सरगुजा समय अंबिकापुर :- सरगुजा मे निजी अस्पतालों की मनमर्जी के आगे नगर निगम घुटने टेकते हुए दिख रहा है ऐसा प्रतीत हो रहा है या फिर यह कहा जा सकता है की अवैध निर्माण करने के मामले मे निजी अस्पताल के संचालक नगर निगम के कुछ अधिकारी कर्मचारी को अपने जूते की नोक मे रखने लगे है। जिस प्रकार से नगर निगम के कुछ अफसर कार्य कर रहे है उस हिसाब से लगातार सवाल नगर निगम के कुछ अफसरों पर खड़ा हो रहा है, यह हम नहीं कह रहे बल्कि नगर निगम के कुछ अफसर जो की इन रसूखदारों के चरण वंदन एवं चाटुकारिता मे लिप्त होने के वजह से कार्यवाही कर पाने मे असमर्थ नजर आ रहे है उनकी इस तरह की कार्यशैली तमाम बाते बया कर रही है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें की विगत एक वर्ष पूर्व नगर निगम को एक शिकायतकर्ता के माध्यम से शिकायत प्राप्त हुई थी जिसमे गायत्री हॉस्पिटल जो की अंबिकापुर के सबसे व्यवस्तम सडक बनारस रोड़ के ठीक बगल मे संचालित है के ऊपर आरोप लगाते हुए शिकायतकर्ता के द्वारा शिकायत किया गया था उक्त हॉस्पिटल को तमाम नियमों के विपरीत अवैध निर्माण किया गया है जिसमे कमिश्नर नें जांच के आदेश भी दिए थे।

शिकायतकर्ता नें अपने शिकायत मे यह उल्लेख किया गया था कि बनारस रोड में स्थित भूमि खसरा नंबर 334/151 रकबा 0.0240 हेक्टेयर भूमि अचंभित प्रकाश गुप्ता पिता विंध्याचल गुप्ता एवं गायत्री गुप्ता के नाम से संयुक्त रूप से भूमि है। उक्त भूमि पर व्यावसायिक निर्माण हेतु दिनांक 15/7/2020 को कार्यालय नगर पालिका निगम अंबिकापुर छत्तीसगढ़ के द्वारा भवन निर्माण हेतु अनुज्ञा पत्र क्रमांक 7607 दिनांक 12.2.2021 को जारी किया गया।

उक्त भवन निर्माण अनुज्ञा काफी नियम शर्तों का उल्लेख किया गया है जिसमें भूखंड के बाहर छज्जा, बालकनी के बाहर न निकाले, गंदा पानी निकाल व्यवस्था, निगम नाली तक स्वयं के खर्चे से करना, भूखंड सड़क के मध्य सामने 12 मीटर छोड़कर करना, सेट वैक्स छोड़ें, सामने 6 मीटर, पीछे 3.75 मीटर, बाजु 0 मीटर, दुसरे बाजु 0 मीटर का लेख किया गया है इसके अलावा कुल निर्माण क्षेत्रफल भूतल तथा प्रत्येक पर FF 146.85, SF 127.1 वर्ग मीटर में रेसिडेंशियल भवन निर्माण से अधिक ना हो, भवन ऊंचाई 6.45 मीटर से अधिक ना हो, व फशी क्षेत्र 1.75 से अधिक ना हो इसके अलावा छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 के नियम 64 के अनुसार प्रति 100 वर्ग मीटर में प्रति वृक्ष के दर से वृक्षारोपण करना अनिवार्य होगा साथ ही साथ भवन निर्माण अनुज्ञा में यह भी लेख किया गया है कि प्रस्तावित सड़क चौड़ाई में आने वाले भाग को यातायात हेतु सड़क के लेवल पर रखे चबूतरा का कोई भी निर्माण न करें और रेन वाटर हार्वेस्टिंग भूमि विकास नियम 78 के अनुसार प्रावधानों का पालन करना भी अनिवार्य होगा।

भवन अनुज्ञा के साथ निर्माण कार्य हेतु नक्शा की भी स्वीकृत की गई थी उक्त नक्शे के अनुसार वर्तमान में निर्माण कार्य नहीं किया गया तथा नक्शे की विपरीत कार्य कर भवन निर्माण अनुज्ञा के आदेश का उल्लंघन किया गया है।
भवन निर्माण अनुज्ञा में उल्लेखित उपरोक्त नियमों को दरकिनार का निर्माण कार्य कराया गया है तथा उल्लंघन किया गया है इसलिए नगर निगम से प्रदान किए गए भवन की अनुमति के विपरीत निर्माण करने के संबंध में समुचित कार्यवाही कर अवैध निर्माण को हटाया जाना आवश्यक है। की शिकायतकर्ता नें दिनांक 20/12/2014 को संभागायुक्त सरगुजा के समक्ष प्रस्तुत किया था।
जिसके बाद उपरोक्त शिकायत एवं उसके साथ प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर आयुक्त सरगुजा संभाग अंबिकापुर के द्वारा दिनांक 31.12.2024 को कलेक्टर सरगुजा को शिकायत पत्र में उल्लेखित तथ्यों की बिंदुवार जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई कर जांच प्रतिवेदन 15 दिवस में उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया था।

ठीक इसी क्रम मे दिनांक 20.12.2024 एवं 6/2/2025 को एक शिकायत आवेदन मय दस्तावेज के साथ आयुक्त नगर पालिका निगम अंबिकापुर के समक्ष प्रस्तुत किया गया था जिसमें यह लेख किया गया था कि बनारस रोड में स्थित भूमि खसरा नंबर 334/151 रकबा 0.0240 हेक्टेयर भूमि अचंभित प्रकाश गुप्ता पिता विंध्याचल गुप्ता एवं गायत्री गुप्ता के नाम से संयुक्त रूप से भूमि है।जिनके द्वारा उक्त मामले मे भवन अनुज्ञा के साथ निर्माण कार्य हेतु नक्शा की भी स्वीकृत की गई थी उक्त नक्शे के अनुसार वर्तमान में निर्माण कार्य नहीं किया गया तथा नक्शे की विपरीत कार्य कर भवन निर्माण अनुज्ञा के आदेश का उल्लंघन किया गया है।
उपरोक्त शिकायत एवं उसके साथ प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर आयुक्त नगर पालिका निगम अंबिकापुर के द्वारा दिनांक 14.2.2025 को श्री राजेश कुमार राम भवन अधिकारी, श्रीमती प्रियंका पटेल, कु. सपना खलखो, श्री रत्नेश कंवर एवं श्री प्रेम दुबे उप अभियंता नगर पालिका निगम अंबिकापुर को उक्त भवन की जांच कर स्पष्ट प्रतिवेदन अभिमत सहित 7 दिवस में प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।

अब सबसे बड़ी विडंबना यह है की आज लगभग एक वर्ष पूर्ण होने को है लेकिन नगर निगम आयुक्त के द्वारा गठित जाँच टीम का 07 दिवस कितने दिनों का होता है यह तो नगर निगम की जाँच टीम ही जाने लेकिन निगम के जाँच टीम की जाँच रिपोर्ट कहा अटक गई एवं गायत्री हॉस्पिटल पर किस बाबा का आशीर्वाद बन गया की आज तक कार्यवाही नहीं हो पाई।
खैर तमाम मामलों की विस्तृत जानकारी निकाला जा रहा है अगले अंक मे निगम के द्वारा किये गए कार्यवाही या फिर झोल झाल एवं कारनामो की पोल खोल किया जायेगा।
इस तमाम मामले मे नगर निगम आयुक्त का भी पक्ष जानने का प्रयास किया गया परन्तु आयुक्त महोदय से फोन पर संपर्क नहीं हो पाया खैर साहब फोन उठाने की जहमत भी नहीं करते है।


