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नगर निगम के कुछ अफसरों एवं जनप्रतिनिधियों ने कमीशनखोरी के चक्कर में निगल गए सार्वजनिक शौचालय

Jan 1, 2026

सरगुजा समय अंबिकापुर- सरगुजा समय अंबिकापुर के द्वारा लगातार एक ज्वलंतशील मुद्दा को आम नागरिकों के सामने लेकर आ रहे है कि अंबिकापुर के थाना चौक जिसे लेबर चौक एवं गुरुनानक चौक के नाम से भी जाना जाता है यहां पक्का भवन में बना सार्वजनिक शौचालय गायब हो गया या फिर यह कहा जा सकता हैवी कमीशनखोर एवं अपना स्वार्थ साधने वाले लोग पक्का भवन में बना शौचालय निगल गए ।

यहां पर विगत लगभग 03-04 वर्षों पूर्व पक्का भवन के रूप में सार्वजनिक शौचालय बना हुआ था जिससे यहां लेबर चौक में आने वाले सैकड़ों ग्रामीण लेबर कुली एवं महिला रेजा लोग को मलमूत्र त्याग करने के लिए प्रसाधन की सबसे बड़ी राहत एवं अच्छी सुविधा थी परन्तु इस पक्कानुमा सार्वजनिक शौचालय पर कुछ दलाल अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि की काली नजर लग गई एवं अपने निजी स्वार्थ को साधने के लिए उक्त पक्कानुमा सार्वजनिक शौचालय तुड़वा दिया गया।

जहां एक ओर भारत के प्रधान मंत्री स्वच्छता का डंका बजाने की बात कहते हुए खुले में शौच ना जाना पड़े उसके लिए घर घर शौचालय निर्माण करवा रहे है वहीं अंबिकापुर में नगर निगम के अफसर एवं जनप्रतिनिधि उल्टी गंगा बहा रहे है यहां बना बनाया शौचालय अपने निजी लाभ के लिए तुड़वा दिया जा रहा हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि थाना चौक मायापुर पानी टंकी के पास पक्कानुमा सार्वजनिक शौचालय बना हुआ था जिसे पिछले 03- 04 वर्ष पहले नगर निगम के कुछ दलाल अधिकारी एवं कुछ जनप्रतिनिधियों ने अपने निजी लाभ के कारण तुड़वा दिया उसके बाद इस स्थल पर PVC से बने डिब्बा नुमा मूत्रालय रखवा दिया और बाकी के बचे जगह में अवैध रूप से आलीशान गुमटी बनवा के रखवा दिया गया।

पूर्व में निर्मित सार्वजनिक शौचालय

लेकिन अब इस जगह का आलम यह है कि यहां सैकड़ों की संख्या में आने वाले ग्रामीण लेबर जिसमें महिला पुरुष दोनों सैकड़ों की संख्या में आते है उन्हें अब प्रसाधन की कमी अत्यंत गंभीर रूप से परेशान कर रही है यहां तक कि इस स्थल पर स्थाई रूप से खुलने वाले दुकानों के संचालकों ग्राहकों एवं राहगीरों को या तो नगर निगम के कारनामों के कारण बेशर्मी दिखाते हुए सड़क किनारे ही मूत्र विसर्जन करना पड़ता है या फिर पानी टंकी कार्यालय परिसर में दौड़ लगाना पड़ता है ।

अब सबसे बड़ी बात यह है कि नगर पालिक निगम अंबिकापुर के आयुक्त महोदय जिस कुर्सी को सम्हाल रहे है या तो अंबिकापुर के जनता की समस्याओं से इन्हें कोई लेना देना नहीं है या फिर सिर्फ कुर्सी में बैठ कर अंबिकापुर से तबादला होने का इंतजार कर रहे है क्योंकि अगर आयुक्त महोदय से किसी मामले की जानकारी लेने या इनका पक्ष जानने के लिए इन्हें फोन लगाया जाता है तो या तो साहब फोन नहीं उठाएंगे या फिर साहब का रटा रटाया जवाब की इसकी जानकारी मुझे नहीं है जांच करवाता हु ।

इस सार्वजनिक शौचालय को तुड़वा दिया गया

अब सबसे बड़ी बात यह है कि जब पक्कानुमा सार्वजनिक शौचालय यहां पर बना था तो बाकायदा नियमानुसार तमाम प्रक्रिया का पालन किया गया होगा स्थल निरीक्षण, बजट, प्रशासकीय स्वीकृति, टेंडर निकाला गया होगा ठेकेदार द्वारा तमाम प्रक्रिया को पूरी करने के बाद इस स्थल पर सार्वजनिक शौचालय का निर्माण करके निगम को हैंड ओवर किया गया होगा।

पक्के भवन में बने सार्वजनिक शौचालय को तुड़वा कर इसे रखना कितना उचित।

परन्तु ऐसा कौन सा अधिकारी एवं नेता इस निगम में आ गया कि लगभग 10 से 15 लाख से ऊपर के बजट वाले सार्वजनिक शौचालय को तुड़वा दिया गया जिसपे कार्यवाही करने की हिमाकत कोई आयुक्त नहीं कर पा रहा वर्तमान में पदस्थ आयुक्त डी एन कश्यप से पूर्व दो आयुक्त महोदय यहां अपनी नौकरी पूरी करके चलते बने लेकिन इस सार्वजनिक शौचालय को तुड़वाने वाले एवं शासकीय संपत्ति को छत्ती पहुंचाने के साथ ही साथ राजकोष को नुकसान पहुंचाया गया है  जो कि गंभीर आरोप की श्रेणी में आता है पर कार्यवाही क्यों नहीं हो पाई।

खुले में मूत्र विसर्जन करने को मजबूर राहगीर लेकिन महिलाओं के लिए बड़ी समस्या ।

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि उक्त थाना चौक जिसे लेबर चौक बोलते है यहां प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में महिला पुरुष लेबर आते है उसके बाद तमाम दुकानदार ग्राहक राहगीर एवं कई स्कूल संचालित है जिसमें प्राथमिक हाई एवं उच्चतर विद्यालयों की कई हजार छात्र छात्राओं के द्वारा अध्ययन किया जाता है जिसमें कन्या विद्यालय, नगर पालिक विद्यालय, मल्टीपरपज विद्यालय के छात्र छात्राओं के आने जाने का रास्ता यही चौक है जहां पर सार्वजनिक शौचालय होते हुए उसको निजी लाभ के लिए तुड़वा देना एवं उसके जगह पर दुकान खुलवा देना और वर्तमान में मलमूत्र त्याग करने के लिए प्रसाधनों का न होना अत्यंत गंभीर एवं चिंतनीय विषय एवं आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन है।

अब देखने वाली बात यह है कि वर्तमान नगर पालिक निगम के आयुक्त महोदय अपनी निद्रा से जागते हुए इस गड़बड़झाला एवं निजी स्वार्थ में जिस अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि ने इस सार्वजनिक शौचालय को तुड़वाया है उसकी जांच करवाते हुए दोषियों पर कार्यवाही करवाते हुए शासन को ही आर्थिक क्षति का वसूली दोषी अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि से करवाते है।

जिससे सैकड़ों लेबर महिला पुरुष राहगीरों एवं दुकानदारों छात्र छात्राओं के मलमूत्र त्याग करने के प्रसाधन की व्यवस्था को पुनः चालू करवाते है या फिर मामला ठंडे बस्ते में जाना तय होगा अब देखने वाली बात है।

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