अब भारत से ‘बासमती चावल’ के लिए लड़ेगा पाकिस्तान, जानिए क्या है नया बखेड़ा

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इस्लामाबाद. कश्मीर और सीमा विवाद को लेकर भारत से कई जंग हार चुका पाकिस्तान अब भारत से बासमती चावल के लिए टकराव पैदा करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान ने कहा है कि वह यूरोपीय यूनियन में जियोग्राफिल आइडेंडिफिकेशन (GI) टैग के लिए भारत के दावे का विरोध करेगा। प्रधानमंत्री इमरान खान के वाणिज्य सलाहकार अब्दुल रजाक दाउद की अध्यक्षता में सोमवार को हुई बैठक में यह फैसला किया गया। 

जियो न्यू की एक खबर के मुताबिक, बैठक में इंटीलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन (आईपीओ पाकिस्तान) के सेक्रेटरी, चावल निर्यातकों के संगठन के प्रतिनिधियों (REAP) और कानूनी जानकारों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान REAP के सदस्यों ने कहा कि पाकिस्तान बासमती चावल का बड़ा उत्पादक है, इसलिए भारत का विशिष्टता का दावा अनुचित है। दाउत ने साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तान ईयू में भारत के आवेदन का विरोध करेगा। 

इमरान के सलाहकार ने REAP और अन्य हितधारकों की सलाह का समर्थन किया और भरोसा दिलाया कि बासमती चावल पर उनके दावे की रक्षा की जाएगी। अखबार ने कहा है कि भारत ने ईयू में बासमती चावल पर पूर्ण स्वामित्व का दावा किया है। जियो न्यूज ने गल्फ न्यूज के हवाले से कहा है कि यूरोपीयन रेग्युलेशन 2006 के मुताबिक, बासमती को अभी भारत और पाकिस्तान के उत्पाद के रूप में मान्यता है।

गौरतलब है कि गंगा और हिमालय के मैदानी क्षेत्र में पैदा होने वाले बासमती का स्वाद और खुशबू दुनियाभर में फेमस है। भारत में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, पंजाब जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर बासमती की खेती होती है। हाल ही में मध्य प्रदेश ने भी जीआई टैग की मांग की थी, जिसका पंजाब जैसे राज्यों ने विरोध किया था। भारत हर साल करीब 33 हजार करोड़ रुपए के बासमती चावल एक्सपोर्ट करता है। 

किसी क्षेत्र विशेष के उत्पादों को जीअग्रैफिकल इंडिकेशन टैग (जीआई टैग) से खास पहचान मिलती है। चंदेरी की साड़ी, कांजीवरम की साड़ी, दार्जिलिंग चाय महाबलेश्वर स्ट्रॉबेरी, जयपुर ब्लू पोटरी, बनारसी साड़ी, तिरुपति के लड्डू, मध्य प्रदेश के झाबुआ के कड़कनाथ मुर्गा और मलिहाबादी आम समेत अब तक करीब 600 से ज्यादा भारतीय उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है।