सरगुजा समय रामानुजगंज / बलरामपुर:
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में वन्यजीव अंगों की अवैध तस्करी के खिलाफ वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) ने एक बड़ा और सफल अभियान चलाया है।
मिली जानकारी के अनुसार रामानुजगंज के स्थानीय आमंत्रण धर्मशाला में चल रही हाथी के दांत और जबड़े की गुप्त सौदेबाजी के दौरान केंद्रीय एजेंसी ने छापा मारकर सतेंद्र रजक उर्फ ‘नंदू’ समेत तीन शातिर तस्करों को रंगे हाथों दबोच लिया है।
इस पूरी कार्रवाई के केंद्र में सतेंद्र रजक उर्फ ‘नंदू’ का नाम सामने आया है, जिसे इस अवैध कारोबार की कड़ियों में एक अहम किरदार माना जा रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मुख्य आरोपी सतेंद्र रजक उर्फ ‘नंदू’ ही मना जा रहा हाई जिसके नेतृत्व में यह डील किया जा रहा था ऐसा मामला सामने आ रहा हाई।
पहचान: रामानुजगंज निवासी सतेंद्र रजक (जिसे इलाके में ‘नंदू’ के नाम से भी जाना जाता है) वन्यजीव अंगों की इस हाई-प्रोफाइल डील को अंजाम देने में सक्रिय रूप से शामिल था।

WCCB और स्थानीय जांच एजेंसियों की रडार पर लंबे समय से ऐसे तस्कर थे। इस छापेमारी के दौरान नंदू की संलिप्तता ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि स्थानीय स्तर पर तस्करों के तार किस हद तक जुड़े हुए हैं।
आरोपियों से बरामदगी: हाथी के बहुमूल्य और प्रतिबंधित दांत, जबड़े के हिस्से तथा नशीला पदार्थ।
गिरफ्तार अन्य आरोपी: सतेंद्र रजक उर्फ ‘नंदू’ (निवासी – रामानुजगंज, छत्तीसगढ़), अजय गुप्ता (निवासी – रामानुजगंज, छत्तीसगढ़), संतोष विश्वकर्मा (निवासी – तुकबेरा, नावाबाजार थाना क्षेत्र, पलामू जिला, झारखंड)
कानूनी शिकंजा: आरोपियों के खिलाफ वन्य प्राणी (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 9, 39, 48(क), 50, 51 एवं 52 के तहत कठोर वैधानिक कार्रवाई की गई है। सभी को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
अंतरराज्यीय नेटवर्क की तलाश में जुटी एजेंसियां:- सतेंद्र रजक उर्फ ‘नंदू’ और उसके साथियों की गिरफ्तारी के बाद अब वन्यजीव संरक्षण एजेंसियां इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि झारखंड और छत्तीसगढ़ के बीच फैला यह तस्करी का जाल कितना बड़ा है। यह हाथी के अंग कहां से लाए गए थे और इन्हें आगे किस खरीदार को बेचा जाना था, इन तमाम पहलुओं पर से पर्दा उठाने के लिए आगे की जांच तेजी से जारी है।

