सरगुजा समय अंबिकापुर :- छत्तीसगढ़ के नेता मंत्री गजब हैँ इनकी लीलाए आम नागरिकों के हित में नहीं बल्कि अहित में चलती हैँ ऐसा ही मामला स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी का भी देखने कों मिल रहा हैँ। ये मंत्री महोदय एक तरफ स्वास्थ्य विभाग में मनचाहे जगह में सलग्न कर्मचारी एवं डॉक्टरों अपने मूल पदस्थापना वाले जगह पर वापसी जाने का आदेश जारी कर दिया।

लेकिन स्वास्थ्य मंत्री का मोह अपने चमचों से भंग नहीं हो रहा हैँ ऐसा माना जा सकता क्योंकि ऐसा ही मामला देखने कों मिला हैँ की एक डॉक्टर दीपक गुप्ता जिसका मूल पदस्थापना उदयपुर हॉस्पिटल में हैँ कों वर्षो तक अंबिकापुर जिला अस्पताल में सलग्न कर के रखा गया।

यह वही डॉक्टर हैँ जिसका स्वयं का डॉक्टर लैब अंबिकापुर में संचालित हैँ उसके बाद इस व्यक्ति के द्वारा लगभग 15 जगह अवैध तरीके से लैब संचालन में अपना डिग्री लगा के अवैध कमाई किया जा रहा हैँ एवं आम नागरिकों के स्वास्थ्य एवं जान से खिलवाड़ किया जा रहा हैँ।
जहाँ एक तरफ स्वास्थ्य विभाग के सयुक्त संचालक डॉक्टर अनिल शुक्ला ने उक्त तमाम अवैध तरीके से अपना नाम लैब में देने पर डॉक्टर के ऊपर कार्यवाही के लिए पत्र जारी किया था लेकिन डॉक्टर के ऊपर कार्यवाही के जगह उसे बतौर ईनाम में जिला मलेरिया अधिकारी बना दिया गया।

डॉक्टर दीपक गुप्ता के दलाली एवं आम नागरिकों के जान से खिलवाड़ करने के मामले में लगता हैँ की स्वास्थ्य मंत्री महोदय काफ़ी प्रसन्न नजर आते होंगे जिसके कारण ही लोगों के जान से खिलवाड़ करने वाले डॉक्टर दीपक गुप्ता पर कार्यवाही करने के जगह ईनाम प्रदान करते हुए जिला मलेरिया अधिकारी बना दिया गया जो आम नागरिकों के स्वास्थ्य से गंभीर खिलवाड़ करना माना जा सकता हैँ।

जिस प्रकार से डॉक्टर दीपक गुप्ता कों ईनाम में जिला मलेरिया अधिकारी बनाया गया हैँ उससे यह समझा जा सकता हैँ की सयुक्त संचालक डॉक्टर अनिल शुक्ला के द्वारा जारी कार्यवाही वाले पत्र का कोई वजूद नहीं हैँ जब विभाग के संभागीय अधिकारी के ही कार्यवाही वाले पत्र का वजूद समाप्त हो जाए तों तों आपको समझने में देर नहीं लगना चाहिए की छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य मंत्री महोदय आम नागरिकों के स्वास्थ्य का कितना ध्यान रखते हैँ।

