सरगुजा समय छत्तीसगढ़ अंबिकापुर:- लगातार त्रिभुवन सिंह के मामले में खबर प्रकाशन करने के पीछे हमारा पटवारी त्रिभुवन सिंह से कोई बैर नहीं हैं बल्कि एक छोटे से पद में बैठ लगभग 40-50 का वेतन पाने वाला कर्मचारी कैसे बड़े बड़े नेताओं से लेकर आला अफसरों को अपने अंगुलियों पर नचाने का छमता रखता हैं यह आप सभी को अवगत करना हैं।
हम उस सरगुजा जिला में रहते हैं जहाँ गरीबों पर कार्यवाही के नाम पर हंटर चलाने वाला निगम प्रशासन बड़े रसूखदारों के सामने नतमस्तक होता दीखता रहता हैं, जो निगम प्रशासन लगातार गरीबों के ठेले गुमटीयों को हटाते जप्त करते दीखता हैं वही अफसर इस त्रिभुवन सिंह के द्वारा शासकीय सड़क पर कब्ज़ा करते हुए अपने जमीन दलाली से कमाए रुपयों का रौब झाड़ते हुए सेड निर्माण के साथ साथ सड़क पर टाइल्स की परते ताक बिछवा दी यह होना लाजमी भी हैं क्योंकि अवैध तरीके एवं अचानक प्राप्त पैसे की गर्मी बर्दास्त कर लेना सबके बस की बात नहीं होती ऐसा बड़े बुजुर्गो का कहना हैं।
सत्ता का रसूख या निगम की मेहरबानी? आम आदमी पर डंडा चलाने वाला निगम प्रशासन पटवारी त्रिभुवन सिंह के अतिक्रमण के सामने हुआ नतमस्तक!
जब सरकारी जमीन और रास्तों को अतिक्रमण से बचाने की जिम्मेदारी निभाने वाला ही खुद अतिक्रमणकारी बन जाए, तो न्याय की गुहार किससे लगाई जाए? अंबिकापुर गोधनपुर के वार्ड क्रमांक 05 में व्यवस्था को मुंह चिढ़ाने वाला एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ शासकीय पद पर बैठे पटवारी त्रिभुवन सिंह ने अपने पद और रसूख का तगड़ा इस्तेमाल करते हुए सरेआम एक सरकारी सीसी रोड को अपने घर के आंगन में तब्दील कर लिया है।
कानून की उड़ी धज्जियां: सड़क पर शेड और टाइल्स का साम्राज्य
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, वार्ड 05 में महेश्वरी मंदिर के ठीक सामने से गुजरने वाले संकरे रास्ते को पटवारी महोदय ने अपनी निजी संपत्ति समझ लिया है। इनकी दबंगई और मनमानी का आलम यह है कि सरकारी सीसी रोड के ठीक ऊपर न केवल अवैध तरीके से भारी-भरकम शेड तान दिया गया है, बल्कि बेशर्मी की हद पार करते हुए उस सार्वजनिक सड़क पर बकायदा टाइल्स भी लगवा दिए गए हैं। इस अवैध कब्जे के चलते पहले से ही संकरा रास्ता और भी सिकुड़ गया है, जिससे आम राहगीरों और स्थानीय निवासियों का निकलना मुहाल हो गया है।
’सैंया भए कोतवाल…’ खुद राजस्व कर्मचारी कर रहा अपराध
पटवारी का मूल काम जमीनों का सीमांकन करना, अतिक्रमण रोकना और सरकारी संपत्तियों की रक्षा करना होता है। लेकिन यहाँ एक शासकीय सेवक खुद सरेआम कानून को ठेंगे पर रख रहा है। शासकीय पद पर कार्यरत रहते हुए सार्वजनिक सड़क पर कब्जा करना केवल एक अतिक्रमण नहीं है, बल्कि यह ‘सिविल सेवा आचरण नियमों’ का घोर उल्लंघन और एक गंभीर कानूनी अपराध है। जिस पर जिला के मुखिया एवं नगर निगम आयुक्त को कड़ी कार्यवाही करने की आवश्यकता हैं।
सवालों के घेरे में निगम प्रशासन: क्या अधिकारियों की आँखों पर बंधी है पट्टी?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। क्या निगम के अधिकारियों को यह अवैध निर्माण दिखाई नहीं दे रहा? जो निगम का अतिक्रमण दस्ता गरीब ठेले वालों और आम जनता की छोटी सी गलती पर बुल्डोजर लेकर पहुँच जाता है, वह एक पटवारी के रसूख के आगे घुटने क्यों टेके हुए है?
क्या इस अवैध निर्माण को निगम के उच्च अधिकारियों का मौन समर्थन प्राप्त है?
खैर शासकीय भूमि में कब्ज़ा करने में पटवारी त्रिभुवन सिंह को महारथ हासिल हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शहर के सबसे महगे ईलाके में जहाँ 8-10 लाख रूपए प्रति डिसमिल भूमि हैं वहां पर इनकी माताजी की नाम से रजिस्ट्री वाली भूमि के साथ साथ सरकारी जमीन पर भी कब्ज़ा करते हुए इस पटवारी ने अपना आलीशान फार्म हॉउस बनवाया हैं एवं एक वायरल वीडियों में पत्रकारों को इसी फार्म हॉउस में बाँधने की बात करते हुए अपनी गुंडई एवं दबंगई दिखाने का प्रयास किया जा रहा हैं। यह मना जा सकता हैं।
तमाम तरीके से नियम विरुद्ध कारनामें करते हुए विदेश यात्रा करने के साथ शासकीय जमीन में कब्ज़ा, सड़क पर कब्ज़ा जैसे कई अन्य करतूतों के खबर प्रकाशन से शहर के एक पटवारी पाण्डेय एवं एक अन्य पटवारी जो त्रिभुवन सिंह का गुरु हैं के पेट में काफ़ी दर्द हो रहा हैं। ऐसा प्रतीत होता हैं की अपने द्वारा किए कारनामो का बखान पचाने में असमर्थ हो रहे हैं। जबकि अन्य पटवारी एवं पाण्डेय पटवारी के करनामो का कोई बखान अभी हमने शुरू ही नहीं किया।
जिस हिसाब से इनकी बौखलाहट एवं खबर ना लगाने के लिए जगह जगह से धमकी दिलवाने, जान से मार के फेकवा देने झूठे केस में फसा देने की खबर मुझ तक पहुंचवाई जा रही हैं उससे यह प्रतीत होता हैं की पटवारी त्रिभुवन सिंह के साथ पटवारी पाण्डेय एवं एक अन्य पटवारी इनका गुरु के साथ इनके तमाम सरगना ना जाने कितने अवैधानिक कृत्य किए हैं जिसके वजह से इन्हे भयभीत होना पड़ रहा हैं की त्रिभुवन सिंह के ऊपर कार्यवाही की आंच कही इनके कारनामें उजागर ना कर दें।
खैर अगले खबर में हम आपको बताएँगे की कितने पटवारियों, आर आई, तहसीलदार एवं पुलिसकर्मी की सहभागिता इनके करतूतों में शामिल हैं।

