नए राहत पैकेज को लेकर जल्दबाजी में नहीं मोदी सरकार

0
4
money packege corona fund

नयी दिल्ली। केंद्र सरकार दूसरे दौर के आर्थिक पैकेज को लेकर किसी जल्दबाजी के मूड में नहीं हैं। हिन्दुस्तान को सूत्रों के जरिए मिली जानकारी के मुताबिक अभी तक की पहले दौर के आत्मनिर्भर पैकेज की प्रगति सरकार की उम्मीद के अनुकूल है और आने वाले दिनों में इसकी बाकी नतीजों को देखने के बाद ही नए पैकेज का ऐलान किया जाएगा। वित्त मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक सरकार त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने के आंकड़ों को देखने और उसकी समीक्षा के बाद दिसंबर से पहले कोई नया ऐलान करने के पक्ष में नहीं है। अधिकारी का दावा है कि अर्थव्यवस्था के आंकड़ों में सुधार आत्मनिर्भर पैकेज के दम पर ही आया है।

ऐसे में फिलहाल इसकी रफ्तार पर ही नजर टिकी हुई है। वहीं वित्त मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि सितंबर के महीने में आर्थिक आंकड़े वृद्धि के सामान्य स्थिति की ओर आने के विश्वसनीय संकेत संकेत दर्शा रहे हैं और सरकार लोगों की तकलीफ को दूर करने के लिए कोई भी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी। मंत्रालय ने कहा कि कोविड-19 संकट के पिछले छह महीनों के दौरान राजकोषीय प्रोत्साहन और राहत देने के साथ ही सभी हितधारकों और नागरिकों की चिताओं को दूर करने के लिए हर संभव उपाय किए गए है। वित्त मंत्रालय ने आगे कहा कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए मांग और आपूर्ति दोनों को बढ़ाने के लिए मदद की गई। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कोरोना वायरस महामारी के दौरान सरकार के उपायों का असर अब दिखने लगा है और सितंबर के महीने के आंकड़े आर्थिक वृद्धि के सामान्य स्थिति की ओर आने के विश्वसनीय संकेत दे रहे हैं।


जानकारी के मुताबिक सरकार फिलहाल सिर्फ एविएशन और टूरिज्म क्षेत्र से जुड़ी टैक्स रियायतों के बारे में विचार किया जा रहा है। बाकी सेक्टरों के लिए फिलहाल किसी पैकेज पर तैयारी तेज नहीं है। सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान पैकेज की लगातार उच्चस्तरीय मॉनिटरिंग हो रही है। जानकारी के मुताबिक इस अभियान के तहत 30 सितंबर तक 27,000 करोड़ रुपये खर्च कर 30 करोड़ मानव दिवस के बराबर रोजगार दिया गया है। सरकार मानकर चल रही है कि पिछले आर्थिक राहत पैकेज और देश में नियमों के दायरे में शुरू हो रहे अनलॉक के अच्छे नतीजे देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में हर तरह की गतिविधियों को देखते हुए ही जरूरी क्षेत्रों को सहारा देने का काम किया जाएगा ताकि उसका असर पूरी अर्थव्यवस्था में व्यापक तौर से दिखाई दे।


सितंबर महीने में न सिर्फ पिछले साल के मुकाबले करीब सवा चार फीसदी जीएसटी संग्रह बढ़ा है। बल्कि सामान की एक जगह से दूसरे जगह हो रही आवाजाही के लिए जरूरी ई-वे बिल में भी रिकॉर्ड उछाल देखा गया है। साथ ही निर्यात के मोर्चे पर भी सुधार दिखना शुरू हो गया है। निर्यात में छह माह से जारी गिरावट सितंबर में थम गई और पांच फीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार के भी संकेत मिलने शुरू हो गए हैं। टूव्हीलर के साथ साथ ट्रैक्टर बिक्री में भी बढ़त रही है। वहीं अच्छे मॉनसून की वजह से इस बार फसल बेहतर होने के आसार हैं जिससे आने वाले दिनों में ग्रामीण इलाकों में मांग और बढ़ सकती है। आंकड़ों के मुताबिक ऊर्जा की खपत के मामले में पिछले साल का स्तर पार हो गया है और 29 सितंबर तक इसमें 4.2 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई थी।