01/06/2026
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सरगुजा समय अम्बिकापुर 22 मार्च 2026/ 

सरगुजा वनमण्डल अंबिकापुर अंतर्गत संचालित संजय वन वाटिका में करोड़ों रूपए के लागत से काफ़ी साज सज्जा किया गया है तरह तरह के कार्य इस वन वाटिका में कराया गया हैं एवं अहाता निर्माण कार्य करवाया गया हैं बावजूद उसके विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई हैं जिसका खामिहाजा 15 हिरणों कों अपनी जान देकर चुकाना पड़ा।

बता दें की सरगुजा के इस संजय वन वाटिका में लगभग सैकड़ों की संख्या में पर्यटको का आना जाना लगा रहता हैं जहाँ तरह तरह के वन्य प्राणियों के द्वारा तमाम पर्यटको का ध्यान आकर्षित किया जाता हैं वही 15 हिरणों की मौत अत्यंत दुःखद हैं।

इस प्रकार से 15 हिरणों की मौत एवं वन विभाग के द्वारा आनन फानन में मृत्य हिरणों कों जलाने की जल्दबाजी करना एवं मामले कों दबाने की कोशिस करना किसी बड़े साजिस का होना माना जा सकता हैं इस तरह से लीपापोती से विभाग के कार्यशैली पर सांवलिया निशान खड़ा करता हैं। जो की गंभीर जाँच का विषय हैं।

क्या हैं पूरा मामला और क्या कहता हैं विभाग यहाँ पढ़े

सरगुजा वनमण्डल अंबिकापुर अंतर्गत संचालित संजय वन वाटिका (वन प्रबंधन समिति शंकरघाट) में 21 मार्च 2026 की रात्रि लगभग 3ः00 से 3ः30 बजे के मध्य आवारा कुत्तों द्वारा शाकाहारी पशु बाड़ों (हर्बिवोर एन्क्लोजर) में घुसकर हिरणों पर हमला किए जाने की घटना सामने आई है।

प्रातः लगभग 8ः30 बजे प्राप्त सूचना के अनुसार आवारा कुत्तों ने बाड़े की फेंसिंग के नीचे से प्रवेश कर हिरणों को दौड़ाया एवं उन पर हमला किया, जिससे 14 हिरण (6 कोटस, 6 चीतल एवं 2 चौसिंघा) गंभीर रूप से घायल होकर मृत हो गए।

सूचना मिलते ही उप वनमण्डलाधिकारी अंबिकापुर, संयुक्त वनमण्डलाधिकारी सरगुजा, पार्क प्रभारी सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी एवं वन प्रबंधन समिति के सदस्यों द्वारा तत्काल मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया गया।



स्थल निरीक्षण के दौरान संजय वन वाटिका, वन परिक्षेत्र अंबिकापुर, कक्ष क्रमांक आर.एफ. 2580 (जीपीएस लोकेशन N-23.149407, E-83.211295) में सभी 14 मृत वन्यप्राणियों के शव ताजा अवस्था में पाए गए।

निरीक्षण में सभी हिरणों के गर्दन, शरीर एवं पिछले भाग में ताजे चोट के निशान तथा कुछ में गहरे घाव पाए गए, जो आवारा कुत्तों के हमले की पुष्टि करते हैं।

मौके पर पंचनामा तैयार कर वन्यजीव चिकित्सक डॉ. अजीत पाण्डेय एवं डॉ. शौरी द्वारा मृत हिरणों का नियमानुसार पोस्टमार्टम कराया गया तथा आवश्यक सैम्पल एवं विसरा सुरक्षित किया गया।

पोस्टमार्टम उपरांत नियमानुसार संजय वन वाटिका परिसर में ही शाम 4ः30 बजे वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में ैव्च् का पालन करते हुए मृत हिरणों का दाह संस्कार किया गया। उल्लेखनीय है कि घटना में घायल एक चीतल की मृत्यु 22 मार्च 2026 को प्रातः 09ः00 बजे हो गई, जिसका भी विधिवत पोस्टमार्टम कर दाह संस्कार किया गया। इस प्रकार कुल 15 हिरणों की मृत्यु हुई है।

उप वनमण्डलाधिकारी द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में यह पाया गया कि रात्रि ड्यूटी में तैनात चौकीदारों द्वारा कर्तव्यों का समुचित निर्वहन नहीं किया गया तथा संजय वन वाटिका में पदस्थ कर्मचारियों द्वारा अपेक्षित जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया गया।

इस गंभीर लापरवाही को दृष्टिगत रखते हुए मुख्य वन संरक्षक, सरगुजा वन वृत्त अंबिकापुर द्वारा उप वनक्षेत्रपाल अशोक सिन्हा, वनपाल ममता परते, वनपाल प्रतीमा लकड़ा एवं वनपाल बिन्दू सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। साथ ही वनरक्षक फुलमनी को वनमण्डलाधिकारी सरगुजा वनमण्डल अंबिकापुर द्वारा निलंबित किया गया है।

वन विभाग द्वारा घटना को गंभीरता से लेते हुए संजय वन वाटिका की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने, बाड़ों की मरम्मत एवं निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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