सरगुजा समय अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में एक ऐसा ‘अजब-गजब’ डॉक्टर है, जिसकी कार्यशैली पर अब कानून भी शर्मसार हो रहा है। अंबिकापुर के दयानिधि अस्पताल के स्वघोषित सर्वेसर्वा और शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी ने पूरे स्वास्थ्य महकमे को अपनी उंगलियों पर नचा रखा है। एक ऐसा डॉक्टर, जो सरकारी वेतन सरकारी खजाने से लेता है, लेकिन जनता का खून चूसने के लिए निजी अस्पताल चलाता है।

गजब मामला छुट्टी ‘बीमारी’ की, प्रैक्टिस ‘दबंगई’ की!
डॉ. संदीप त्रिपाठी का कारनामा देखिए—पिछले 3-4 महीनों से स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में ये महोदय ‘गंभीर रूप से बीमार’ हैं। विभाग में छुट्टी का आवेदन डाल रखा है कि ‘साहब, मैं अस्वस्थ हूँ, ड्यूटी नहीं कर सकता।’ लेकिन, यही ‘बीमार’ डॉक्टर निजी अस्पताल में मरीजों के ऑपरेशन कर रहा है, कंसल्टेशन दे रहा है और मैनेजमेंट संभाल रहा है।
अगर यह डॉक्टर बीमार है, तो क्या अस्पताल में भर्ती मरीजों की जान से खिलवाड़ नहीं हो रहा? और अगर स्वस्थ है, तो सरकारी नौकरी से गद्दारी और सरकार गुमराह करते हुए छुट्टी का खेल क्यों ?

आयुष्मान का ‘डबल गेम’: सरकार से भी पैसा, जनता से भी वसूली!
इस अस्पताल की लूट का तरीका और भी शातिर है। गरीब मरीजों को आयुष्मान योजना का झांसा देकर भर्ती किया जाता है, लेकिन इलाज के नाम पर मरीजों को लूटा जाता है। ‘रंगे हाथों’ पकड़े जाने से बचने के लिए अस्पताल प्रबंधन काउंटर पर पैसा नहीं लेता, बल्कि अपने स्टॉफ के ‘फोन-पे’ (PhonePe) नंबर पर पैसा ट्रांसफर करवाता है।यह मामला सोसल मिडिया में एक व्यक्ति द्वारा जमकर प्रचार प्रसार किया जा रहा हैं।

इस तरह से डॉक्टर त्रिपाठी के द्वारा आयुष्मान योजना से लाभ लेने के बावजूद मरीजों से कैश पैसा लेना सीधा-सीधा एक बड़ा भ्रष्टाचार है, जिसमें सरकार से करोड़ों का भुगतान भी लिया जा रहा है और गरीब मरीज को भी बिल भरने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
किसकी ‘मेहरबानी’ से बेलगाम है ‘डॉक्टर त्रिपाठी ‘?
सवाल उठता है कि आखिर किसकी शह पर एक सरकारी डॉक्टर कानून की धज्जियां उड़ा रहा है? सिविल सर्जन कार्यालय से लेकर स्वास्थ्य मंत्री तक, आखिर इस डॉक्टर पर कार्रवाई करने से कौन सा ‘डर’ या कौन सा ‘दबाव’ रोक रहा है?
प्रशासनिक नकारापन: क्या विभाग के आला अफसर इस डॉक्टर के गुलाम बन चुके हैं कि एक कलम चलाने की हिम्मत भी नहीं है?
नर्सिंग होम एक्ट का मजाक: जो डॉक्टर खुद कभी इस एक्ट का प्रभारी रहा हो, वह आज खुलेआम नियमों को तार-तार कर रहा है और विभाग ‘मूकदर्शक’ बना तमाशा देख रहा है।

इस भ्रष्ट एवं नियमविरुद्ध तरीके से निजी हॉस्पिटल संचालित करने वाले डॉक्टर त्रिपाठी पर क्या स्वास्थ्य मंत्री जी का ‘आशीर्वाद’ प्राप्त है?
अंबिकापुर की जनता पूछ रही है—क्या स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस डॉक्टर को ‘गोद’ ले रखा है? नियम-कानून क्या सिर्फ आम आदमी के लिए हैं? अगर इस डॉक्टर के खिलाफ जल्द ही ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि स्वास्थ्य विभाग अब जनता का नहीं, बल्कि ‘दलालों और दागी डॉक्टरों’ की तिजोरी भरने का जरिया बन चुका है।

अंबिकापुर का स्वास्थ्य विभाग अब खुद ‘वेंटिलेटर’ पर है, क्या स्वास्थ्य मंत्री इस डॉक्टर संदीप त्रिपाठी एवं ‘दयानिधि’ निजी अस्पताल पर कार्यवाही के जगह संरक्षण प्रदान होता रहेगा?


