सरगुजा समय छत्तीसगढ़ :- छत्तीसगढ़ में आजकल लगातार अव्यवस्था एवं अपराधियों का बोलबाला बढ़ता दिख रहा हैं छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ते अपराधों में लगाम नहीं लगने की सबसे बड़ा कारण अपराधियों कों राजनितिक संरक्षण मिलना माना जा सकता हैं जिसके वजह से तमाम प्रकार के अपराधी राज्य में अवैध कारोबार एवं अपराध का आतंक मचा रखे हैं एवं इनके ऊपर कार्यवाही के नाम पर महज खानापूर्ति किया जा रहा हैं।
सबसे बड़ी विडंबना यह हैं की छत्तीसगढ़ जो की एक शांत साफ सुथरा प्रदेश हैं यहाँ की शांति कों भंग करने वालों कों संरक्षण क्यों दिया जाता हैं जब इनके अपराध की शुरुआत होती हैं तब प्रशासन हाथ में हाथ धरे क्यों बैठा रहता हैं क्यों जब ऐसे दो टके के अपराधियों की शुरुवात होती हैं तब क्यों नहीं उड़ते पर कों मसला जाता हैं इनके अपराधों की संख्या एवं विकरालता का इंतजार क्यों किया जाता हैं यह विचारणीय बात हैं।
खैर हम आपको बता रहे थे की छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती की भरमार हैं तो इस मामले में आपने सुना होगा की दुर्ग जिला के समोदा गाँव में लगभग 65000 से भी अधिक अफीम मिल चूका हैं जिसकी खेती भाजपा नेता के द्वारा की गई थी।
यह मामला अभी ठंढा भी नहीं हुआ जहाँ विपक्ष सत्ताधारी पार्टी के नाक में दम करते हुए भाजपा नेता के द्वारा किये गए अफीम की खेती के मामले में भाजपा पार्टी कों लगातार कटघरे में खड़े करने का काम कर रही हैं वही अब बलरामपुर जिला में भी अफीम की खेती का मामला देखने कों मिल गया।
आपके जानकारी के लिए बता दें की बलरामपुर जिला के कुसमी थाना क्षेत्र के त्रिपुरी गांव स्थित सरनाटोली में करीब 5 एकड़ जमीन पर अफीम की फसल उगाई जा रही थी। जो की फसल तैयार भी हो गया था।
पुलिस और प्रशासन की टीम ने मंगलवार को मौके पर पहुंचकर छापेमारी की कार्यवाही की हैं ।
बता दें की जंगल किनारे बड़े पैमाने पर अफीम के पौधे तैयार हो चुके थे और डोडो में चीरा लगाकर अफीम निकाली जा रही थी। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में सूखे डोडे बरामद किए हैं जिनमें खसखस भरा हुआ है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कई एकड़ में अफीम की खेती होने के बावजूद पुलिस एवं जिला प्रशासन कों भनक कैसे नहीं लगी यह अत्यंत विचारणीय बात हैं। जबकि ग्रामीणों का कहना हैं की उक्त खेती का फोटो भी ग्रामीणों के द्वारा पुलिस कों व्हाट्सप्प में भेजा गया था लेकिन पुलिस ने मामले की जाँच करने का मात्र आश्वासन दिया जाँच एवं कार्यवाही नहीं की गई इसका मतलब क्या हैं यह तो वहां की पुलिस ही समझ सकती हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उक्त अफीम की खेती वाली भूमि कों बाहरी लोगों के द्वारा लीज किराये में लेकर खेती की जा रही थी।
इस मामले में अफीम की खेती करने वालों कों किसका संरक्षण प्राप्त था इसकी जाँच कर कड़ी कार्यवाही की आवश्यकता हैं क्योंकि जंगल के बगल में इतनी बड़ी मात्रा में अफीम की खेती करना वन विभाग के अफसर रेंजर कों नजर नहीं आना पुलिस प्रशासन का भी नजर बंद होना एवं नेता विधायक कों भी यह अक्टूबर से खेती होने के बाद फसल तैयार होने तक नहीं दिखना अत्यंत गंभीर मामला दिखता हैं।
फसल तैयार ही हो गई थी अगर सही समय पर इसे सप्लाई कर दिया जाता तो करोड़ों की कमाई में हिस्सेदारी किसकी किसकी थी यह भी जाँच का विषय हैं।
आपको बता दें की छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती मामले में यही तीव्रता रही तो वह दिन दूर नहीं जब छत्तीसगढ़ में धान का कटोरा के जगह अफीम का कटोरा कहाँ जाने लगेगा।
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