Nobel Peace Prize 2020: विश्व खाद्य कार्यक्रम को मिला साल 2020 का नोबेल शांति पुरस्कार

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नई दिल्ली. नार्वे की नोबेल समिति ने विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) को 2020 का नोबेल शांति पुरस्कार देने का फैसला किया है. यह संगठन साल 1961 से दुनियाभर में भूख के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है. यह सुनिश्चित करता है कि खाद्य सुरक्षा के जरिए देशों की आबादी को मूलभूत ताकत दी जा सके.

नोबेल पुरस्कार के तहत स्वर्ण पदक, एक करोड़ स्वीडिश क्रोना (तकरीबन 8.27 करोड़ रुपये) की राशि दी जाती है. स्वीडिश क्रोना स्वीडन की मुद्रा है. यह पुरस्कार स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल के नाम पर दिया जाता है. इससे पहले, रसायन विज्ञान और भौतिकी सहित कई क्षेत्रों में इस साल के नोबेल पुरस्कार की घोषणा की जा चुकी है.

साल 2020 के साहित्य के नोबल प्राइज की घोषणा गुरुवार हो गई. अमेरिका कवयित्री लुईस गल्क को इस साल साहित्य के नोबल पुरस्कार से नवाजा गया है. पुरस्कार की घोषणा करते हुए स्वीडिश अकादमी ने ट्वीट किया है कि साल 2020 के साहित्य का नोबल प्राइज अमेरिकी साहित्यकार लुईस गल्क को व्यक्तिगत अस्तित्व को आवाज देती कविता के लिए दिया जा रहा है. बता दें कि लुईस बेहद सम्मानित साहित्यकार हैं. वो सामाजिक मुद्दों पर भी काफी सक्रिय रहती हैं.

इससे पहले आनुवंशिक रोगों और यहां तक कि कैंसर के उपचार में भविष्य में मददगार साबित होने वाली ‘‘जीनोम एडिटिंग’’ की एक पद्धति विकसित करने के लिये रसायन विज्ञान के क्षेत्र में 2020 का नोबेल पुरस्कार दो महिला वैज्ञानिकों को देने की बुधवार को घोषणा की गई थी.

स्टॉकहोम में स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने यह प्रतिष्ठित पुरस्कार इमैनुए शापेंतिये और जेनिफर ए. डॉना को देने की घोषणा की. यह पहला मौका है जब रसायन विज्ञान के क्षेत्र में दो महिलाओं को एक साथ इस पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई है,

फ्रांसीसी वैज्ञानिक शापेंतिये और अमेरिकी वैज्ञानिक जेनिफर ने ‘सीआरआईएसपीआर/सीएएस9’ (क्रिस्पर/कास9) नाम की एक पद्धति विकसित की, जिसका इस्तेमाल जंतुओं, पौधों और सूक्ष्म जीवों के डीएनए को अत्यधिक सूक्ष्मता से बदलने में किया जा सकता है.