इस मामले से मुश्किल में सरकार, बेटे के साथ ये महिला देगी सीएम ऑफिस के बाहर धरना

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नयी दिल्ली। पश्चिम बंगाल में बीते गुरुवार को बीजेपी की रैली के दौरान पुलिस द्वारा कथित रूप से सिख व्यक्ति की पगड़ी खींचे जाने का मामला बढ़ता जा रहा है। गिरफ्तार किए गए सिख बलविंदर सिंह की पत्नी करमजीत कौर और उनके बेटे हर्षवीर सिंह शनिवार को राज्य सचिवालय नबन्ना के सामने धरने पर बैठेंगे। दोनों ममता सरकार से बलविंदर को रिहा करने की मांग करेंगे। बलविंदर को प्रदर्शन के दौरान पिस्तौल रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। बीते सप्ताह इस घटना ने उस समय सबका ध्यान खींचा था, जब पुलिस से आमना-सामना होने के बाद बलविंदर की पगड़ी गिर गई थी। सोशल मीडिया पर वीडियो के वायरल होने के बाद बीजेपी, कांग्रेस समेत कई अन्य प्रमुख लोगों ने ममता सरकार पर निशाना साधा था। हालांकि, पुलिस ने आरोप लगाया था कि बलविंदर के पास पिस्तौल थी।

हावड़ा जिले की पुलिस ने गुरुवार रात को कहा कि बलविंदर की पिस्तौल का लाइसेंस सिर्फ कश्मीर के राजौरी में ही वैध है। पुलिस ने ट्वीट किया, ”गृह मंत्रालय के शस्त्र लाइसेंस के राष्ट्रीय डेटाबेस के अनुसार, बलविंदर सिंह की पिस्तौल का लाइसेंस सिर्फ राजौरी जिले के लिए वैध है। उन्हें हथियार के साथ गैरकानूनी ढंग से इकट्ठा होने के लिए गिरफ्तार किया गया है। कृपया, गढ़ी हुईं सोशल मीडिया पोस्ट्स से दूर रहें। सच्चाई का पता लगाने के लिए गहन जांच जारी है।” 

बलविंदर की पत्नी कौर ने गुरुवार शाम को वीडियो मैसेज में कहा,”मैं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिलना चाहती हूं। मैं इसके लिए कई बार अपील की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। मैं और मेरा बेटा शनिवार सुबह 11 बजे से उनके ऑफिस के सामने धरने पर बैठेंगे। मैं सभी सिख संगत से अपील करती हूं कि अपनी बहन के साथ खड़े हों। मैं अपने पति को रिहा होते देखना चाहती हूं।’ पश्चिम बंगाल के बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि सिंह एक प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी में काम करते हैं और उन्हें बीजेपी के युवा नेताओं की विंग को सुरक्षा देने के लिए तैनात किया गया था। उन्होंने बुधवार को कहा, ”यहां तक कि मेरे सुरक्षाकर्मी के पास भी उस दिन पिस्तौल थी।”

कोलकाता के सिख समुदाय के सदस्यों ने गुरुवार को बलविंदर सिंह के लिए न्याय की मांग करते हुए संत कुटिया गुरुद्वारा, भवानीपुर में मौन प्रदर्शन किया। उन्होंने सिंह की तस्वीर के साथ पोस्टर लगाए। समुदाय ने एक बयान में कहा, ”पुलिस ने बलविंदर सिंह की पगड़ी को दबोच लिया और उसे अपने बालों से खींचा। इस तरह का व्यवहार एक पूर्व-सेना के आदमी के साथ पूरी तरह से अस्वीकार्य है जो सिर्फ अपना कर्तव्य निभा रहा था।”

पिछले दिनों विवाद शुरू होने के बाद ममता सरकार ने सफाई पेश की थी। सरकार के गृह विभाग ने कहा था कि राज्य में सिख भाई-बहन शांति और सद्भाव से रहते हैं। ट्वीट में कहा गया, ”एक हालिया घटना जब एक अनधिकृत प्रदर्शन के बीच एक व्यक्ति को अवैध हथियार के साथ पकड़ा गया, उस घटना को अब सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है। पुलिस ने कानून के साथ काम किया।” राज्य सरकार ने आगे कहा कि ऐसा प्रदर्शन जिसकी इजाजत नहीं थी और उसमें एक व्यक्ति अवैध रूप से पिस्तौल लेकर आया था। उस पूरे घटनाक्रम के संदर्भ को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। इसके साथ ही अपने हित के लिए सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है।