सरगुजा समय अंबिकापुर :- सरगुजा में अजीबो गरीब मामला चल रहा है जहाँ क़ृषि विभाग के कुछ अफसर कार्यवाही करने के बजाये दुकानदार से पैसे के डिमांड कर रहे है ऐसा प्रतीत होता नजर आ रहा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें की उर्वरक निरिक्षक सोहन भगत के द्वारा लगभग छः माह से अंबिकापुर कार्यालय में उर्वरक निरिक्षक के पद के रूप में कार्य कर रहे है परन्तु क़ृषि विभाग के इस अफसर के द्वारा आज दिनांक तक उन दुकानदारों के ऊपर किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई जिन दुकानदारों के द्वारा फर्जी रूप से उर्वरक विक्री किया जा रहा है।

विभाग एवं दुकानदारों में एक आम चर्चा बड़ा धूम मचा रही है की उर्वरक निरिक्षक साहब बड़ा मस्त आदमी है क्योंकि इनके द्वारा कार्यवाही नहीं किया जाता इनका फंडा बड़ा निराला है खुद खाओ और दुकानदारों को फर्जी तरीके से कार्य करने दिया जाए, इनके इसी अंदाज से साहब के पास आए से अधिक संपत्ति होने का दावा शहर के एक चाय दूकान पर चर्चा बड़े जोरों पर चलते रहती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें की विजय ट्रेडिंग कम्पनी जिसके द्वारा अवैध रूप से उर्वरक बेचने का मामला काफ़ी तीव्रता से फैला देखते ही देखते इस मामले की हवा आग के तरह फ़ैल गई जिसके बाद विभाग के कुछ अफसर कार्यवाही करने के जगह उक्त दुकानदार से दलाली करते हुए माल बचाने के लिए 10-15 लाख रूपए की डील करना प्रारम्भ कर दिया जिसके वजह से विजय ट्रेडिंग कम्पनी के माल को राजसात नहीं किया जिसमे उर्वरक निरिक्षक सोहन भगत एवं उप संचालक क़ृषि पीताम्बर दीवान की भूमिका काफ़ी संदिग्ध नजर आ रही है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अगर किसी दुकान पर कार्यवाही की जाती है तो 30 दिवस की अवधि दुकानदार को दिया जाता है जिसमे दुकानदार अपने दुकान के माल को डिस्पोज कर ले अगर दुकानदार 30 दिवस के भीतर माल डिस्पोज नहीं करता है तो शासन के द्वारा राजसात की कार्यवाही की जाती है परन्तु उर्वरक निरिक्षक सोहन भगत महोदय इस मामले में कार्यवाही नहीं क्यों नहीं कर पाए यह गंभीर संदेह उत्पन्न करने वाला बात है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विजय ट्रेडिंग कम्पनी के माल को राजसात करने का आदेश सरगुजा कलेक्टर द्वारा दिया जा चूका है उसके बाद विजय ट्रेडिंग संचालक के द्वारा उक्त मामले को लोवर कोर्ट में ले जाया गया। वहां भी विजय ट्रेडिंग कम्पनी के संचालक को मुँह की खानी पड़ी अब मामला सरगुजा कमिश्नर के पास पहुंच चूका है अब देखने वाली बात यह है की कलेक्टर एवं कोर्ट से राजसात करने के आदेश के बाद अब सरगुजा कमिश्नर के द्वारा क्या आदेश दिया जाता है।

विजय ट्रेडिंग कम्पनी के ऊपर कार्यवाही होने के आज छः माह बीत जाने के बाद भी राजसात की कार्यवाही नहीं होना क़ृषि विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस मामले में उर्वरक निरिक्षक सोहन भगत के द्वारा कार्यवाही नहीं करने के लिए 6 लाख की मांग की गई थी जिसके बाद इस मामले में एक और अधिकारी की एंट्री होने के बाद डिमांड राशि 10-15 लाख हो जाती है जिसमे उक्त माल को बचाने का दावा उर्वरक निरिक्षक सोहन भगत द्वारा किया जा रहा इस लिए राजसात की कार्यवाही भी नहीं किया गया ।
अब ऐसा प्रतीत होता है की इसी डिमांड के कारण आज छः माह बीत जाने के बावजूद विजय ट्रेडिंग कम्पनी में राजसात की कार्यवाही नहीं किया गया पुरे शहर में उर्वरक निरिक्षक सोहन भगत के लीलाओ का चर्चा काफ़ी तेज है, बता दें की सोहन भगत महोदय की इस तरह की लीलाये यह पहली नहीं है इनके द्वारा जिस जगह में रहा गया है वहां अपने वसूलीबाजी एवं गोलमाल करके शासन को चुना लगाते हुए अवैध कमाई वाली प्रविति दिखा ही देते है।

यही कारण है की उर्वरक निरिक्षक सोहन भगत महोदय अपने आए से अधिक संपत्ति अर्जित कर चुके है इनके संपत्ति का आकलन करना आम नागरिकों के बस की बात नहीं है। जल्द ही आपको अन्य जिला में रहते हुए किये गए लीलाओ से अवगत करवाएंगे।
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