मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार किसानों के हित के लिए कानून बनाएगी तो भाजपा के पेट में दर्द क्यों..?

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सरगुजा समय। बलरामपुर। जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता सुनील सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार कांग्रेस की सरकार ने छत्तीसगढ़ में किसानों का 11 हजार करोड़ का कर्ज माफ किया। छत्तीसगढ़ में किसानों के फसल का 2500 रू. दाम देने का काम किया और जब केन्द्र सरकार ने रोक लगायी तब राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत किसानों को पैसा दिये जा रहे है। लगातार किसान हित में छत्तीसगढ़ सरकार फैसले ले रही है और एक और फैसला अधोसंरचना उन्नयन निगम की स्थापना। भाजपा के किसान विरोधी चरित्र, गरीब विरोधी चरित्र, आम आदमी विरोधी चरित्र, छत्तीसगढ़ विरोधी चरित्र के कारण भाजपा को ऐसे जनहित के फैसले रास नहीं आ रहे है और इसीलिये भाजपा इन पर आपत्ति जता रही है। भाजपा का विरोध कांग्रेस के कानून से नहीं कांग्रेस के आयोग से नहीं छत्तीसगढ़ की जनता के हितो से है। भाजपा जन विरोधी छत्तीसगढ़ विरोधी, किसान विरोधी है ये स्पष्ट हो गया है।


जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता सुनील सिंह ने कहा कि भाजपा ने किसानों को बड़ी कंपनियों के हाथों बंधुआ बनाने की साजिश रची है। कान्ट्रेट फार्मिंग के नाम से और न्यूनतम समर्थन मूल्य से वंचित करके और ऐसे समय में छत्तीसगढ़ सरकार अपने संवैधानिक दायरे में रहकर संविधान में जो राज्यों की सूची में कृषि है उसमें कोई कानून बनाने जा रही है। भाजपा शपथ पत्र की बात करती है। भाजपा के शपथों का, भाजपा के पत्रों का और भाजपा के किसान विरोधी राजनीति को पूरा देश, पूरे देश के किसान समझ चुके है। देश में किसानों में और आम लोगो में गुस्सा उबल रहा है। भाजपा जमाखोरी, मुनाफाखोरी को कानून बनाकर उसकी छूट देना चाहती है। अपनी कंपनियों को और अगर छत्तीसगढ़ सरकार उसको रोकने के लिये कोई कानून बना रही है। किसानों का शोषण रोकने के लिये कांग्रेस सरकार कानून बनाने जा रही है तो अब भाजपा शपथ पत्र की बात करती है सुनील सिंह ने कहा कि संविधान में कृषि राज्य का विषय है और राज्य सरकार जो किसानों की उपज को लेकर कानून बना रही है तो इससे भाजपा को क्यों आपत्ति है? दरअसल भाजपा ने अंबानी, अडानी को पूरी खेती और फसलो का अधिकार किसानों से कान्ट्रेट फार्मिंग करके किसानों को इन कंपनियों को बंधुबा बनाने का सौदा ले लिया है। इस किसान विरोधी आचरण के खिलाफ छत्तीसगढ़ सरकार कानून बना रही है अपने संविधान प्रदत्त अधिकार क्षेत्र में कानून बना रही है तो इससे भाजपा को तकलीफ हो रही है। ये तकलीफ भाजपा के किसान विरोधी रवैय्ये और ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह किसानों को गुलाम बनाने की साजिश का जीता जगता सबूत है। जो भाजपा कल तक किसानों से 20 क्विंटल धान ख़रीदी की मांग पर भाजपा ने सरकार में रहते हुए किसानों से सिर्फ़ 10 क्विंटल धान ख़रीदने का फ़ैसला किया था। कांग्रेस के नेतृत्व में किसानों के आंदोलन के बाद ही सरकार 15 क्विंटल धान ख़रीदने के लिए बाध्य हुई थी।

उन्होंने कहा है कि भाजपा ने हर साल धान का 300 रुपए बोनस देने की बात कही थी लेकिन किसानों को बोनस सिर्फ़ चुनावी साल में मिल पाया। 2100 रुपए समर्थन मूल्य दिलाने का वादा तो भाजपा कभी अपने घोषणा पत्र में भी की थी, भाजपा सरकार ने जब केंद्र की सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार से कह दिया कि अगर किसानों को बोनस दिया गया तो केंद्र सरकार राज्य से चावल नहीं लेगी तब भाजपा के किसी नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नहीं कहा कि बोनस दिया जाना चाहिए। जिला प्रवक्ता सुनील सिंह ने यह भी कहा है कि प्रदेश भर के किसानों को प्रदेश के भाजपा कार्यकर्ता और भाजपा अध्यक्ष बताएं कि प्रदेश से चुनकर गए किस सांसद ने केंद्र सरकार के सामने यह बात उठाई थी कि किसानों का बोनस मिलना ही चाहिए।

उन्होंने कहा है कि किसानों को धान का 2500 रुपए प्रति क्विंटल भुगतान करने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ‘राजीव गांधी किसान न्याय योजना’ शुरु की और सुनिश्चित किया कि किसानों का नुक़सान न हो। लेकिन केंद्र की मोदी सरकार ने तो तीन काले क़ानून बनाकर किसानों का अहित सुनिश्चित कर दिया है। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार की समर्थन मूल्य ख़त्म करने की साज़िश पर भाजपा नेता चुप हैं। न वे मंडियों और सहकारी समितियों को ख़त्म करने पर कुछ कह रहे हैं और न ठेका खेती शुरु करने पर कुछ कह रहे हैं।

भाजपा नेताओं के बयान सिर्फ घड़ियाली आंसू हैं, भाजपा नेता पहले तय कर लें कि वे प्रदेश के किसानों के साथ खड़े हैं या नहीं फिर वे बयान दें। अगर वे प्रदेश के किसानों के हक़ में सोच रहे हैं तो उन्हें तीनों काले कानूनों का विरोध करना चाहिए और केंद्र सरकार से कहना चाहिए कि वह यह घोषणा करे कि न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी से कम दरों पर किसी भी कृषि उत्पाद की ख़रीदी को क़ानूनन अपराध घोषित किया जाएगा।

चंद उद्योगपति मित्रों के लिए कालाबाज़ारी और जमाखोरी को बढ़ावा देने वाले क़ानून बनाने वाली मोदी सरकार और भाजपा का सच किसान भली भांति समझ रहे हैं। वे जानते हैं कि कौन सी सरकार और कौन सी दल देश में या प्रदेश में किसानों के लिए बेहतर कर सकती है उनके हित का सोच सकती है।