सरगुजा समय अंबिकापुर :- अंबिकापुर सुरक्षा के नाम पर करोड़ों रूपए का ‘खेल’, हाईटेक कैमरों की जगह चौक-चौराहों पर खराब एवं बंद पड़े कैमरा बने सिर्फ ‘शो-पीस’
क्या शहर की सुरक्षा महज कागजों और फाइलों तक सीमित है? यह सवाल आज हर उस नागरिक के मन में है, जो अंबिकापुर की सड़कों पर असुरक्षित महसूस कर रहा है। महानगरों की तर्ज पर शहर को हाईटेक निगरानी में रखने का दम भरने का सपना देखते हुए वर्ष 2023 में जिला प्रशासन और पुलिस विभाग का लगभग 80 लाख का प्रोजेक्ट से शहर में सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त एवं अपराधियों पर लगाम लगाने का उद्देश्य था।

परन्तु आज की स्थिति में यह प्रोजेक्ट आज एक बड़े प्रशासनिक घपले और घोर लापरवाही की दास्तां बयां कर रहा है।
शहर की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने धन की कोई कमी नहीं रखी थी। वर्ष 2023 में जिला प्रशासन द्वारा DMF (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड) से 71 लाख रुपये की बड़ी राशि स्वीकृत की गई, जबकि 8 लाख रुपये का सहयोग पुलिस मुख्यालय से मिला। कुल 80 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि सिर्फ इसलिए खर्च की गई थी कि अंबिकापुर का कोना-कोना कैमरे की नजर में हो। लक्ष्य था—अपराधों पर लगाम, अवैध गतिविधियों का खात्मा और कानून का डर। लेकिन वर्ष 2023 जनवरी के कुछ माह तक सब सही सलामत चलता रहा उसके बाद कैमरो ने धीरे धीरे अपना दम तोडना चालू किया और आज लगभग समस्त कैमरा दम तोड़ चूका हैं।

अंबिकापुर शहर में 97 कैमरे, लेकिन निगरानी शून्य वर्तमान में पदस्थ पुलिस विभाग एवं जिला प्रशासन कौन हैं जवाबदार?
हैरत की बात तो यह है कि शहर में स्थापित 97 हाईटेक कैमरे आज अपनी उपयोगिता खो चुके हैं।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शहर में मुट्ठी भर कैमरे (10 से भी कम) ही काम कर रहे हैं। बाकी कैमरे धूल फांक रहे हैं या तकनीकी खराबी के चलते ‘बंद’ पड़े हैं। जिस सीसीटीवी कंट्रोल रूम से शहर की धड़कन पर नजर रखी जानी थी, वहां से केवल निराशा हाथ लग रही है।

सुरक्षा पर सवाल, मेंटनेस के नाम पर करोड़ों रूपए व्यय पर बवाल इसी चक्कर में अपराधियों के हौसले बुलंद होते दिख रहे।
अंबिकापुर शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील इलाकों में निगरानी के लिए लगे 97 कैमरे लगाए गए थे। इनका मुख्य उद्देश्य अपराधों पर अंकुश लगाना, दुर्घटनाओं की मॉनिटरिंग और यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करना था। हालांकि, कैमरों के बंद होने से अब अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। पुलिस को किसी भी घटना की जांच के लिए अब फुटेज के नाम पर खाली हाथ ही लौटना पड़ता है।
करोड़ों का बजट, मेंटेनेंस के नाम पर कौन भर रहा अपना जेब
सूत्रों की मानें तो इन कैमरों की स्थापना और नेटवर्क बिछाने एवं मेंटनेस के नाम पर सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च किए थे। व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए मेंटेनेंस का बजट भी आवंटित किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद कैमरों की मरम्मत नहीं कराई जा रही है। तकनीकी खराबी आने के बाद अधिकांश कैमरे लंबे समय से धूल फांक रहे हैं।
विशेष सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 के बाद करोड़ों रूपए और भी शासन से सीसीटीवी मेंटनेस के नाम पर प्राप्त हुए हैं लेकिन मेंटनेस सीसीटीवी की नहीं बल्कि सरकारी भ्रष्टाचारी योजना का किया गया हैं ऐसा मना जा सकता हैं।
आखिर जिम्मेदार कौन, शहर की सीसीटीवी की निगरानी की जिम्मेदारी किसकी जिम्मेदारों से जानकारी चाहने के लिए फोन पर संपर्क किया गया जिसके बाद यह निष्कर्ष निकला की जिम्मेदार अफसर ही गैरजिम्मेदार दिख रहे हैं?

कंट्रोल रूम प्रभारी दुर्गेश्वरी चौबे से जब इस खराब एवं बंद पड़े सीटीवी कैमरे की बारे में जानकारी चाही गई तो उन्होंने कहा…...मैं गाड़ी चला रही हूं आपको थोड़े देर में जानकारी देती हु, आप CSP सर से जानकारी ले लीजिये उन्हें सभी जानकारी हैं पूरा डेटा उनके पास रहता हैं।
इसी क्रम में जब हमने CSP अंबिकापुर राहुल बंसल से जानकारी चाही तो उन्होंने बताया की…… सीसीटीवी कैमरा बंद चालू होते रहता हैं, कितने बंद हैं कितने चालू हैं इसकी जानकारी मुझे नहीं हैं देखना पड़ेगा याद नहीं हैं।
इसके बाद आगे जानकारी लेने हेतु अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमोलाक सिंह ढिल्लों से फोन पर बात करने का प्रयास किया तो उनके हाई कोर्ट में रहने के वजह से बात नहीं हो पाया।

