सरगुजा समय अंबिकापुर :- सरगुजा भी गजब हैं यहाँ लागातार आम नागरिकों कों अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए अपने हिसाब से उपयोग किया जाता है उसके बाद दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल कर फेक दिया जाता हैं।
जी हा हम बात कर रहे हैं अपने सरगुजा में हो रहे अजीबो गरीब कारनामें की यहाँ लागातार आम लोगों की एक मांग थी की छत्तीसगढ़ में सरगुजा का मुख्यमंत्री बने जिससे सरगुजा का विकास हो जिसके बाद अब केंद्र में भाजपा, छत्तीसगढ़ राज्य में भाजपा की सरकार वो भी सरगुजा का, विधायक, सांसद, स्वास्थ्य मंत्री परंतु सभी के होने के बावजूद सरकारी तंत्र के अफसर बेलगाम नजर आ रहे हैं।
जैसा की लागातार विपक्ष की पार्टियों के साथ – साथ आम नागरिकों का भी कहना हैं की सरगुजा में अधिकारी बेलगाम होते नजर आ रहे क्योंकि सरगुजा में तमाम नियम क़ानून की धज्जियाँ उड़ाते हुए लोगों कों भ्रस्ट अफसरों द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा हैं और कार्यवाही करना तों दूर कार्यवाही करने माँ विचार तक मन में नहीं लाती हैं।
शहर में निजी हॉस्पिटल के कुछ संचालक ऐसे हैं जिन्हे मेडिकल माफियाओं के होड़ में आगे बढ़ना हैं ऐसा प्रतीत होता हैं जिसके कारण हर तरीके अपनाएं जा रहे हैं। और मासूम ग्रामीणों कों टारगेट करके उनके जान से खिलवाड़ किया जा रहा हैं।
शहर की आम जनता स्वास्थ्य सेवाओं के लिए इन मेडिकल माफियाओं के चंगुल में फस कर अपने जमीन जायदाट तक कों बेच एवं गिरवी रख कर ईलाज करवाने कों मजबूर हैं।
उसके बाद भी जिले के स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर इस ओर ध्यान देना ही नहीं चाह रहे क्योंकि मोटी रकम वाली कमीशन से इनकी बोलती बंद हो गई हैं ऐसा प्रतीत होता हैं।

हमने अपने खबरों में बताया की कैसे डॉक्टर संदीप त्रिपाठी जो की एक पूर्णकालिन शासकीय डॉक्टर होते हुए अपनी धर्मपत्नी के नाम से संचालित निजी दयानिधि हॉस्पिटल में अपनी सेवा पूरी ईमानदारी के साथ दें रहे हैं। जिसपे कार्यवाही करने की हिमाकत CMHO एवं अन्य आला अफसरों की नहीं हो रही।
संदीप त्रिपाठी जो की नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी भी हैं जिन्हे तमाम निजी हॉस्पिटलों क्लिनिक जैसे तमाम स्थलों पर मरीजों के साथ होने वाले अनन्या एवं लूट खसोट की जाँच करके कार्यवाही करने की जिम्मेदारी एवं जवाबदारी दी गई हैं परंतु साहब संदीप त्रिपाठी कों आपदा में अवसर कैसे ढूंढना हैं यह बखूबी आता हैं।
जिसके कारण तमाम कमियों के बावजूद इनकी दयानिधि हॉस्पिटल का संचालन धड़ल्ले से बेखौफ हो रहा हैं क्योंकि यहाँ तों सैया ही कोतवाल हैं तों फिर निजी हॉस्पिटल दयानिधि के संचालन संचालन में कौन रोक टोक करेगा।
संदीप त्रिपाठी के द्वारा बकायादा समाचार पत्रों में अपने निजी हॉस्पिटल का प्रचार प्रसार करने के लिए कई जिलों के एडिशन वाले समाचार पत्रों में विज्ञापन छपवाया जा रहा हैं उसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर से लेकर अन्य तमाम अफसर फिर चाहे स्वास्थ्य विभाग के मुखिया हो या जिला कलेक्टर या फिर स्वास्थ्य मंत्री ही क्यों ना हो सभी अपनी आँखे बंद कर रखी हैं ऐसा प्रतीत होता हैं।
क्योंकि जिस हिसाब से डॉक्टर संदीप त्रिपाठी का बोलबाला एवं रसूखदारी दबंगई देखनने सुनने कों मिल रही हैं उससे यह स्पष्ट होता हैं की डॉक्टर कों जान कर नर्सिंग होम एक्ट के प्रभार से नहीं हटाया गया हैं क्योंकि अगर साहब कों नर्सिंग होम के प्रभार से हटा दिया गया तों साहब के दयानिधि हॉस्पिटल जाँच ईमानदारी पूर्वक हो जाएगी जिससे हॉस्पिटल की तमाम कमिया उजागर हो जाएगी।

