30/06/2026
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सरगुजा समय अंबिकापुर :- पंकज बेक मृत्यु मामला: सप्तम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अंबिकापुर ने स्वीकार की पुनरीक्षण याचिका, जाँच के नए आयाम

बहुचर्चित पंकज बेक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में न्यायिक प्रक्रिया ने एक नया और निर्णायक मोड़ ले लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सप्तम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, अंबिकापुर (जिला सरगुजा) की अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता राजवर्धन सिंह द्वारा प्रस्तुत पुनरीक्षण (Revision) याचिका के आधारों को न केवल गंभीरता से सुना, बल्कि उसे स्वीकार भी कर लिया है। न्यायालय का यह आदेश इस मामले में न्याय की उम्मीदों को नया बल दे रहा है।


न्यायालय के कड़े निर्देश: पुनः विवेचना या C.B.I. जांच
प्राप्त जानकारी और दस्तावेज़ों के अनुसार, अदालत ने इस प्रकरण में पूर्व में हुई जांच की खामियों पर कड़ी टिप्पणी की है। न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पुलिस महानिरीक्षक (IG) सरगुजा, पुलिस अधीक्षक (SP) की देखरेख में एक विशेष जांच टीम गठित करें और इस पूरे मामले की पुनः विवेचना कराएं।


इतना ही नहीं, अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि स्थानीय पुलिस स्तर पर निष्पक्ष जांच में कोई बाधा आती है या सक्षम नहीं पाई जाती है, तो इस प्रकरण की संपूर्ण कार्यवाही को C.B.I. को सौंपा जाए। आदेश के तहत विचारण न्यायालय के अभिलेख वापस लेने और उसकी प्रति IG सरगुजा को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।


क्या था मामला और विवाद क्यों?
दस्तावेज़ों के अनुसार, पंकज बेक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था। पुलिस का दावा था कि पूछताछ के दौरान वह आरक्षक को चकमा देकर फरार हो गया और बाद में ‘परमार अस्पताल’ में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। हालांकि, मृतक के परिजनों और अधिवक्ता राजवर्धन सिंह द्वारा इस कहानी पर गंभीर सवाल उठाए गए थे।

पूर्व की जांच में मौत का कारण ‘आसफिक्सिया’ (सांस का अवरुद्ध होना) बताया गया था, लेकिन शरीर पर मौजूद चोटों और परिस्थितियों को लेकर जो तर्क अधिवक्ता राजवर्धन सिंह ने अदालत के समक्ष रखे, उन्हें अब कानूनी मान्यता मिल गई है।


न्याय की दिशा में बड़ी उपलब्धि :- सप्तम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा पुनरीक्षण याचिका स्वीकार किया जाना पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ा कानूनी संदेश है। अधिवक्ता राजवर्धन सिंह के तर्कों ने इस मामले के उन पहलुओं को उजागर किया है, जो अब तक जांच से ओझल थे।


जिले के प्रबुद्ध वर्ग और आम नागरिक अब इस नई जांच पर पैनी नजर रखे हुए हैं। क्या यह जांच पुलिस अभिरक्षा में हुई इस संदिग्ध मौत की असल सच्चाई सामने लाएगी? यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

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