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सरगुजा समय अंबिकापुर :- सरगुजा में कुछ राजस्व विभाग के पटवारी एवं आर आई अपनी नौकरी से कही ज्यादा महत्व जमीन दलाली में दें रहे हैं एवं कई भू माफियाओं कों संरक्षण दें रहे हैं जिसका सीधा सीधा लाभ स्वयं पटवारी एवं जमीन माफियाओं कों मिल रहा हैं और मासूम गरीब अपने मेहनत की कमाई से बनाये घर पर बुलडोजर चलते हुए देख अश्रुधारा बहाने कों मजबूर हैं।

जिन्हे अतिक्रमणकारी कहते हुए उनके मकानों कों जमीदोज कर दिया जाता हैं उस शासकीय भूमि कों आखिर इन मासूम एवं नासमझ गरीबों कों विक्रय कौन करता हैं यह अत्यंत ज्वलंत मुद्दा हैं क्योंकि जब शासकीय भूमि का खरीद फरोक्त किया जाता हैं तो उसका सबसे बड़ा जवाबदार सम्बंधित हल्का का पटवारी होता हैं जो स्वयं एवं भू माफियाओं कों संरक्षण देकर उक्त शासकीय भूमि का जानकारी दें देता हैं उसके बाद शुरू होता हैं दलाली का खेल जहाँ राजस्व विभाग के पटवारी आर आई एवं आला अफसर सबकी मिली भगत से शासकीय भूमि का खरीद फरोक्त किया जाता हैं जिसका सबसे बड़ा जवाबदार पटवारी होता हैं।

महामाया पहाड़ अवैध निर्माण, चोरका कच्छार अवैध निर्माण, मेडिकल कॉलेज गंगापुर में अवैध निर्माण जहाँ पर शासकीय भूमि तो वन भूमि में अवैध रूप से बने मकान का दावा करते हुए मकान कों जमीदोज कर दिया जाता हैं। परन्तु विभाग के उस अफसर पर तनिक भी आंच नहीं आती जो इस तरह से शासकीय भूमि कों कब्ज़ा करवाने का सबसे बड़ा जिम्मेदार हैं।

आपको बता दें की अगर सम्बंधित विभाग अपने कर्तव्यों का पालन सही तरीके से करता तो इस तरह से शासकीय भूमि पर कब्ज़ा होता ही नहीं जब सम्बंधित पटवारी एवं भू माफियाओं की सांलिप्पता नहीं रहती तो मासूम ग्रामीणों कों पता ही नहीं चलता की कौन से भूमि शासकीय हैं और कौन सी शासकीय नहीं हैं जिससे शासकीय भूमि पर कब्ज़ा एवं खरीद फरोक्त बंद हो जाता।
सबसे बड़ी विडंबना भी देखिये की जिस भूमि कों शासकीय बता 37-39 मकानों कों जमीदोज कर दिया गया आखिर उस भूमि पर अवैध रूप से बन रहे मकान का नगर निगम कों ख्याल क्यों नहीं आया क्यों निर्माण कार्य के शुरुआत में ही कार्य बंद करा दिया गया यह भी विचारणीय बात हैं।

बल्कि उक्त शासकीय भूमि पर बिजली पानी जैसे तमाम मूलभूत की जरूरतों कों विभाग द्वारा पूरा किया जाता रहा और बतौर टैक्स के रूप में इन परिवारों से पैसा भी लेते रहा गया। अगर यह शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण था तो तमाम जरूरतों कों विभाग द्वारा क्यों पूरा किया गया शुरुआत में ही बिजली पानी जैसे जरूरतों का कनेक्शन क्यों दें दिया गया किस भूमि के आधार पर यह सब किया गया यह अत्यंत गंभीर रूप से विचारणीय बात हैं।

लापरवाही राजस्व एवं निगम का पत्थर खाये पुलिस :- एक सबसे बड़ी विडंबना यह भी हैं की राजस्व और नगर निगम की टीम तमाम प्रकार से अवैध रूप से हो रहे बसाहटो पर चुप्पी साधे रहती हैं फिर पुलिस विभाग कों लाठी डंडा खाने आगे खड़ी कर तमाशा देखते रहती हैं।
इस तरह से तमाम शासकीय भूमि में कब्ज़ा एवं हुए खरीद फरोक्त के समय सम्बंधित हल्का नंबर के पटवारी की कार्यशैली की जाँच करवा कर शासकीय भूमि की खरीद फरोक्त के शुरुवाती जड़ पर शक्त कार्यवाही करने की आवश्यकता हैं जिससे इस तरह के मामलों में लगाम लगाया जा सके।


