‘पटवारी राज’ के सामने नतमस्तक सरगुजा प्रशासन? करोड़पति पटवारी त्रिभुवन सिंह के विदेश यात्रा के पीछे छिपा आला अफसरों का ‘बड़ा राज’?
सरगुजा समय अंबिकापुर : – सरगुजा का राजस्व विभाग क्या अब किसी पटवारी की मर्जी से चल रहा है? यह सवाल सिर्फ जनता के मन में नहीं, बल्कि अब चर्चा के गलियारों में भी गूँज रहा है। नमनाकला (हल्का नं. 20) के तत्कालीन और वर्तमान में धौरपुर तहसील में पदस्थ पटवारी त्रिभुवन सिंह का मामला अब एक साधारण नियम उल्लंघन से कहीं ज्यादा गहरा हो चुका है। पटवारी की ‘बेखौफ विदेश यात्रा’ और उस पर विभागीय चुप्पी ने कई बड़े अफसरों की साख पर प्रश्नचिह्न लगा दिया हैं।
प्रश्न वही है की सरगुजा के तत्कालीन एवं वर्तमान में धौरपुर तहसील के पटवारी त्रिभुवन सिंह को ‘अभयदान’ क्यों?
बता दे की एक सरकारी कर्मचारी को विदेश जाने के लिए कड़े प्रशासनिक नियमों और अनुमति (NOC) का पालन करना अनिवार्य होता है। लेकिन त्रिभुवन सिंह के मामले में न सिर्फ नियमों को ताक पर रखा गया, बल्कि उन पर कार्रवाई करने के बजाय विभाग का पूरा तंत्र उन्हें ‘सुरक्षा कवच’ प्रदान करने में जुट गया है।
अंदरखाने की खबर यह है कि विभाग को डर केवल पटवारी से नहीं है, बल्कि उस ‘सच’ से है जो जांच खुलने पर बाहर आ सकता है।
सूत्रों की मानें तो यह विदेश यात्रा त्रिभुवन सिंह के अकेले का ट्रिप नहीं था, विशेष सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस त्रिभुवन सिंह के विदेश यात्रा के पीछे कई पटवारी, आर आई, तहसीलदार एवं एस डी एम की भी विदेश यात्रा हुई है?
जिसके चलते चर्चाओं का बाजार गर्म है कि इस आलीशान सफर में राजस्व विभाग के कई ‘बड़े साहब’ (उच्च अधिकारी, तहसीलदार या अन्य कर्मचारी) भी पर्दे के पीछे शामिल हैं। जिन्हे बचाने के लिए राजस्व विभाग त्रिभुवन सिंह को बचाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहा है।
आम नागरिकों के दबी जुबान से उठ रहे सवाल यह भी है की क्या त्रिभुवन सिंह के विदेश यात्रा का पूरा खर्चा किसी बड़े भू-माफिया ने उठाया था?
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार त्रिभुवन सिंह अपने शासकीय नौकरी से ज्यादा भू माफियाओ के संरक्षण में पल रहे है, खबर यहाँ तक की है की एक ब्लाक विशेष के जमीन दलाल इस पटवारी को भू माफियाओ का सरदार मनोनीत करने के फिराक में है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भू माफिया एवं जमीन दलाल पटवारी त्रिभुवन सिंह के विदेश यात्रा मामले पर अगर गाज गिरती है, तो जांच की आंच उन बड़े अधिकारियों के बंगलों तक भी पहुँच सकती है, जिन्होंने इस यात्रा को मौन सहमति दी थी या इस पटवारी के संरक्षण में विदेश यात्रा की थी।
यह सबसे बड़ा कारण है कि विभाग आज त्रिभुवन सिंह के विदेश यात्रा पर ‘मौन धारण’ किए हुए है। RTI में मांगी गई जानकारी का मजाक उड़ा रहा विभाग, और साक्ष्यों का खेल अपने हिसाब से लीपापोती करने को है तैयार।
इस पटवारी के विदेश यात्रा मामले में सबसे शर्मनाक पहलू तब सामने आया जब RTI कार्यकर्ताओं ने यात्रा संबंधी समस्त दस्तावेज़ मांगे। एक तरफ विभाग यह दावा करता है कि सब कुछ नियम के तहत है, तो दूसरी तरफ वे खुद दस्तावेज़ उपलब्ध कराने के बजाय शिकायतकर्ता को ही ‘साक्ष्य’ लाने की चुनौती दे रहे हैं।
क्या विभाग के पास अपने ही कर्मचारी का रिकॉर्ड नहीं है? यह साफ़ तौर पर स्पस्ट करता है की मेरा कर्मचारी विदेश यात्रा किया है लेकिन दस्तावेज आप उपलब्ध कराए, जिसका मकसद केवल वक्त गुजारना और मामले को ठंडे बस्ते में डालना ही माना जा सकता है।
’सरगुजा समय’ का प्रशासन को खुला चैलेंज:- हमारा खोजी दल इस भ्रष्ट पटवारी एवं उसके सिंडिकेट की परतों को लगातार कुरेद रहा है। पटवारी त्रिभुवन सिंह की अवैध संपत्ति और उनकी ‘हाई-प्रोफाइल’ विदेश यात्रा का गठजोड़ अब ज्यादा दिन नहीं टिकेगा इसकी गारंटी है, इस अवैध विदेश यात्रा में जो इस पटवारी को बचाने ढाल के रूप में खड़े होंगे उन्हें यह माना जायेगा की उस आला अफसर की मौन स्वीकृति इस पटवारी के विदेश यात्रा में थी या फिर वो अफसर स्वयं नियमविरुद्ध तरीके से विदेश यात्रा कर चूका है, और अपने दामन में आंच ना आए इस लिए बार बार त्रिभुवन सिंह के दामन को धोने का काम कर रहा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दे की जिस हिसाब से राजस्व विभाग के आला अफसरों को पटवारी त्रिभुवन सिंह के विदेश यात्रा की जानकारी सुचना के अधिकार के तहत देने में नस ढीली हो रही है उससे यह स्पस्ट होता है की त्रिभुवन सिंह को बचाने के लिए राजस्व विभाग के आला अफसर तत्पर है, जिससे उनके दामन में आंच ना आ सके।

