21/05/2026
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सरगुजा समय अंबिकापुर :- महा-खुलासा: सरगुजा संभाग के अंबिकापुर तहसील का तत्कालीन एवं वर्तमान मे धौरपुर तहसील मे पदस्थ ‘करोड़पति पटवारी’ त्रिभुवन सिंह जिसके आगे बौना हुआ राजस्व महकमा! बिना इजाजत ‘विदेशी सैर’, कार्रवाई के नाम पर अफसरों की कांपी रूह. सम्बंधित पटवारी पर कार्यवाही करने के जगह शिकायतकर्ता से ही माँगा जा रहा विदेश यात्रा करने का दस्तावेजी या अन्य साक्ष्य…..

धमाका रिपोर्ट (सरगुजा समय) | जिस हिसाब से सरगुजा मे राजस्व विभाग के द्वारा लगातार कार्यवाही की जा रही हैं उसमे कई गरीबों के आशियानों पर बुलडोजर की कार्यवाही की गई जिसमे हवाला दिया गया की ये सभी नियम विरुद्ध तरीके से उक्त जमीन पर काबिज हैं जिसके वजह से बुलडोजर की कार्यवाही करते हुए अवैध मकान को ध्वस्त किया गया।

तो क्या छत्तीसगढ़ में नियम-कानून सिर्फ आम जनता को डराने के लिए हैं? क्या मोटी कमाई के आगे प्रशासनिक व्यवस्था घुटने टेक चुकी है? यह मान लिया जाए क्योंकि सरगुजा जिले के अम्बिकापुर तहसील से जो मामला सामने आया है, उसने पूरे सिस्टम की साख पर कालिख पोत दी है।

नमनाकला हल्का नंबर 20 का पटवारी त्रिभुवन सिंह इन दिनों सरकार से भी ऊपर नजर आ रहा है ऐसा प्रतीत हो रहा हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पटवारी महोदय बिना शासन की अनुमति के विदेश की सरजमीं नाप कर लौट आए बावजूद इसके इस ‘साहब’ पर उंगली उठाने की हिम्मत जिले के किसी बड़े अधिकारी में नहीं हो रही है।

आपकी जानकारी के लिए बता दे की विभाग के द्वारा इन महाशय पर कार्रवाई करना तो दूर, की बात हैं इन राजस्व विभाग के आला अफसरों का अगर बस चले तो पटवारी महोदय जी की आरती भी उतार दें!

भूमाफियाओं का ‘फंड’ और पटवारी का ‘थाईलैंड टशन’?

आखिर एक साधारण पद प्राप्त करने वाले पटवारी में इतनी ताकत कहाँ से आई कि वो बिना विभागीय एनओसी (NOC) के देश की सीमा लांघ गया? जवाब साफ है— जमीन का खेल और अकूत पैसा। सूत्रों के मुताबिक, नमनाकला हल्के में जमीन की दलाली, हेराफेरी और भूमाफियाओं के साथ मिलकर इस पटवारी ने करोड़ों की अवैध संपत्ति खड़ी की है ऐसा शहर मे काफ़ी चर्चा हैं ?

इसी ‘आर्थिक मजबूती’ के नशे में चूर पटवारी त्रिभुवन ने नियमों को अपनी जेब में रखा और विदेश यात्रा का लुत्फ उठाया। लगातार लगभग दो महीने से यह सच चीख-चीख कर सबके सामने खबर के माध्यम से है, लेकिन जिला प्रशासन की चुप्पी यह बताने के लिए काफी है कि पटवारी के ‘रसूख का रिमोट कंट्रोल’ कितना तगड़ा है।

फाइल खुली तो नपेंगे कई ‘मलाईदार’ अफसर! इसलिए बुना जा रहा पटवारी त्रिभुवन को बचाने सुरक्षा कवच? 

अंदर की खबर यह है कि पटवारी त्रिभुवन सिंह अकेले इस ‘अवैध’ विदेश दौरे पर नहीं थे। इस मखमली और आलीशान सफर में राजस्व विभाग की कई ‘बड़ी मछलियां’ भी उनके साथ थीं।

शहर मे चर्चा यह भी है कि इस पूरी यात्रा का ‘खर्चा-पानी’ इसी पटवारी ने उठाया था। यही कारण है कि आज जब पटवारी पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है, तो विभाग के आला अफसर खुद को बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। सबको सबसे बड़ा डर इस बात का हैं की अगर पटवारी त्रिभुवन सिंह के ऊपर विभाग कार्यवाही करने पे उतारू हो जाता हैं और कही मामला नार्को टेस्ट तक पहुंच गया, तो कई बड़े साहबों के बंगले तक कार्यवाही की आंच आ जाएगी।

RTI का गला घोंटा: सच छुपाने के लिए अफसरों ने चली ‘शकुनी चाल’

भ्रष्टाचार के इस गठजोड़ का सबसे घिनौना चेहरा तब सामने आया जब आरटीआई (RTI) कार्यकर्ताओं ने इस त्रिभुवन सिंह पटवारी के विदेश यात्रा से जुड़े दस्तावेज मांगे। कायदे से तो सच सामने लाना था, लेकिन आला अधिकारियों ने ‘नमक का हक’ अदा करते हुए भ्रामक और गोलमोल जवाब देकर सूचनाओं को दबा देने का लगातार प्रयास किया जा रहा हैं। जिससे यह इस बात का पुख्ता सबूत है कि विभाग में ‘दाल ही नहीं, बल्कि पूरा दाल ही काला है।’

​’सरगुजा समय’ का खुला चैलेंज: बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी!

विभागीय साहब कान खोलकर सुन लें— जनता की आंखों में धूल झोंकने का यह खेल अब और नहीं चलेगा। हमारी खोजी टीम के हाथ कई पुख्ता दस्तावेज लग चुके हैं और कई महत्पूर्ण दस्तावेज की तलाश जारी हैं, जो इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ करेंगे। बहुत जल्द उन ‘रिश्वतखोर साहबों’ के चेहरे भी बेनकाब होंगे जो इस पटवारी की ढाल बने बैठे हैं।

अब देखना यह है कि इस महा-खुलासे के बाद सूबे के मुखिया और राजस्व मंत्री इस ‘सुपर पटवारी’ के विदेश यात्रा पर बुलडोजर चलाते हुए सर्वप्रथम निलंबन की कार्यवाही करते हैं या फिर सरगुजा का यह महकमा ऐसे ही एक पटवारी के तलवे चाटता रहेगा?

उक्त मामले मे जब तक कार्यवाही नहीं होती तो तब तक हमारी शुरुवात वही से रहेगी की विदेश यात्रा करने वाले पटवारी पर कार्यवाही कब? क्योंकि… “बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी!…”

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