सरगुजा समय अंबिकापुर – सरगुजा समय लगातार जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता के साथ अपने समाचार पोर्टल में उठाया जाता है जिससे कि सरगुजा जो कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है यहां की मासूम जनता को लगातार ठगने का कार्य विजय ट्रेडिंग जैसे दुकानदारों के द्वारा किया जाता है।
विजय ट्रेडिंग जैसे दुकानदार नियम विरुद्ध तरीके से दुकान संचालित करने एवं मासूम ग्रामीण किसानों को ठगते हुए अवैध कमाई से अपना साम्राज्य स्थापित कर लेते है ।

जैसा की हमने आपको पूर्व मे खबर के माध्यम से बताया था की क़ृषि विभाग के अफसर विजय ट्रेडिंग कंपनी के संचालक के ऊपर काफ़ी मेहरबानी दिखा रहे है, इस मेहरबानी दिखाने के पीछे विजय ट्रेडिंग कंपनी जो की खरसिया रोड़ अंबिकापुर मे स्थित है। इस दुकान के संचालक पर लगातार गंभीर रूप से आरोप लग रहे थे की छत्तीसगढ़ के किसानों को मिलने वाले उर्वरक को इसके द्वारा अन्य राज्यों एवं एक एक किसानों के नाम से 40-50 बोड़ा उर्वरक जारी कर अवैध उगाही से अपना साम्राज्य स्थापित कर रहा था एवं उसी अवैध रूप से कमाई किये गए धन से क़ृषि विभाग के अधिकारी एवं उर्वरक निरीक्षक को अपने कदमो की धूल समझ रखा है।
विजय ट्रेडिंग कंपनी के दूकान मे सरगुजा समय मे प्रकाशित खबर के बाद क़ृषि विभाग के द्वारा कार्यवाही करने के लिए एक टीम तो बनाया गया परन्तु क़ृषि विभाग द्वारा बनाए गए इस टीम के द्वारा कार्यवाही के नाम पर मात्र खानापूर्ति करना ही माना जा सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दे की विजय ट्रेडिंग कंपनी के ऊपर विभागीय कार्यवाही पिछले लगभग चार माह पहले ही किया गया था जिसके बाद उचित कार्यवाही नहीं होने के मामले को सरगुजा समय के द्वारा खबर के माध्यम से विभाग एवं आम जनों को उक्त हो रहे गोलमान एवं विभाग द्वारा किये जा रहे दलाली पूर्वक कृत्य को उजागर किया गया था, जिसके बाद आनन फानन मे क़ृषि विभाग के उप संचालक पीताम्बर दीवान के द्वारा विजय ट्रेडिंग कंपनी के ऊपर राजसात की कार्यवाही करने के लिए एक टीम गठित किया जो की वर्तमान मे सिर्फ कागजो मे ही देखने को मिल रहा है धरातल पर इस टीम की उतरने की हिम्मत ही नहीं हो रही कार्यवाही करने की बात तो अत्यंत दूर की है।
विशेष सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बनाए गए टीम मे एक महारथी वह भी है जिसने विजय ट्रेडिंग कंपनी से लगभग 50 लाख के माल को राजसात होने से बचाने के लिए 10-15 लाख की डील फ़ाइनल करने मे लगा हुआ है परन्तु अभी तक मामला अटका हुआ है ऐसा माना जा सकता है।

विशेष सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार विजय ट्रेडिंग कंपनी के लगभग 50 लाख रूपए से अधिक के माल को राजसात होने से बचाने के लिए तमाम प्रकार के तिकडम लगाए जा रहे है एवं विभाग के कुछ ऐसे अधिकारी है जो उक्त दुकानदार से माल को बचाने के लिए लगभग 10 -15 लाख रूपए का डील किया जा रहा है जिससे यह प्रतीत होता है की मामले मे अगर डील फ़ाइनल हो जाती है तो विभाग द्वारा विजय ट्रेडिंग कंपनी के राजसात करने के मामले को कूड़े में डालते हुए लगभग 50 लाख के माल को राजसात होने से बचाया जायेगा ऐसा माना जा सकता।
विशेष सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार क़ृषि विभाग के उप संचालक पीताम्बर दीवान एवं वर्तमान उर्वरक निरीक्षक एवं एक अन्य अधिकारी की भूमिका इस मामले मे अत्यंत संदिग्ध है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विभाग के द्वारा जिस तरह से उक्त विजय ट्रेडिंग कंपनी के मामले मे कार्यवाही को जानबूझकर विधि की कमियों को भाफ्ते हुए बनाए जाने वाले फाइल मे कई कमिया रखा गया है जिसके कारण अगर 10-15 लाख वाली डील फ़ाइनल हो जाती है तो इन कमियों का लाभ लेते हुए विजय ट्रेडिंग कंपनी के ऊपर होने वाली राजसात की कार्यवाही से बचाते हुए उसके लगभग 50 लाख के मामले को बचाया जा सकता है।

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