी पगुराय यह कहावत दीवान साहब के ऊपर कैसे चरितार्थ होती हैं तो इस पुरे कहावत के पीछे उप संचालक क़ृषि दीवान साहब की विनायक पाण्डेय क़ृषि विकास अधिकारी के दीवानियत पर टीका हुआ हैं?। विनायक पाण्डेय वह अफसर हैं जो अपने कारनामो से लगातार चर्चित एवं विवादित रहते हैं बावजूद अपने कारनामें से बाज नहीं आते और दीवान साहब वो अफसर हैं जो विनायक पाण्डेय को हर संभव संरक्षण देते हुए इनके काले कारनामों एवं करतूतों से बचाने से बाज नहीं आते।

उप संचालक क़ृषि पीताम्बर सिंह दीवान के द्वारा विनायक पाण्डेय को लगातार संरक्षण प्रदान किया जा रहा हैं जिसका गवाह पूरा शहर एवं क़ृषि विभाग के समस्त स्टॉफ के साथ साथ अन्य विभागों के स्टॉफ भी हैं लेकिन विनायक पाण्डेय को बचाने के लिए DDA दीवान से विभागीय नीतियों नियम कानून सब ताक में रख दिया और उसके बाद भी विनायक पाण्डेय को संरक्षण प्रदान कर रहे हैं।

विनायक पाण्डेय के बचाव में उप संचालक पीताम्बर सिंह दीवान इस कदर दीवाने हो गये हैं की उन्हें महिला आयोग के अध्यक्ष के आदेश,राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के आदेश एवं 10 हजार रूपए के रिश्वत लेते वायरल वीडियों के गंभीर मामले को भी विनायक पाण्डेय एवं DDA अपने निजी स्वार्थ के कारण पुनः जाँच कर पूर्व में हुए कार्यवाही को गलत साबित कर विनायक पाण्डेय को प्रमोशन का लाभ दिलवाने का जी तोड़ कोशिश किया जा रहा हैं इसी लिए बड़े बड़े आयोग के आदेशों को दीवान साहब अपने पैरों की धूल समझ रद्दी की टोकरी में डाल रहे हैं ऐसा माना जा सकता हैं?

बता दे की जिस हिसाब से सरगुजा क़ृषि विभाग की कार्यशैली चल रही हैं उस हिसाब से यह माना जा सकता हैं की सरगुजा के कृषि विभाग में आदिवासी महिला कर्मचारियों के शोषण और प्रताड़ना का मामला अब प्रशासनिक अराजकता की पराकाष्ठा तक पहुँच चुका है।

यहाँ समझें क्या हैं पूरा मामला :- पूरा मामला लखनपुर के तत्कालीन प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी विनायक पाण्डेय के विरुद्ध है, जिन पर आदिवासी महिला कर्मचारियों को जातिगत आधार पर प्रताड़ित करने, अवकाश के दिनों में जबरन काम कराने और वेतन रोकने जैसे गंभीर आरोप हैं। इस गंभीर मामले में संवैधानिक संस्थाएं पूरी तरह सक्रिय हैं जिसमें राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST): ने 05/12/2025 को नोटिस जारी कर इस मामले में कार्रवाई की सूचना तलब की थी।


पुरे मामले में छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग: ने मामले का संज्ञान लेते हुए 11 मार्च 2026 तक जांच प्रतिवेदन पेश करने का कड़ा निर्देश दिया था। साथ ही साथ महिला आयोग की अध्यक्ष ने तो स्पष्ट आदेश दिया था कि आरोपी विनायक पाण्डेय को तत्काल निलंबित किया जाए और उनकी दो वेतन वृद्धि (Increment) रोकी जाए।


परन्तु सरगुजा जिला में अंगद की पैर बन मलाईदार कुर्सी में फेविकोल वाले जोड़ सी मजबूती के साथ बैठने वाले पीताम्बर दीवान आयोग के निर्देशों का पालन करने के जगह विनायक पाण्डेय के ढाल बनते हुए विभागीय कार्यवाही से तगड़ा बचाव करते हुए ”संरक्षक” भूमिका निभा रहे हैं?


सबसे बड़ा सवाल यह है कि महिला आयोग और राज्य जनजाति आयोग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, उपसंचालक कृषि, पीताम्बर सिंह दीवान ने अब तक आरोपी विनायक पाण्डेय के विरुद्ध निलंबन या कोई भी दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की? पीड़ितों का सीधा आरोप है कि उपसंचालक महोदय अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर आरोपी को बचा रहे हैं।


न्याय की राह में DDA दीवान की ‘अफ़सरशाही’ की दीवार
आपकी जानकारी के लिए बता दे की आदिवासी महिला कर्मचारियों—श्रीमती हरित सिंह, श्रीमती प्रेमा बेक, श्रीमती संध्या सिंह, श्रीमती अश्विनी, श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंह और श्रीमती बेरोनिका—द्वारा लगाई गई न्याय की गुहार को उपसंचालक स्तर के अधिकारी द्वारा नज़रअंदाज करना न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि आयोगों के आदेशों की खुली अवमानना है।


सूत्रों से प्राप्त जानकारी से आपको बता दे की सरगुजा उप संचालक क़ृषि के मलाईदार कुर्सी पर अजगर जी तरह कुंडली मार कर बैठने वाले पीताम्बर सिंह दीवान साहब के ऊपर कोरिया जिला में रहते हुए करोड़ों रूपए के ग़बन का आरोप लग चूका हैं, बता दे की दीवान साहब भ्रष्टाचार  करने में महारथ हासिल कर चुके हैं जिसकी खुसबू अभी भी कोरिया जिला में फैली हुई हैं और सरगुजा में जाँच हो जाए तो पूरी की पूरी बगिया तैयार हो जाए। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दीवान साहब के किए ग़बन मामले की जाँच अभी भी लंबित हैं शायद दीवान साहब यही सब गुरु ज्ञान विनायक पाण्डेय को दे रहे हो की कैसे शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के बावजूद पद का दुरूपयोग करके बच निकलना हैं।

खैर जब उपस्थिति संचालक क़ृषि पीताम्बर सिंह दीवान के द्वारा संवैधानिक संस्थाओं के आदेशों को ही “पैरों तले रौंदा” जा रहा हो, तो आम कर्मचारियों का न्याय पर से भरोसा डगमगाना स्वाभाविक है। अब देखना यह है कि क्या शासन स्तर पर पीताम्बर दीवान की इस संदिग्ध भूमिका की जांच होगी, या आयोग के आदेश फाइलों में ही दबे रह जाएंगे?

तो इस पुरे खबर के माध्यम से वही वाला कहावत चरितार्थ हो गया की भैस के आगे बिन बजाये भैस खड़ी पगुराय छत्तीसगढ़ के दिग्गज दिग्गज आयोग के अध्यक्ष एवं सचिव विनायक पाण्डेय के ऊपर कार्यवाही करने के आदेश एवं निर्देश दे रहे हैं और उप संचालक पीताम्बर सिंह दीवान अपने धून में मदमस्त हैं।

अगले खबर में हम आपको बताएँगे की अंबिकापुर से लेकर रायपुर तक किन किन आला अफसरों ने विनायक पाण्डेय को बचाने का ठेका ले रखा हैं 🙏

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