पिटाई पड़ा नायब तहसीलदार को और धरना प्रदर्शन की गीदड़भभकी सरकार को, कही त्रिभुवन सिंह एवं उनको संरक्षण देने वाले अफसरों को स्वयं पर होने वाली कार्यवाही से बचाने बली का बकरा तो नहीं मिल गया?
सरगुजा समय अंबिकापुर :-
सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो एवं उनके समर्थकों के ऊपर राजापुर नायब तहसीलदार मारपीट का आरोप लगा हैं जिसमे गैर जमानती धाराओं के साथ विधायक एवं अन्य लोगों के ऊपर अपराध पंजीबंध कर लिया गया हैं। वही नायब तहसीलदार के ऊपर भी अपराध दर्ज कराया गया हैं। अभी लगातार राजापुर एवं सीतापुर में माहौल काफ़ी गर्म हैं क्योंकि मामला अब संघ के हवाले जाता हुआ दिख रहा हैं जहाँ पटवारी आर आई नायब तहसीलदार एवं तहसीलदार तमाम लोगों ने मारपीट करने वाले लोगों की गिरफ़्तारी की मांग की हैं और अगर आरोपियों को गिरफ़्तार नहीं किया गया तो धरना प्रदर्शन की धमकी भी दे डाली।
खैर हम आपको बताते हैं की ये धरना प्रदर्शन की गीदड़भभकी सरकार को क्यों दे रहे हैं दरसल मार खाने वाले नायब तहसीलदार से ज्यादा इन्हे अपने भ्रस्ट नीतियों के उजागर होने का भय सता रहा हैं इस लिए ये सरकार एवं अन्य अफसरों को धरना में जाने का डर दिखा कर सरकार से भयादोहन करने का प्रयास कर रहे हैं।

आपको याद होगा की कैसे राजस्व विभाग का छोटा सा कर्मचारी विदेश यात्रा कर आया और शासन एवं विभाग को कानोकान भनक ही नहीं लगी बस यही मामला हैं की मार खाने वाले नायब तहसीलदार के कंधे में बन्दुक रख अपने विदेश यारा का गर्म बाजार शांत करवा ले क्योंकि अगर पटवारी त्रिभुवन सिंह के विदेश यात्रा की पोल खुली तो उनके अन्य संरक्षक एवं आकाओं की पोल खुद भी खुद खुल जाएगी यही कारण हैं की अब नायब तहसीलदार को बली का बकरा बना कर नियम विरुद्ध तरीके से विदेश यात्रा करने पटवारी त्रिभुवन सिंह के आकाओं ने धरना प्रदर्शन की बात कह डाली।
आपकी जानकारी के लिए बता दे की नायब तहसीलदार के बाद उसके पीछे खड़े अधिकांश पटवारी आर आई एवं तहसीलदार का सीधा वास्ता त्रिभुवन सिंह से हैं उनका एकमात्र उद्देश्य हैं त्रिभुवन सिंह को बचाना क्योंकि अगर पटवारी त्रिभुवन सिंह गए तो उनके सांगिर्द खुद भी खुद नप जायेंगे।
जाने पूरी खबर विस्तार से
कहते हैं की जमचागिरी एक कला हैं जिसकों करने के लिए अपना जमीर दाव पे लगाना पड़ता हैं और इस कला में पटवारी त्रिभुवन सिंह एवं उसके काले कारनामों में पर्दा डालने वाले अफसरों में कूट कूट कर ये कला भारी हुई हैं।
चमचागिरी और कमीशन का खेल: जब रक्षक ही बन जाएं भक्षक, तो त्रिभुवन सिंह जैसे ‘पटवारी’ सरकार और अफसरों को जेब में लेकर घूमेंगे ही!
अब पानी सिर्फ सिर से ऊपर नहीं निकला है, बल्कि इस भ्रष्ट सिस्टम की नाली का कीचड़ सीधे मंत्रालय की दहलीज तक जा पहुंचा है। राजापुर में जो तमाशा चल रहा है और पटवारी त्रिभुवन सिंह के ‘विदेश कांड’ पर सरकार और आला अफसरों ने जो तीन महीने से रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है, उसने साफ कर दिया है कि इस राज्य में ‘कानून का राज’ नहीं, बल्कि ‘कमीशनखोरों का सिंडिकेट’ चल रहा है।
जनता धूप में लाइन लगाकर खड़ी है और साहब लोग जनता के टैक्स के पैसे को अपनी जागीर समझकर विदेशों में उड़ा रहे हैं। यह खबर नहीं, बल्कि इस गूंगे-बहरे सिस्टम के गाल पर वो करारा तमाचा है, जिसकी गूंज से अब इन्हें अपनी कुर्सियां डोलती हुई नजर आएंगी।

बड़े साहबों का ‘रिमोट कंट्रोल’ एक पटवारी के हाथ में?
सोचिए, जिले के कलेक्टर, संभाग के कमिश्नर और मंत्रालय में बैठे बड़े-बड़े आईएएस (IAS) अफसर, जो अपनी ईमानदारी का ढोंग रचते हैं, वे तीन महीने से एक मामूली पटवारी के आगे भीगी बिल्ली बने बैठे हैं। जिस पटवारी पर शासन के नियमों के विरुद्ध जा कर विदेश यात्रा किया गया हो उस पर कार्यवाही करने की हिमाकत अभी तक नहीं हो पाई हैं जिससे यह प्रतीत होता हैं की त्रिभुवन सिंह खड़ा तो सरकार से बड़ा।
आखिर क्या मजबूरी है?: क्या त्रिभुवन सिंह के पास इन बड़े साहबों के काले कारनामों की कोई ऐसी लिस्ट है कि अगर पटवारी का मुंह खुला, तो कई बड़े साहबों की वर्दी और साख दोनों नीलाम हो जाएगी?
अफसरशाही का शर्मनाक आत्मसमर्पण: जनता की शिकायतों पर तुरंत सस्पेंशन का रौब दिखाने वाले इन अफसरों की दबंगई एवं नियमों का हवाला देते हुए गरीबों के मकान में बुलडोजर चलवाने वाले अफसरों का दबंगई त्रिभुवन सिंह का नाम सुनते ही कहाँ गायब हो जाती है? अफसरों की यह चुप्पी चीख-चीखकर कह रही है—“हिस्सा ऊपर तक जाता है!”
सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का जनाजा निकल चुका है
मुख्यमंत्री जी, आपके मंचों से दिए जाने वाले ‘सुशासन’ के भाषण अब जनता के लिए चुटकुले बन चुके हैं। जब आपकी नाक के नीचे एक पटवारी तीन महीने से अपने काले कारनामें नियम विरुद्ध तरीके से विदेश यात्रा, आय से अधिक संपत्ति, जमीन माफियाओ से साठ गांठ के कारण मीडिया में नंगा हो रहा हो और आपकी सरकार एक जांच कमेटी तक न बना पाए, तो मान लेना चाहिए कि सरकार ने इन भ्रष्ट मगरमच्छों के आगे घुटने टेक दिए हैं।
वोट जनता से, वफादारी भ्रष्टाचारियों से?: चुनाव में जनता ने आपको कुर्सी इन ‘सफेदपोश डकैतों’ की अय्याशी के बिल भरने के लिए नहीं दी थी।
हड़ताल का ड्रामा और सरकार का डर: राजापुर की घटना को ढाल बनाकर जो राजस्व अमला (पटवारी, आरआई, तहसीलदार) काम बंद करने की गीदड़भभकी दे रहा है, वह दरअसल सरकार को सीधे तौर पर ब्लैकमेल कर रहा है। और शर्मनाक बात यह है कि सरकार इस ब्लैकमेलिंग वाले बातों को सुन रही हैं सरकार को तत्काल नायब तहसीलदार को ढाल बनाकर पटवारी त्रिभुवन सिंह एवं अपना बचाव करने वाले पटवारी, आर आई, नायब तहसीलदार, तहसीलदार पर जाँच करवानी चाहिए और जाँच में दोषी पाए जाने वाले अफसरों को बर्खास्त कर जेल की हवा खिलवाना चाहिए।

जनता का सीधा अल्टीमेटम: अब कुर्सी छोड़ो या इन्हें जेल भेजो!
यह राज्य किसी के बाप की जागीर नहीं है कि आम आदमी पिसता रहे और त्रिभुवन सिंह जैसे लोग विदेशों में रातें रंगीन और दिन बेहतरीन बनाते रहें। अब जनता इस सिस्टम को खुद दुरुस्त करने का मन बना चुकी है:
आम नागरिकों का सरकार से सबसे बड़ा मांग ही यह हैं मी त्रिभुवन और उसके आकाओं की संपत्ति कुर्क हो: और सर्वप्रथम पटवारी त्रिभुवन सिंह को निलंबित कर जाँच किया जाए क्योंकि कुर्सी में बैठे रहने पर पटवारी त्रिभुवन सिंह जाँच को प्रभावित करेंगें।
त्रिभुवन सिंह और उसे संरक्षण देने वाले हर बड़े अफसर की बेनामी संपत्ति को तुरंत कुर्क कर उस पर बुलडोजर चलाया जाए।
पासपोर्ट की फॉरेंसिक जांच: इस पटवारी ने पिछले 5 साल में कितनी बार विदेश की उड़ान भरी, इसके वीजा और टिकटों का पैसा किसने दिया, इसकी लाइव जांच होनी चाहिए।
ब्लैकमेलरों पर एस्मा (ESMA) लगाओ: जो भी कर्मचारी इस भ्रष्टाचार के समर्थन में जनता का काम रोके, उसे तुरंत नौकरी से बर्खास्त कर उसकी जगह बेरोजगार युवाओं को बहाल किया जाए।
आम नागरिकों का सरकार एवं जिला के आला अफसरों को सीधी और आखिरी चेतावनी: अगर अगले 10 दिनों के भीतर पटवारी त्रिभुवन सिंह के नियम विरुद्ध तरीके से विदेश यात्रा, भू माफियाओ से साठ गांठ, जमीन दलाली में बने इनके पार्टनर जिसमे एक शासकीय खान शिक्षक भी हैं और अन्य कई पटवारी भी शामिल हैं की जाँच करवा कर दोषी पाए जाने पर त्रिभुवन सिंह सलाखों के पीछे नहीं होता हैं और उसे बचाने वाले अफसरों पर गाज नहीं गिरती, तो जनता यह मान लेगी कि इस सूबे को सरकार नहीं, बल्कि ‘भ्रष्टाचारियों का एक संगठित गिरोह’ चला रहा है। फिर जनता खुद सड़कों पर उतरेगी और इस सड़े-गले सिस्टम का हिसाब बराबर करेगी!

