कोरोना महामारी के कारण मूर्तिकारों पर गहराया आर्थिक संकट, लाखों का व्यवसाय सिमट कर रह गया हजारों में….

0
18
file photo- प्रतिमा को सजाता मुर्तिकार

अंबिकापुर– पहले गणेश पूजा और अब दुर्गापूजा पर महामारी के प्रभाव ने शहर के मूर्ति व्यवसायियों की कमर तोड़ दी है। महामारी ने जहां लाखों के व्यवसाय को चंद हजारों में समेट दिया। वही मांग में आई गिरावट ने मूर्तियों की कीमतों पर भी असर डाला है। नतीजा मूर्तिकार और मूर्ति व्यवसायियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

हर साल दुर्गापूजा के लिए मूर्ति बनाने वाले कारीगरों को सांस लेने की भी फुर्सत नहीं होती थी, दिन रात अपने परिवार के साथ मिलकर माता की भव्‍य मूर्तियां तैयार करते थे जिससे अच्‍छी आमदनी हो सके। इस बार कोरोना महामारी के कारण उनका व्‍यापार ही चौपट हो गया है। अंबिकापुर में सन 1977 से माँ दुर्गा की मूर्ति बनाते आ रहे मूर्तिकार सचिंद्र नाथ मंडल ने बताया कि इस बार कोरोना संक्रमण की वजह से बड़ी मूर्तियों का आर्डर नहीं मिला, जबकि छोटी मूर्तियों के ऑर्डर मिले हैं विगत वर्ष की तुलना में इस वर्ष मूर्तियों की बिक्री एक चौथाई रह गई, और कीमतों में भी भारी गिरावट आई है। इस साल भारी नुकसान हुआ है।

मुर्तिकारों का कहना है कि इस संकट की घड़ी में उनकी रोजी रोटी के भी लाले पड़ गये हैं, उन्‍हें चिंता सताने लगी है कि इस नुकसान के बाद अपने पूरे साल का खर्चा वो कैसे चलाएंगे। दुर्गापूजा में मूर्तियां बनाकर वो जो व्‍यापार करते थे उससे ही उनके सालभर का खर्चा चलता था। मूर्तिकार दुर्गापूजा के लिए प्रतिमाएं बनाकर उससे हुई कमाई से सालभर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। कलाकारों को इस बार पहले की तरह ऑर्डर नहीं मिले हैं, जो मिले भी हैं तो छोटी प्रतिमा बनाने के मिले हैं और पहले के मुकाबले बहुत ही कम ऑर्डर मिले हैं।

इस वर्ष मूर्तिकार ग्रामीण क्षेत्र के लोगों पर आश्रित है। ग्रामीण क्षेत्र के लोग मां दुर्गा की प्रतिमा खरीदने अंबिकापुर पहुंच रहे हैं। हालांकि ग्रामीण भी कोरोना आपदा की वजह से छोटी मूर्तियां खरीदना पसंद कर रहे हैं। शहर की बात करें तो प्रशासन के सख्ती की वजह से शहर के ज्यादातर इलाकों में दुर्गा पंडाल की स्थापना नहीं हुई। नतीजा मूर्तियों की बिक्री एक चौथाई तक सिमट कर रह गई। जिस वजह से इस साल मूर्तिकारों को भारी नुकसान हुआ है।


बहरहाल मूर्तियों में लगायी गयी पूंजी तो डूब चुकी है, वही इस आपदा में हुए नुकसान से मूर्तिकार कैसे और कब तक उभरते हैं यह उनके लिए चिंता का विषय बना हुआ है…