सरेआम गुंडागर्दी: सत्ता के नशे में चूर विधायक रामकुमार टोप्पो ने नायब तहसीलदार को पीटा; चश्मदीद SDM ने खोली पोल, पर आरोपी विधायक को ‘महोदय-महोदय’ जपने में व्यस्त हैं रीढ़विहीन कलेक्टर!
सरगुजा समय अम्बिकापुर | 28 मई 2026
कहते हैं की अगर आपको बिना मेहनत के कुछ आसानी से मिल जाए तो उसका कदर आदमी नहीं करता ठीक ऐसा ही मामला सीतापुर विधायक के साथ देखने को मिल रहा हैं जहाँ छत्तीसगढ़ मे भाजपा एवं मोदी लहर मे कई विधायक जीत गए और उसके सत्ता की गर्मी बर्दास्त नहीं होती दिख रही और अब उन विधायकों के ऊपर सत्ता का नशा सर चढ़ कर नाचने लगा। जिन्होंने मोदी एवं भाजपा लहर के माध्यम से जीत दर्ज कराई हैं।
आपको बता दे की छत्तीसगढ़ के सरगुजा से लोकतंत्र को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी खौफनाक वारदात सामने आई है, जिसने सूबे की कानून-व्यवस्था का जनाजा निकाल दिया है। सीतापुर से बीजेपी विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके पाले हुए गुर्गों ने राजापुर उपतहसील कार्यालय के युवा नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी की बेरहमी से पिटाई कर दी एक अधिकारी को स्वयं विधायक एवं उनके कार्यकर्ताओं ने बेरहमी से पीटा और सरकार की किरकिरी कराना चालु कर दिया ।
इस रोंगटे खड़े कर देने वाले कांड की पुष्टि किसी और ने नहीं, बल्कि मौके पर मौजूद सीतापुर एसडीएम (SDM) फागेश सिन्हा ने मिडियाकर्मियों को दिए बयान के माध्यम से खुद की है। एसडीएम ने साफ-साफ बताया कि विधायक ने उनकी आंखों के सामने ही कानून और मर्यादा की धज्जियां उड़ाते हुए नायब तहसीलदार पर हाथ उठाया।
अहंकार की पराकाष्ठा: बहन को ‘तारीख’ मिली तो गुंडागर्दी पर उतर आए आरोपी विधायक
जनता की सेवा का ढोंग रचकर विधानसभा पहुंचने वाले विधायक रामकुमार टोप्पो के लिए शायद कानून उनके घर की रखैल है। पूरा फसाद सिर्फ इसलिए शुरू हुआ क्योंकि कोर्ट में बैठे नायब तहसीलदार ने नियम के तहत विधायक की बहन के जमीन संबंधी मामले में अगली तारीख दे दी थी। ‘शाही परिवार’ की तौहीन समझकर बहन ने अपने भाई को फोन घुमाया।
इसके बाद जो हुआ, उसने साबित कर दिया कि सत्ता आते ही कैसे लोग ‘सड़क छाप गुंडों’ की तरह बर्ताव करने लगते हैं। विधायक टोप्पो अपने दर्जनों उग्र चमचों के साथ सरकारी गरिमा और पद की मर्यादा को पैरों तले रौंदते हुए विधायक और उनके गुर्गों ने राजापुर मे ही नायब तहसीलदार को घेर लिया, गंदी-गंदी गालियां दीं और थप्पड़-मुक्कों से उनकी पिटाई कर दी।
काहे के माननीय? जनता पूछ रही—’यह जनप्रतिनिधि है या सफेदपोश गुंडा?’
इस शर्मनाक करतूत के बाद पूरे छत्तीसगढ़ की जनता और कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। लोग सीधे मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से सवाल पूछ रहे हैं कि—”जो शख्स शासकीय सेवक जो एक मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी हैं को सरेआम पीट दे, वो काहे का माननीय और कैसा सम्माननीय?”
जनता का साफ कहना है कि यह कोई जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि सत्ता के रसूख के पीछे छुपा एक आम गुंडा है। अगर सरकार की नाक के नीचे एक प्रशासनिक अधिकारी ही सुरक्षित नहीं है, तो इन मवालियों के डर से आम जनता अपनी सुरक्षा की भीख मांगने कहां जाएगी?
तो क्या विधायक के रसूख के आगे नतमस्तक सरगुजा कलेक्टर! अधिकारी पिट गया, पर कलेक्टर ‘साहब’ का विधायक से महोदय महोदय का प्रेम एवं जाप कम नहीं हुआ।
विधायक एवं उनके गुर्गो की गुंडागर्दी से भी ज्यादा शर्मनाक रवैया सरगुजा कलेक्टर का सामने आया है। अपने ही विभाग के एक युवा अधिकारी जिसकी सरेआम पिटाई कर दी गई जिस बात को खुद एसडीएम चीख-चीखकर बता दे रहे हैं, की कैसे विधायक एवं उनके गुर्गो ने नायब तहसीलदार की धुनाई कर डाली बावजूद उसके जिले के कप्तान साहब विधायक को महोदय ही बताते रहे।
चर्चा है कि इतनी बड़ी वारदात के बाद भी कलेक्टर साहब की रीढ़ की हड्डी इतनी कमजोर हो चुकी है कि वे आरोपी विधायक के खिलाफ कड़ा एक्शन लेने के बजाय, उन्हें ‘विधायक महोदय’ और ‘आदरणीय’ कहकर संबोधित कर रहे हैं। जिले के मुखिया की यह कायरतापूर्ण लाचारी देखकर पूरे प्रशासनिक अमले का खून खौल उठा है। कर्मचारी पूछ रहे हैं कि कलेक्टर साहब अपने मातहतों के रक्षक हैं या सत्ताधारियों के बंधक नौकर?

