सरगुजा समय अम्बिकापुर रामानुजगंज :- कहते हैं की जिला का मुखिया कलेक्टर होता हैं जिसके
सरगुजा समय अम्बिकापुर रामानुजगंज :- कहते हैं की जिला का मुखिया कलेक्टर होता हैं जिसके आदेश का पालन हर व्यक्ति एवं विभागीय अधिकारी कर्मचारियों को करना पड़ता हैं परन्तु सरगुजा में जिला प्रशासन के मुखिया यानी कलेक्टर के आदेश की अवहेलना करने की हिम्मत यहाँ के रसूखदार आरोपियों ने दिखा दी है। ग्राम भिट्ठिकला की एक बेबस विधवा सावित्री यादव की 3.14 एकड़ बेशकीमती जमीन हड़पने के मामले में, कलेक्टर द्वारा एफआईआर (FIR) दर्ज करने के स्पष्ट निर्देश दिए हुए 22 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिसिया तंत्र है कि ‘कुंभकर्णी नींद’ से जागने को तैयार नहीं है।
आपकी जानकारी के लिए बता दे की सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने ग्राम भिट्टीकला में करोड़ों रुपए की जमीन फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कराने के मामले में FIR दर्ज कराने अंबिकापुर तहसीलदार को लगभग 22 दिन पहले ही निर्देश दिए हैं। परन्तु अब सरगुजा में कलेक्टर के आदेश को भी महत्व नहीं दिया जा रहा यह माना जा सकता हैं।
धोखाधड़ी के शिकायत के बाद कलेक्टर ने जमीन की खरीदी-बिक्री पर रोक लगा दी थी। जमीन दलालों ने 24 डिसमिल जमीन का सौदा कर महिला के नाम दर्ज 3.17 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री करा ली थी।
बता दे की कलेक्टर के जाँच आदेश के बाद अंबिकापुर एसडीएम ने जांच में बताया है कि, पटवारी ने 24 डिसमिल जमीन की चौहद्दी बिक्री के लिए बनाई थी। यह चौहद्दी रजिस्ट्री दस्तावेज में नहीं लगाई गई है। जमीन दलालों ने सावित्री देवी के फर्जी हस्ताक्षर से नई चौहद्दी बना ली, जिसमें पूरी जमीन की बिक्री के लिए तैयार किया गया है।
उस फर्जी चौहद्दी में सावित्री यादव का हस्ताक्षर भी वास्तविक हस्ताक्षर से अलग है। मामले में उप पंजीयक और दस्तावेज लेखक की भूमिका संदिग्ध बताई गई है।
ये हैं वे 6 आरोपी, जो कानून से ऊपर बने हुए हैं:
आधिकारिक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, जिन प्रभावशाली चेहरों ने एक विधवा की जमा-पूंजी पर डाका डाला है, वे हैं:
पुष्पा अग्रवाल (पत्नी अनिल अग्रवाल),सागर विश्वकर्मा,डोमेन राजवाड़े (पिता प्रभु),जीतन विश्वकर्मा,आशीष उर्फ बाबा,दस्तावेज लेखक कमर कादरी मुख्य आरोपी हैं जिनके ऊपर कलेक्टर ने FIR दर्ज करने एवं कड़ी कार्यवाही करने का आदेश भी दे चुके हैं लेकिन इन आरोपियों के रसूखदारी एवं इनके राजनीतिक आकाओं के दबंगई के सामने पुलिस नतमस्तक होती नजर आ रही हैं जिस कारण आज दिनांक तक पुरे मामले में FIR दर्ज नहीं हो पाया एवं तमाम आरोपी बेखौफ होकर घूम रहे हैं।
प्रशासनिक आदेश का मजाक, पुलिस की चुप्पी पर सवाल
आखिर पुलिस किस दबाव में है? क्या कलेक्टर के आदेश की कोई अहमियत नहीं रह गई है? प्रशासन ने खुद जांच कर इस बात की पुष्टि की है कि पीड़िता के साथ धोखाधड़ी हुई है और महज 22 डिसमिल के सौदे की आड़ में 3.14 एकड़ जमीन का फर्जीवाड़ा किया गया। इसके बावजूद, एफआईआर दर्ज करने के बजाय पुलिस का टालमटोल वाला रवैया कई गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।
क्या रसूख के आगे कानून नतमस्तक है?
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि आरोपियों की राजनीतिक पहुंच और धन-बल के कारण पुलिस हाथ डालने से कतरा रही है। अब तो यह भी खबरें आ रही हैं कि आरोपी पीड़ित महिला पर दबाव बना रहे हैं ताकि वे अपनी जमीन छोड़ दें। एक तरफ सरकार ‘न्याय’ का दावा करती है, तो दूसरी तरफ कलेक्टर के आदेश को 22 दिन तक दफ्तरों की फाइलों में दबाकर रखा जाना, प्रशासनिक विफलता का जीता-जागता उदाहरण है।
क्या पुलिस अब भी आरोपियों को बचाने का खेल जारी रखेगी, या कलेक्टर के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई कर पीड़ित विधवा को न्याय दिलाएगी? अम्बिकापुर की जनता जवाब मांग रही है।

