विजय ट्रेडिंग का ‘उर्वरक घोटाला’ प्रशासनिक मिलीभगत या कार्रवाई के लिए टीम गठन का ढोंग? कलेक्टर द्वारा गठित टीम का भविष्य भी रहा अंधकारमय?
सरगुजा समय अंबिकापुर :- सरगुजा जिले में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है।
क्या जिले में नियमविरुद्ध कार्य करने वालों को अफसरों का संरक्षण प्राप्त है? यह सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि ‘विजय ट्रेडिंग कंपनी’ द्वारा करोड़ों रुपये का उर्वरक अवैध रूप से बेचने का मामला सामने आने के अब लगभग एक वर्ष बीतने को है, बावजूद उसके इस ज्वलंत मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई, कार्यवाही के नाम पर सिर्फ जाँच टीम बनाओ अभियान चलाते हुए केवल खानापूर्ति करते हुए विजय ट्रेडिंग को संरक्षण प्रदान करना ही माना जा सकता है ।

जाँच टीम गठन के एक अधिकारी के घूसखोरी एवं नोडल अधिकारी के तबादला की भेंट चढ़ी कलेक्टर की जांच और निष्प्रभावी आदेश?
विजय ट्रेडिंग कंपनी जो की खरसिया रोड़ अंबिकापुर में स्थित है पर उर्वरक घोटाले के गंभीर आरोप हैं, लेकिन कृषि विभाग के अधिकारी इस मामले को दबाने में ही लगे रहे है यह माना जा सकता है। हद तो तब हो गई जब मामले की लीपापोती करने के एवज में लाखों की डील कर रहे तत्कालीन उर्वरक निरीक्षक सोहन लाल भगत को ACB ने एक दूसरे व्यापारी से एक लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
यह वही उर्वरक निरिक्षक सोहन लाल भगत है जिसे सरगुजा समय के द्वारा बताया गया था की कैसे विजय ट्रेडिंग के करोड़ों रूपए के उर्वरक को बचाने के लिए 10-15 लाख रूपए की डील चल रही थी। परन्तु विजय ट्रेडिंग कम्पनी से डील करने से पहले ही सोहन भगत अपने रिश्वतखोरी वाले प्रविति के चक्कर में दूसरे व्यापारी से एक लाख रूपए घूस लेते रंगे हाथ पकड़े गए।
सवालों के घेरे में उप-संचालक क़ृषि पीताम्बर सिंह दीवान की भूमिका :- इस पूरे प्रकरण में कृषि विभाग के उप-संचालक पीताम्बर दीवान की भूमिका भी संदेह के दायरे में है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर, कलेक्टर के कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप करते हुए विजय ट्रेडिंग कम्पनी में राजसात की कार्यवाही हेतु टीम गठित कर दी थी।
बता दे की उप संचालक के एक जारी आदेश को विजय ट्रेडिंग के ऊपर अवैध उगाही के लिये दबाव बनाया जा सके सिर्फ इस लिए वाह आदेश जारी किया था, क्योंकि राजसात की कार्यवाही हेतु उप संचालक क़ृषि के पास अधिकार ही नहीं है की वे राजसात कार्यवाही हेतु टीम बनाए, उप संचालक के इस अनियमितता के बावजूद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई नहीं होना उप संचालक की भ्रष्टाचारी वाली नियत को दर्शाते हुए यह दिखाता है की उनका दबदबा सरगुजा से लेकर रायपुर तक है जिस कारण से इनके ऊपर कार्यवाही नहीं होती।

क्या फेल हो गया कलेक्टर का 04 माह पूर्व जारी आदेश एवं विजय ट्रेडिंग कम्पनी पर राजसात की कार्यवाही हेतु गठित टीम?
जिला कलेक्टर अजित वसंत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विजय ट्रेडिंग कंपनी पर राजसात की कार्रवाई के लिए विशेष टीम का गठन दिनांक 20/02/2026 को किया था और 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट पेश करने का स्पष्ट निर्देश दिया था। हालांकि, महीनों बीत जाने के बाद भी कलेक्टर का यह आदेश हवा-हवाई साबित हुआ।
लेकिन सूत्रों के हवाले से प्राप्त जानकारी के अनुसार सरगुजा कलेक्टर ने राजसात की कार्यवाही हेतु जाँच टीम बना कर क़ृषि विभाग के तात्कालीन APC क़ृषि उत्पादन आयुक्त से काफ़ी वाहवाही बटोरी यह माना जा सकता है। भले ही यह आदेश धरातल पर कार्य ना कर पाया और विजय ट्रेडिंग कम्पनी आज भी उर्वरक घोटाला करके बेखौफ है, क्योंकि अब ऐसा लगता है की विजय ट्रेडिंग कम्पनी जिसमें कई करोड़ रूपए के उर्वरक बंद तालों की पीछे है पर कार्यवाही करने में अंबिकापुर से लेकर रायपुर तक के अफसरों के पसीने छूट रहे है यह माना जा सकता है।
अब प्रश्न यह है कि क्या सरगुजा प्रशासन में ऐसा कोई ईमानदार अधिकारी नहीं है जो इस रसूखदार विजय ट्रेडिंग कंपनी पर कानून का डंडा चलाते हुए राजसात की कार्यवाही कर सके? या फिर यह कंपनी अपने आर्थिक प्रभाव के दम पर अफसरों को ‘नचाने’ वाली कला में और निखार लाते हुए अपने दबंगई रसूखदारी एवं राजनीतिक पकड़ के दम पर करोड़ों रूपए के इस उर्वरक घोटाले से सुरक्षित निकल जाएगी?
जहाँ एक तरफ सरगुजा के किसान उर्वरक खाद के लिए दर दर भटकने को मजबूर है दुकानों में सुबह से रात तक लाईन में लगने को मजबूर है खाद के किल्लत से किसानों के हाल बेहाल है वही विजय ट्रेडिंग कम्पनी में तात्कालीन कलेक्टर विलास भोस्कर एवं वर्तमान सरगुजा कलेक्टर के द्वारा महीनों बीत जाने के बावजूद कार्यवाही नहीं कर पाना विभाग की तकनिकी कमियों को उजागर करता है।
अब देखने वाली बात यह है की क्या कलेक्टर अजित वसंत अपनी प्रशासनिक साख बचाने के लिए इस मामले में नई और निष्पक्ष टीम गठित कर कड़ी कार्रवाई करते हुए विजय ट्रेडिंग कम्पनी में राजसात की कार्यवाही को पूर्ण करते हुए उप संचालक पीताम्बर सिंह दीवान के द्वारा राजसात की कार्यवाही हेतु नियम विरुद्ध बनाए टीम के मामले में भी कार्यवाही करना सुनिश्चित करेंगे, या फिर यह मामला भी फाइलों के ढेर में ही दफन हो जाएगा? सरगुजा की जनता अब इस पर जवाब और कार्रवाई का इंतज़ार कर रही है।
विडंबना देखिए एक दुकान संचालक पर राजसात की कार्यवाही दो दो जगह बनी टीम पर कार्यवाही किसी ने नहीं किया सरगुजा गजब हेब्या यहाँ के अफसर?

