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गोयल हॉस्पिटल में लगा बड़ा आरोप, आयुष्मान योजना के नोडल ने बताया हॉस्पिटल को बताया फर्जी दोषी कौन नोडल अधिकारी या CHMO ?

Aug 25, 2025

सरगुजा समय अंबिकापुर: – आयुष्मान भारत योजना गरीबों और आम लोगों के लिए सरकार की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना है ताकि हर गरीबों एवं असहाय व्यक्तियों को इस योजना वाले कार्ड से आरामदायक एवं सुविधापूर्ण ईलाज प्राप्त हो सके और कोई भी पैसा के अभाव से इलाज से वंचित न रहे। 

परन्तु इस आयुष्मान योजना का दुरुपयोग कैसे करना है सरगुजा के निजी अस्पताल के वह संचालक से पूछिए जो स्वयं तो शासकीय हॉस्पिटल में शासकीय डॉक्टर होने के बावजूद निजी अस्पताल के संचालक या तो स्वयं है या अपनी धर्मपत्नी के नाम से निजी हॉस्पिटल संचालित कर रहे है।

इन दलालरूपी कुछ शासकीय डॉक्टरों का आयुष्मान योजना के नाम का अर्थ बदलते लुट ठग एवं अवैध धन उगाही योजना में तब्दील कर डाला है जिसके कारण छत्तीसगढ़ सरकार एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की किरकिरी एवं बदनामी ये दलाली पूर्वक कार्य करने वाले स्वास्थ्य विभाग के अफसर करवा रहे है।


सरगुजा जिला में स्वास्थ्य विभाग के कई ऐसे अफसर है जो स्वयं के निजी अस्पताल को शासकीय नौकरी में रहते हुए भी धड़ल्ले से संचालित कर रहे है एवं निजी अस्पताल के माध्यम से आयुष्मान योजना को अवैध कमाई का जरिया बना डाला है क्योंकि कार्यवाही करने वाले पद पर यह स्वयं ही आसीन है तो कार्यवाही होने की गुंजाइश है ही नहीं ।

सरगुजा में एक ऐसा मामला देखने को मिला है जो कि अंबिकापुर के बनारस रोड़ स्थित गोयल अस्पताल का है जिसके बारे में स्वास्थ्य विभाग के आयुष्मान भारत योजना के नोडल अधिकारी राजेश भागवली ने उक्त संचालित निजी अस्पताल को फर्जी बताते हुए बताया कि गोयल हॉस्पिटल के नाम से सरगुजा में किसी भी निजी अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नहीं है ।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार गोयल अस्पताल के नाम से संचालित फर्जी निजी अस्पताल अवैध रूप से अपने अपने गुर्गों एवं गुंडों के माध्यम से आयुष्मान भारत योजनाओं का लाभ लेने एवं अवैध रूप से धन उगाही करने के लिए आम ग्रामीणों को डरा धमका रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार इस फर्जी हॉस्पिटल के संचालकों पर ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि अगर बात नहीं मानी तो तुम्हारी पत्नी को उठा ले जायेंगे हद है स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्ट एवं दलाल अफसर जिन्हें इतने बड़े पैमाने में होने वाली आयुष्मान भारत के नाम से गुंडई एवं दबंगई के माध्यम से अवैध धन उगाही होना नहीं दिखा।


बता दे कि इस फर्जी रूपी गोयल अस्पताल नाम से संचालित  अस्पताल में इलाज से ठगी एवं अवैध उगाही के साथ धमकी चमकी का कारोबार बेखौफ रूप से चल रहा है ,इस बड़े भयावह रैकेट में अस्पताल के गुर्गे एवं एजेंट गांव-गांव से मासूम लोगों को अस्पताल लाते है और उनसे आधार कार्ड नंबर लेकर स्वस्थ्य आदमी की बिस्तर में लेटा कर मरीज बताते हुए आयुष्मान कार्ड का पैसा निकाल लेते है।

इस खेल की शुरुआती प्रक्रिया  प्रथम कड़ी में सबसे पहले थंब इम्प्रेशन लिया जाता है फिर बेड पर लिटाकर उनकी तस्वीर खींच ली जाती है, और फिर आयुष्मान कार्ड से इलाज का फर्जी क्लेम उठाकर मोटी रकम निकाल ली जाती है।

सबसे बड़ा सवाल यह है सब स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे यह तमाम खेल चल रहा है लेकिन स्वास्थ विभाग को इस फर्जीवाड़े की भनक भी नहीं है, या फिर सबकुछ जानकर भी विभाग के आला अफसर अनजान बन कर निजी गोयल हॉस्पिटल को अवैध उगाही करने का जिम्मा सौंप दिया है।


मामले को लेकर जब आयुष्मान के नोडल अधिकारी से सवाल किया गया तो नोडल अधिकारी राजेश भागवली ने और बड़ा चौंकाने वाला खुलासा कर डाला कि गोयल अस्पताल रजिस्टर्ड ही नहीं है, तो अगर इस अस्पताल रजिस्ट्रेशन नहीं है तो विभाग ने उक्त संचालक पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं की एवं फर्जी अस्पताल चलाने के लिए संचालक पर अपराध पंजीबद्ध क्यों नहीं करवाया गया। क्या विभाग मासूमों की मौत का तांडव इस फर्जी अस्पताल के माध्यम से देखना चाहता है।

भाजगवली आगे बताया कि पहले इस जगह पर HR हेल्थ केयर अस्पताल संचालित था, अब यहां गोयल हॉस्पिटल है वही जांच कर कार्यवाही की बात कही है ।

बता दे कि एक तरफ प्रदेशभर के निजी अस्पताल 1 अगस्त से आयुष्मान योजना के रुके पैसे के भुगतान नहीं करने पर  इलाज बंद करने कहा है दूसरी तरफ इन्हीं अस्पतालों में आयुष्मान योजना को लूट का अड्डा बना दिया गया है।

विशेष सूत्रों के हवाले से यह जानकारी प्राप्त हुई है कि सरगुजा में बनारस रोड स्थित पूर्व में HR हेल्थ केयर के नाम से संचालित  था जिसके बाद उस हॉस्पिटल को बेच दिया गया ।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार HR हेल्थ केयर हॉस्पिटल के खरीददार ने उक्त हॉस्पिटल को गोयल हॉस्पिटल के नाम से संचालन प्रारंभ कर दिया जिस गोयल हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन नहीं होना आयुष्मान योजना के नोडल अधिकारी ने बताया यह निजी अस्पताल का स्वामी कोई अन्य नहीं बल्कि शहर में गोयल ब्लड बैंक एवं गोयल पैथोलैब एवं कांसाबेल में निजी अस्पताल चलाने वाले व्यक्ति ही इस हॉस्पिटल के भी स्वामी है ।

मतलब अब आयुष्मान योजना से अवैध धन उगाही की ललक इस कदर है कि अंबिकापुर के बाद अब कांसाबेल में भी निजी अस्पताल के माध्यम से आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़ा करते हुए करोड़ो रुपए की उगाही सरकार से की जाएगी।

हमारी विशेष पड़ताल में यह बात सामने देखने को मिल रही है कि विभाग के अंदर ही कुछ दलाल ऐसे बैठे है जो कि कुछ निजी अस्पतालों के संचालकों का बतौर कमिशन के कारण उनका चरण वंदन करते हुए स्वास्थ्य विभाग एवं स्वास्थ्य मंत्री की छबि को धूमिल करने का एक जोरदार अभियान चला रखा है जिससे इन्हें तो कुछ निजी अस्पतालों के दलाल रूपी संचालकों से बतौर कमिशन के रूप में नोटों की कुछ गड्डी बटोरने को मिल जाती है एवं के कुछ उसके चक्कर में ये नियमाविरुद्ध संचालित शासकीय एवं अर्धशासकीय अस्पताल में कार्यवाही नहीं करते है।


आयुष्मान भारत योजना के दुरुपयोग में कार्यवाही नहीं होने का सबसे बड़ा कारण तत्कालीन नर्सिंग होम एक्ट नोडल अधिकारी संदीप त्रिपाठी, आयुष्मान योजना नोडल अधिकारी राजेश भजगावली एवं CMHO कि भूमिका संदिग्ध है जो कि अत्यंत गंभीर मुद्दा है इन लोगों की मिली भगत से आयुष्मान योजना में जम कर फर्जीवाड़ा करते हुए करोड़ो रुपए का गोलमाल किया जा रहा है ।

स्वास्थ्य विभाग में इस तरह के तमाम मामले आते है रहते है पर यहां नोडल अधिकारी एवं CMHO का एक नया फंडा है कमेटी बनाएंगे जांच टीम के माध्यम से जांच करवाएंगे एवं कड़ी कार्यवाही करेंगे।

जबकि इनकी जांच टीम एवं बनाई गई कमेटी महीनों – महीनों सोते रहती है एवं निजी अस्पतालों के इशारों पर नाचती रहती है इसका जीता जागता उदाहरण दयानिधि हॉस्पिटल भी है जहां इनकी जांच टीम एवं कमेटी कार्यवाही करने में सक्षम होती नहीं दिख रही है ।

क्योंकि जब कलेक्टर सरगुजा के मौखिक आदेश जिसमें दयानिधि  निजी हॉस्पिटल के विरुद्ध तमाम प्रकार की अनियमितता एवं आयुष्मान योजना में करोड़ो रुपए के फर्जी भुगतान एवं डॉक्टर संदीप त्रिपाठी की उक्त निजी अस्पताल दयानिधि में अवैध रूप से लाभ पहुंचाने की क्या संलिप्तता है, कि जांच करके शासकीय अस्पताल में बतौर डॉक्टर कार्य करने के अलावा निजी अस्पताल संचालित करने के गम्भीर मामले को देखते हुए मामले में जांच कर डॉक्टर संदीप त्रिपाठी को नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी से हटाते हुए जांच कर दोषी पाए जाने पर निलंबन की कार्यवाही हेतु पत्राचार करने के निर्देश को भी कूड़ेदान में डाल दिया या फिर यह कहा जाए कि कलेक्टर के बात को एक कान से सुन कर दूसरे कान से निकाल देने की कला स्वास्थ्य विभाग के कुछ दलाली पूर्वक कार्य करने वाले अफसरों के पास पर्याप्त रूप से है।

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