सरगुजा समय छत्तीसगढ़ :- छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार है केंद्र में भी भाजपा की सरकार हैं जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर ना जाने कितनों की नईया पार हो गई जो पार्षद का चुनाव अपने दम पर नहीं जीत सकते थे वे मोदी के नाम के कारण आज विधायक और मंत्री बन छत्तीसगढ़ में मनमानी एवं तानाशाही वाला रवैया अपना रहे हैं।
जहाँ एक और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नारा था की ना खाऊंगा ना खाने दूंगा वही छत्तीसगढ़ में ठीक इसके विपरीत कार्य किया जा रहा हैं यहाँ भ्रष्टाचार करने के अलग-अलग कई नायाब तरीके की खोज कर भ्रष्टाचार करने का राह बना रहे हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें की छत्तीसगढ़ में फायर NOC की सुविधा फ्री में थी जिससे तमाम प्रकार के व्यापारियों के द्वारा फायर NOC के लिए ऑनलाइन आवेदन करके विभाग के द्वारा जाँच करने के उपरांत फायर NOC का प्रमाण पत्र मिल जाता था। हालांकि यह कहना गलत नहीं होगा की विभाग के अफसर इस मामले में भी दलाली करने से बाज नहीं आते थे और हर संस्थान में फायर NOC जारी करने का एक निर्धारित दर सेट कर रखा था जो की गलत था।
परन्तु किसी भी तरह से राज्य सरकार कों राज्य की सुरक्षा किसी निजी एजेंसी कों नहीं देना चाहिए फायर सिस्टम एक बड़ी सुरक्षा से सम्बंधित मामला हैं जो की सीधे लोगों के जान माल से जुडा मामला हैं।
फायर NOC के लिए निजी एजेंसी के द्वारा 10 रूपए प्रति वर्गफिट लेना सरासर गलत हैं यह एक प्रकार से व्यापारियों से सीधा लूट करने की ओर ही इसारा करता हैं।

क्योंकि जितने रूपए में व्यापारी ऑडिट करवाएंगे उतने रूपए में फायर सेफ्टी के कार्य कों और बेहतर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से करवा सकता हैं जिससे आम नागरिकों के साथ साथ राज्य की सुरक्षा बढ़ेगी।
आपको बता दें की फायर से NOC के नाम पर 10 रूपए वर्ग फिट के हिसाब से सिर्फ ऑडिट करना और व्यापारियों कों लाखों का बिल थमा देना कही ना कही सरकार का तानाशाह वाला रवैया हैं जिससे सरकार की छबि धूमिल हो सकती हैं।
विशेष सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह योजना एक मंत्री जी अपने खास कों आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए किया गया हैं ताकि छत्तीसगढ़ प्रदेश के तमाम व्यापारियों से फायर ऑडिट के नाम पर जम कर उगाही कर सके।

छत्तीसगढ़ की सरकार कों राज्य के सुरक्षा सम्बंधित मामलों से खिलवाड़ नहीं करना कुछ मामलों में कमाई का जरिया नहीं देखना चाहिए। फायर सेफ्टी आम नागरिकों के सुरक्षा से जुडा मामला हैं ना की कमाई का साधन।
जिस निजी एजेंसी के द्वारा सिर्फ ऑडिट करने का 10 रूपए वर्गफिट के हिसाब से पैसा लिया जा रहा हैं तो उस निजी एजेंसी की ऑडिट रिपोर्ट के बाद अगर आगजनी की घटना घटती हैं और फायर उपकरण कार्य नहीं करता हैं या फायर सेफ्टी की कमी पाई जाती हैं तो उस समय क्या निजी एजेंसी के ऊपर सरकार के द्वारा कार्यवाही की जावेगी होने वाले जानमाल के नुकसान की जवाबदेही निजी एजेंसी की होंगी या फिर यह निजी एजेंसी सिर्फ फायर ऑडिट के नाम पर उगाही करने का ही कार्य करेंगी।
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