सरगुजा समय अंबिकापुर – अंबिकापुर के कन्या परिसर रोड़ विशुनपुर में स्थित दयानिधि हॉस्पिटल में अजब गजब मामला है यहां शासन के तमाम नियमों को ठेंगा दिखाते हुए कई बड़े बड़े करनामे कर दिए है जिसका खामियाजा मासूम मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
आयुष्मान योजना का नियम विरुद्ध तरीके से अपने निजी अस्पताल दयानिधि में पंजीयन करवाने में शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए सफलता पाई और शासन को आयुष्मान योजना के माध्यम से कई करोड़ रुपए का आर्थिक क्षति पहुंचने का कार्य अपने निजी स्वार्थ को साधने के लिए कर डाला।

विशेष सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार दयानिधि निजी हॉस्पिटल के संचालक द्वारा वर्ष 2022 में IIEM पोर्टल में ऑनलाइन पंजीयन किया जिसमें दयानिधि हॉस्पिटल को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना से जोड़ने के लिए पंजीयन फार्म भरा लेकिन विभाग ने उक्त हॉस्पिटल में लिफ्ट एवं रैंप न होने का बात कहते हुए 03 दिवस के भीतर लिफ्ट एवं रैंप की व्यवस्था करने के पश्चात पुनः आवेदन करने को कहा गया।
परन्तु शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी ने अपने पहुंच का फायदा उठाते हुए अपने स्वयं के निजी अस्पताल में बिना रैंप एवं लिफ्ट के ही आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना का पंजीयन करवा लिया जो कि उक्त हॉस्पिटल में अवैध तरीके से करोड़ों रुपए का भुगतान शासन से प्राप्त कर लिया।
जबकि आज दिनांक था लगभग 03 वर्ष पूर्ण होने को है दयानिधि हॉस्पिटल में रैंप की व्यवस्था नहीं हो पाई एवं लिफ्ट के नाम पर खानापूर्ति करते हुए समान माल वाहक के समान का लिफ्ट लगवा दिया गया जो कि किसी भी मानक को पूरा नहीं करता एवं एक बड़े हादसे हो जन्म देने वाला कारण साबित हो सकता है

अजीब विडम्बना है कि जहां गरीबों की सुविधा के लिए लिफ्ट और रैंप नहीं है उस हॉस्पिटल के स्वघोषित संचालक शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी एक कार जिसकी कीमत लगभग 65 से 70 लाख रुपए है एवं एक कार जिसकी कीमत लगभग 9 से 12 लाख रुपए है कि सवारी बड़े ठसक से करते हुए रसूखदारी दिखाते हुए अपना दबदबा बनाए रखें है। अब इनके द्वारा लगभग लगभग करोड़ों रुपए की गाड़ी का क्रय अपने शान शौक को पूरा करने के लिया गया परन्तु जिस आयुष्मान योजना पैसों से तमाम प्रकार की रहीसी दिखाई जा रही है उस आयुष्मान योजना के पैसों से दयानिधि हॉस्पिटल में मरीजों के सुविधाओं के लिए अच्छे मानक का लिफ्ट एवं रैंप नहीं बनवाया जा रहा है।

अब सबसे विचारणीय बात यह भी है कि डॉक्टर साहब जो कि एक शासकीय सेवक है इन्होंने करोड़ों रुपए के कार की सवारी करने के लिए शासन से वहां खरीदी करने की अनुमति ली या फिर नहीं इसकी जानकारी भी सूचना के अधिकार के तहत निकलवाई जा रही है जल्द ही आपको अवगत कराएंगे कि साहब ने शासन से अनुमति ली या फिर यह भी अपनी मनमानी करते हुए तमाम नियमों को ताक पर रख बिना शासन से अनुमति के करोड़ों रुपए के वाहन की सवारी करते हुए अपनी दबंगई दिखा रहे है।

