दयानिधि हॉस्पिटल के संबंध में सम्बंधित स्वास्थ्य विभाग ने सूचना के अधिकार में बताया की रैम्प के जगह लिफ्ट मिला, करोड़ों की गाड़ी खरीदने अनुमति नहीं लिया गया, नर्सिंग होम एक्ट के प्रभारी ने निरिक्षण कर दयानिधि अस्पताल कों 09 बेड के बाद 11 बेड बढ़ाने की अनुशंसा की, अर्थो की डिग्री डॉक्टर बी एस सेंगर की लेकिन डॉक्टर बी एस सेंगर ने फोन पे बताया की मै वहां बैठता ही नहीं, मतलब क्या शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी का हैं सारा खेल?? कब होंगी जाँच एक कलेक्टर गए दूसरे आये लेकिन कार्यवाही……..???? क्या हुई यह विचारणीय।

सरगुजा समय अंबिकापुर :- सरगुजा संभाग के एक मात्र सबसे बड़े जिला हॉस्पिटल जो मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नाम से भी जाना जाता हैं जिस जगह से शासकीय सेवक डॉक्टर संदीप त्रिपाठी का वेतन भी यही से निकलता हैं के द्वारा अपने निजी अस्पताल जो की उनकी धर्मपत्नी के नाम से संचालित हैं. जिसको स्वयं संदीप त्रिपाठी ने स्वयं का निजी अस्पताल होने का कई अखबारों में विज्ञापन एवं वाल पेंटिंग एवं मरीजों के परिजनों से हुज्जत बाजी करते हुए मिडियाकर्मियों से भी तू – तू मै – मै करके मरीजों का आयुष्मान से पैसा काटने के बाद कैश पैसा के लिए मेडिकल कॉलेज में पहुंच सम्बंधित मरीज एवं उनके परिजनों कों डरना धमकाना पैसा नहीं देने पे FIR करवाने की धमकी देना यह साबित करता हैं की शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी अपने नौकरी से ज्यादा अपने स्वघोषित निजी अस्पताल दयानिधि कों महत्व देते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें की उक्त दयानिधि हॉस्पिटल में आयुष्मान योजना के तहत पंजीयन नहीं करने में सबसे बड़ी कमी विभाग द्वारा बताई गई थी की उक्त हॉस्पिटल में रैम्प एवं लिफ्ट, पार्किंग की व्यवस्था नहीं हैं बावजूद उसके किस दलाली पूर्वक कार्य करने वाले अफसर के द्वारा किये गए गोलमाल के बाद दयानिधि अस्पताल का आयुष्मान योजना के तहत पंजीयन किया गया और उक्त हॉस्पिटल के द्वारा फर्जी तरीके से आयुष्मान योजना के माध्यम से करोड़ों रूपए का चपत शासन कों लगा डाला यह जाँच का विषय हैं।

इसी क्रम में अगर आप देखेंगे तो उक्त हॉस्पिटल जो अपने शुरुवाती दौर में महज 09 बेड का हॉस्पिटल था अचानक किस नर्सिंग होम एक्ट के नोडल ऑफिसर ने उक्त दयानिधि अस्पताल का निरिक्षण किया जिसमे तमाम खामियों के बावजूद 11 बेड बढ़ाने की जरुरत आन पड़ी जिसके कारण उक्त 09 बेड वाले हॉस्पिटल कों 11 बेड बढ़ाने की अनुशंसा करते हुए टोटल 20 बेड का अस्पताल बना देने की अनुमति प्रदान कर बैठा इस बेतुके फरमान कों जारी करने की जरुरत क्यों पड़ी उक्त निरिक्षण करने वाले नर्सिंग होम एक्ट के नोडल ऑफिसर एवं उनकी टीम की जाँच जिनके कृत्य संदेहास्पद हैं की जाँच कब तक होंगी यह भी विचारणीय बात हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह हैं की सरगुजा समय के संपादक ने जब सूचना के अधिकार के तहत जानकारी चाही तो विभाग ने बताया की उक्त हॉस्पिटल में रैम्प के जगह लिफ्ट पाया गया। इससे विभाग के अफसर का दलाली पूर्ण जानकारी आवेदक कों प्रदान करना एवं नियम विरुद्ध तरीके से अस्पताल कों अवैध संरक्षण प्रदान करना माना जा सकता हैं जिससे विरुद्ध बचाव के लिए सम्बंधित अस्पताल से कार्यवाही करने वाले अफसर के द्वारा बतौर रिश्वत मोटी रकम प्राप्त करना माना जा सकता हैं। जो की जाँच का विषय हैं।

क्योंकि जब विभाग खुद मान रही हैं की उक्त हॉस्पिटल में सिर्फ लिफ्ट हैं और रैंप नहीं हैं तो आयुष्मान योजना का लाभ के लिए दयानिधि अस्पताल पंजीयन कैसे हो गया। जब विभाग खुद कमी बता रहा हैं तो जिस रैंप के नहीं होने का बात विभाग बड़े आसानी से कर रहा हैं उस रैम्प के नहीं होने से अस्पताल में किसी भी प्रकार की अगर आगजनी की घटना घट जाती हैं तो मरीज एवं उनके परिजनों सहित हॉस्पिटल के समस्त स्टॉफ का जल कर मरना लाजमी हैं क्योंकि आगजनी के मामले में सबसे पहले विद्युत बंद किया जाता हैं जिसके कारण लिफ्ट बंद हो जायेगा और रैम्प नहीं होने के वजह से सैकड़ों व्यक्ति जल कर खाख हो सकते हैं बावजूद इसके विभाग के आला अफसरों कों दयानिधि अस्पताल में कार्यवाही करने के जगह बेड संख्या बढ़ाने की हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें की सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नर्सिंग होम एक्ट के तत्कालीन प्रभारी रहे डॉक्टर संदीप त्रिपाठी ने अपनी धर्मपत्नी के नाम वाले अस्पताल जो की उक्त अस्पताल की स्वामी सिर्फ कागजो में हैं मूलरूप से तो शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी ही इस हॉस्पिटल का स्वघोषित स्वामी हैं। कों अवैधानिक रूप से अपने पद का दुरूपयोग करते हुए अनुचित लाभ दयानिधि अस्पताल कों पहुंचाया हैं जिसके कारण आयुष्मान कार्ड योजना के तहत कई करोड़ रूपए शासन कों चूना लगा एवं भ्रम में रख कमाया जिसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं इस शासकीय डॉक्टर की आय से अधिक की संपत्ति।

शासकीय डॉक्टर के करोड़ों रूपए वाले मर्सिडीज़ कार जो की शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी के नाम से ही हैं के क्रय करने की अनुमति विभाग से नहीं ली गई एवं अपने अवैध कमाई का एक छोटा हिस्सा इस कार कों खरीद अपना दबदबा एवं रसूखदारी दिखाने में लगाया गया।
सबसे बड़ी बात की इस दयानिधि अस्पताल में अर्थो सर्जन कौन हैं किसके नाम से आयुष्मान कार्ड ब्लाक किया जाता हैं जिस बी एस सेंगर डॉक्टर की अर्थो डिग्री का उपयोग संदीप त्रिपाठी के द्वारा किया जा रहा हैं वह डॉक्टर सरगुजा समय कों फोन में जानकारी देते हैं की वह दयानिधि हॉस्पिटल में बैठते ही नहीं हैं और संदीप त्रिपाठी स्वयं अर्थो का डॉक्टर हैं। तो अब सबसे बड़ी समस्या एवं जाँच इस विषय की होनी चाहिए की क्या शहर के मशहूर अर्थो के डॉक्टर ने सिर्फ काम चलाने या अपने नाम का उपयोग करने के लिए दयानिधि हॉस्पिटल कों अपनी डिग्री दें दी क्योंकि बिना डॉक्टर सेंगर के मर्जी के उक्त हॉस्पिटल संचालक के द्वारा डॉक्टर बी एस सेंगर की डिग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता।

अगर इसी क्रम के तह तक जाए तो शहर के मशहूर अर्थो डॉक्टर बी एस सेंगर कों अब अपने नाम की बदनामी की चिंता सताने लगी हैं क्योंकि जिस दयानिधि हॉस्पिटल में सेंगर साहब ने भरोषा कर अपनी डिग्री लगाई वहां कई मरीज का इलाज बिगड़ गया जिसमे एक मरीज ने तत्कालीन जिला सरगुजा कलेक्टर विलास भोस्कर के सामने अपने साथ हुए गलत ईलाज के लिए न्याय मांगने खड़ा हो गया जिसकी जाँच अभी शायद लंबित ही हैं।

अब सबसे बड़ा जाँच का विषय यह भी हैं की उक्त अर्थो के डॉक्टर संदीप त्रिपाठी जो की स्वयं शासकीय डॉक्टर हैं के द्वारा शासकीय अस्पताल में कितने मरीजों का ईलाज आयुष्मान कार्ड योजना के तहत बुक किया गया एवं इनके स्वघोषित हॉस्पिटल में कितने मरीजों का अर्थो सर्जन किया गया की जाँच की जाए की किस डॉक्टर के नाम से कितना केस आयुष्मान योजना के तहत शासकीय एवं दयानिधि अस्पताल में किया गया।

सरगुजा समय में प्रकाशित तमाम खबर कों सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत कों व्हाट्सप्प के माध्यम एवं अख़बार की प्रति उनके कार्यालय में भी पहुंचाया गया हैं जिसके बाद अब देखने वाली बात यह हैं की उक्त मामले में शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी जो स्वयं नर्सिंग होम एक्ट के प्रभारी रहते हुए दयानिधि अस्पताल कों अवैध तरीके से लाभ पहुंचाया एवं आयुष्मान योजना का अनुचित तरीके से पंजीयन करवा करोड़ों का वारा न्यारा कर डाला की जाँच कर कार्यवाही कब होती हैं।
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