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सत्ता का सुख भोगने वाली भाजपा एवं 2028 में सत्ता का सुख भोगने के लिए लालायित कांग्रेस पार्टी CG पुलिस को  बना डाला कठपुतली…?

Jan 2, 2026

सरगुजा समय छत्तीसगढ़:- बचपन में बड़े बुजुर्ग अक्सर बोला करते थे कि राजनीति बड़ा गंदा दलदल है इसके चक्कर में कोई पड़ जाए तो फिर उसे भला बुरा कुछ नहीं सुझता सत्ता का सुख एक ऐसा सुख है कि जिसे मिल जाता है वह इसी दलदल में अपना शासन सत्ता का भोग भोगता रहता है।

जब तक सत्ता की कुर्सी के चारों पावा में मजबूती रहती है तब तक सत्ता भोगने वाले को राज्य के मासूम लोगों की गरीबों की उनके अनेकों प्रकार की परेशानियों का तनिक भी ख्याल नहीं आता परन्तु जैसे ही सत्ता की कुर्सी पे बैठे पार्टी के वजनदार व्यक्ति की कुर्सी चारों पावा में पावा भी कमजोर हो जाता है और शासन सत्ता से आम जनता के द्वारा अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए सत्ता का आनंद भोगने वाले को बाहर का रास्ता दिखाया जाता है उसी पल से उसे राज्य में मासूम जनता गरीबों की दुख तकलीफ नजर आने लगते है ।

शासन सत्ता का सुख भोगने के बाद जब बाहर विपक्ष में बैठा दल सत्ता दल को पानी पी पी कर गालियां देता है और राज्य की मासूम जनता को होने वाली समस्याओं की बात कहता है तो उसका एक ही उद्देश्य रहता है कि पुनः आम नागरिकों को बहला फुसला कर सत्ता में वापसी करना होता है नेताओ के बहकावे में जल्द ही मासूम जनता आ जाती है।

क्योंकि यही वह छत्तीसगढ़ है कि अदानी के द्वारा जब तारा में कोल उत्खनन के लिए जंगलों का सफाया करना था तो बाकायदा एक कांग्रेस पार्टी के नेता ने अपने बयान में कहा कि जंगल की पेड़ तो दूर अगर पेड़ का एक डंगाल भी कटा तो पहली गोली अपने सिने में खाऊंगा आपको बता दे कि हजारों लाखों पेड़ काटे गए लेकिन सीने में गोलियां खाने वाले नदारत दिखे झड़प हुई आम नागरिकों एवं पुलिस प्रशासन के बीच ऐसे कई पुलिस कर्मी एवं ग्रामीण घायल हुए लेकिन सीने में गोली खाने वाले नदारत दिखे जब ऐसे मामले होते है जब राजनीतिक लोगों के शिकार एवं उनके बहकावे में आ कर उपद्रव मचाने को तैयार हो जाता है ऐसे मामले से बचना चाहिए।

फाइल फोटो

खैर हम आपको बताने वाले है कि छत्तीसगढ़ में सत्ता चाहे भाजपा के हाथ में रहे या कांग्रेस के या अन्य किसी दल में यहां तमाम प्रकार से छत्तीसगढ़ का बंटा धार होता दिख रहा है क्योंकि छत्तीसगढ़ के लगभग लगभग हर जिलों में पुलिस एवं आम नागरिकों , ग्रामीणों के बीच लगातार हिंसा बढ़ती दिखाई दी जिसमें थाना चौकी में उपद्रवियों के द्वारा कई पुलिस कर्मियों के घायल होने की बात महिला पुलिस कर्मियों से हैवानियत एवं हिंसा झड़प में पुलिस कर्मियों द्वारा ग्रामीणों की बर्बरता पूर्वक पिटाई यह सब राजनीतिक कमियों की देन होना माना जा सकता है। जिसका  खामियाजा आम नागरिकों एवं शांत छत्तीसगढ़ को भुगतना पड़ रहा है।

जिस राज्य में राज्य के सभी को सुरक्षा देने वाले पुलिस प्रशासन को खुले आम दौड़ा दौड़ा कर मारा जाने लगे एवं पुलिस अपनी बेबसी एवं मजबूरी की दुहाई देते हुए रोते बिलखते अपने जान बचा देने की भीख मांगती दिखे इस राज्य के विकास की क्या ही बात कही जा सकती है उस राज्य की सरकार के लिए विचारणीय बात है कि पुलिस प्रशासन को उपद्रवियों के सामने हाथ जोड़ना एवं गिड़गिड़ा पड़े ऐसे मौके में तो पुलिस कर्मियों को तत्काल स्वतंत्र करने की आवश्यकता होती है उपद्रवियों की बैंड बजा दे ताकि राज्य में शांति व्यवस्था बरकरार रहे।

बता दे कि छत्तीसगढ़ में लगातार कई मुद्दों को लेकर सत्ता एवं आम नागरिकों के बीच तनाव की स्थिति निर्मित है यह स्थिति तब भी बनती थी जब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार थी लेकिन अभी यह लगातार देखने को मिल रहा है कि बड़े बड़े खदान एवं फैक्ट्री लगाने के नाम पर ग्रामीणों, आम नागरिकों एवं पुलिस में सीधा झड़प होता नजर आ रहा है जिसका सबसे बड़ा कारण है उस क्षेत्र के राजनेता जिन्हें फैक्ट्री भी लगवाना है खदान भी चलवाना है परन्तु आम नागरिकों से बात नहीं करना एवं अपने मुंह को छुपाकर एयर कंडीशन भवन में बैठ जाना है।

फाइल फोटो

इस तमाम प्रक्रिया में मारे जाते है मासूम ग्रामीण या पुलिसकर्मी सत्ता दल चाहे किसी भी दल का हो पुलिसकर्मियों को तो अपने जरूरत के हिसाब से चलने वाला कठपुतली समझ कर नचवा रहे है।

एक पुरानी कहावत है कि व्यापारी में नर्म, महिला में शर्म, प्रशासन गर्म और मानव में रहम सदैव होना चाहिए तभी एक अच्छा समाज का निर्माण हो सकता है परन्तु यहां सब उल्टा पड़ा है इंसान इंसान के ही जान के पीछे पड़ा है व्यापारी लुटेरा बनने को आतुर है प्रशासन गर्मी के जगह मजबूर एवं लाचार नजर आ रही है यह हाल छत्तीसगढ़ का होता नजर आ रहा है।

लगातार हो रहे उपद्रव एवं हैवानियत से निपटते हुए छत्तीसगढ़ की तमाम जनता शासन प्रशासन व्यापारियों में आपसी सामंजस्य बनाने की जरूरत है जिससे राज्य में हो रहे ग्रामीणों एवं पुलिस के बीच झड़प एवं उपद्रव जो देखते देखते हैवानियत तक पहुंच गई है शांत हो सके।

बता दे कि तमनार में लगातार जो मंजर देखने को मिल रहा जहां एक थाना प्रभारी को कुछ दिन पहले जम कर मारा गया जिसमें थाना प्रभारी उग्र उपद्रवियों से अपनी जान की भीख मानते गिड़गिड़ाती दिखी ठीक हाल ही में एक महिला पुलिस कर्मी को उपद्रवियों द्वारा लात जूता से मारा जा रहा है उसके कपड़े फाड़ अर्धनग्न स्थिति में लाचार विवश कर अपने जान की भीख मांगने तक के लिए मजबूर कर दिया गया लगातार पुलिस पर उपद्रवियों के द्वारा हमला करना यह दर्शाता है कि छत्तीसग़ढ की पुलिस को इन नेता मंत्री ने कितना लाचार एवं विवश कर दिए है , जो बढ़ते अपराधों एवं ऐसे उपद्रवियों पर लगाम तो लगा सकती है पर लाचार हो कर रही है है ।

इस तरह के उपद्रवियों जिनके हैवानियत भरे कृत्य से पूरे प्रदेश एवं समाज को कलंकित होना पड़े को दो मिनट में ठीक करने का ताकत छत्तीसगढ़ पुलिस खूब रखती है बावजूद उसके नेता मंत्रियों के हाथों कठपुतली बन उनके जरूरतों के हिसाब से नाचने को बाध्य हो कर रह गई है ।

फाइल फोटो

इस तरह की हैवानियत एवं ग्रामीणों पुलिस कर्मियों की आपसी झड़प एवं राजनेताओं सत्ता में बैठे एवं विपक्ष की भूमिका निभाने वालों की चुप्पी छत्तीसगढ़ को विकास के जगह विनाश के काली गर्त में डालने का कारण बन सकती है। जो कि अत्यंत गंभीर है पुलिस प्रशासन में उपद्रवियों द्वारा एक सिपाही से लेकर थाना प्रभारी उच्च अधिकारी किसी को भी अपने उपद्रवों के आगोस में लेने को आतुर रहती है वही पुलिस प्रशासन लाचार नजर आते है।

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