धार्मिक मान्यताओं पर कोरोना का नहीं होगा असरसुरक्षा के साथ दुर्गोत्सव व दषहरा मनाने की मिली अनुमति, कलेक्टर ने शांति समिति की बैठक बुलाकर लिया निर्णय


सूरजपुर 03 अक्टूबर 2020/ आज कलेक्टर रणबीर शर्मा एवं पुलिस अधीक्षक राजेष कुकरेजा के द्वारा दषहरा पर्व के लिए शांति समिति की बैठक का आयोजन किया गया जिससे विषेष रूप से कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए सुरक्षात्मक पहलुओं पर विचार किया गया। बैठक में सूरजपुर के जनप्रतिनिधि, पत्रकार व गणमान्य नागरिक उपस्थित हुए जिनके द्वारा प्रषासन को अपने-अपने सुझाव दिए गए। जिसके बाद कलेक्टर रणबीर शर्मा ने धार्मिक मान्यताओं को पुरा करने के साथ ही कोरोना महामारी से सुरक्षा के साथ दुर्गात्सव व दषहरा मनाने की अनुमति जारी कर दी है, जिसमें विभिन्न शर्तो के साथ पर्व को मनाने आदेष दिये गये हैं-पूर्व में 15 सितम्बर को जारी आदेष में संषोधन करते हुए नवीन आदेष जारी किया गया है, जिसके अनुसार मूर्ति की ऊँचाई एवं चैड़ाई 8ग्8 फिट से अधिक नहीं होगी ।

मूर्ति स्थापना वाले पंडाल का आकार 30ग्45 फिट से अधिक न हो। पंडाल के सामने कम से कम 5000 वर्ग फिट की खुली जगह हो । पंडाल एवं सामने 5000 वर्गफिट की खुली जगह में कोई भी सड़क अथवा गली का हिस्सा प्रभावित न हो । मंडप व पंडाल के सामने दर्शकों के बैठने हेतु पृथक से पंडाल न हो। दर्शकों एवं आयोजकों के बैठने हेतु कुर्सी नहीं लगाये जायेंगे। पंडाल के मुख्य पर रात्रि 09.00 बजे तक अनिवार्यतः बंद करना होगा । प्रसाद एवं खिलौना दुकानों के बीच की दूरी 3 मीटर से कम नहीं होगी। प्रसाद एवं खिलौना की दुकानें 3 मीटर ग् 3 मीटर से अधिक न हो ।

किसी भी एक समय में मण्डप एवं सामने मिलाकर 20 व्यक्ति से अधिक न हों। मूर्ति स्थापित करने वाले व्यक्ति अथवा समिति एक रजिस्टर संघारित करेगी , जिसमें दर्शन हेतु आने वाले सभी व्यक्तियों का नाम , पता , मोबाईल नम्बर दर्ज किया जायेगा , ताकि उनमें से कोई भी व्यक्ति कोरोना संक्रमित होने पर कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग किया जा सके। मूर्ति स्थापित करने वाले व्यक्ति अथवा समिति 04 सीसीटीवी लगायेगा , ताकि उनमें से कोई भी व्यक्ति कोरोना संक्रमित होने पर कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग किया जा सके। मूर्ति दर्शन अथवा पूजा में शामिल होने वाला कोई भी व्यक्ति बिना मास्क के नहीं जायेगा। ऐसा पाये जाने पर सम्बन्धित एवं समिति के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही किया जायेगा। मूर्ति स्थापित करने वाले व्यक्ति अथवा समिति द्वारा सैनेटाइजर , थर्मल स्क्रिनिंग , आक्सीमीटर , हैण्डवाश एवं क्यू मैनेजमेंट सिस्टम की व्यवस्था की जायेगी। थर्मल स्क्रिनिंग में बुखार पाये जाने अथवा कोरोना से सम्बन्धित कोई भी सामान्य या विशेष लक्षण पाये जाने पर पंडाल में प्रवेश नहीं देने की जिम्मेदारी समिति की होगी।

व्यक्ति अथवा समिति द्वारा फिजिकल डिस्टेंसिंग आगमन एवं प्रस्थान की पृथक से व्यवस्था, यांस , बल्ली से बेरिकेडिंग कराकर कराया जायेगा। यदि कोई व्यक्ति , जो मूर्ति स्थापना स्थल पर जाने के कारण संक्रमित हो जाता है , तो ईलाज का सम्पूर्ण खर्च मूर्ति स्थापना करने वाला व्यक्ति अथवा समिति द्वारा किया जायेगा। कन्टेनमेंट जोन में मूर्ति स्थापना की अनुमति नहीं होगी । यदि पूजा की अवधि के दौरान भी उपरोक्त क्षेत्र कन्टेनगेट क्षेत्र घोषित हो जाता है तो तत्काल पूजा समाप्त करनी होगी। मूर्ति स्थापना के दौरान , विसर्जन के समय अथवा विसर्जन के पश्चात् किसी भी प्रकार के भोज , भण्डारा , जगराता अथवा सांस्कृतिक कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं होगी। मूर्ति स्थापना के समय स्थापना के दौरान , विसर्जन के समय अथवा विसर्जन के पश्चात् किसी भी प्रकार के वाद्य यंत्र , ध्वनि विस्तारक यंत्र , डीजे बजाने की अनुमति नहीं होगी। मूर्ति स्थापना एवं विसर्जन के दौरान प्रसाद , चरणामृत या कोई भी खाद्य एवं पेय पदार्थ वितरण की अनुमति नहीं होगी ।

मूर्ति विसर्जन के लिए एक से अधिक वाहन की अनुमति नहीं होगी । मूर्ति विसर्जन के लिए पिकअप , टाटा एस ( छोटा हाथी ) से बड़े वाहन का उपयोग प्रतिबंधित होगा । मूर्ति विसर्जन के वाहन में किसी भी प्रकार के अतिरिक्त साज – सज्जा , झांकी की अनुमति नहीं होगी । मूर्ति विसर्जन के लिए 15 से अधिक व्यक्ति नहीं जा सकेंगे एवं वे मूर्ति वाहन में ही बैठेंगे । पृथक से वाहन ले जाने की अनुमति नहीं होगी । मूर्ति विसर्जन के लिए प्रयुक्त वाहन पण्डाल से लेकर विसर्जन स्थल तक रास्ते में कहीं रोकने की अनुमति नहीं होगी । विसर्जन के लिए नगर पालिका परिषद् व नगर पंचायत व ग्राम पंचायत द्वारा निर्धारित रूट मार्ग एवं तिथि एवं समय का पालन करना होगा। शहर के व्यस्त मार्गों से मूर्ति विसर्जन वाहन को ले जाने की अनुमति नहीं होगी। सामान्य रूप से सभी वाहन रिंग रोड के माध्यम से ही गुजरेंगे। विसर्जन के मार्ग में कहीं भी स्वागत , भण्डारा , प्रसाद वितरण , पंडाल लगाने की अनुमति नहीं होगी। सूर्यास्त के पश्चात् एवं सूर्योदय के पहले मूर्ति विसर्जन के किसी भी प्रक्रिया की अनुमति नहीं होगी। उपरोक्त शर्तों के साथ घरों में मूर्ति स्थापित करने की अनुमति होगी। यदि घर से बाहर मूर्ति स्थापित किया जाता है तो कम से कम 7 दिवस पूर्व अनुविभागीय दण्डाधिकारी कार्यालय में निर्धारित शपथ-पत्र मय आवेदन देना होगा एवं अनुमति प्राप्त होने पश्चात् अनुमति की सूचना नगरपालिका परिषद व नगर पंचायत व ग्राम पंचायत एवं सम्बन्धित पुलिस थाना व चैकी को देकर ही मूर्ति स्थापित करने की अनुमति होगी ।

इन सभी शर्तों के अतिरिक्त भारत सरकार , स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय एवं छ.ग. शासन द्वारा समय – समय पर जारी एसओपी का पालन अनिवार्य रूप से किया जाना होगा । बताया गया है कि निर्देश का उल्लंघन करने पर एपीडेमिक जीज एक्ट एवं विधि अनुकूल अन्य धाराओं के तहत् कठोर कार्यवाही की जायेगी ।इन शर्तो के साथ दषहरा भी मनाया जा सकेगाः-पुतलों की ऊँचाई 10 फिट से अधिक न हो । पुतला दहन किसी बस्ती रहवासी इलाकों में न किया जाये । पुतला दहन खुले स्थान पर किया जाये । पुतला दहन कार्यक्रम में समिति के मुख्य पदाधिकारी सहित किसी भी हाल में 50 व्यक्तियों से अधिक व्यक्ति शामिल नहीं होंगे । आयोजन के दौरान केवल पूजा करने वाले व्यक्ति शामिल होंगे । अनावश्यक भीड़ एकत्रित न होने देने की जिम्मेदारी आयोजकों की होगी । कार्यक्रम का यथासंभव ऑनलाईन माध्यमों आदि से प्रसारण किया जाये । पुतला दहन के दौरान आयोजन का वीडियोग्राफी कराया जाये तथा आयोजक एक रजिस्टर संधारित करेंगे एवं पुतला दहन कार्यक्रम में आने वाले सभी व्यक्तियों का नाम , पता , मोबाईल नम्बर दर्ज किया जायेगा एवं आयोजन करने वाले व्यक्ति अथवा समिति 04 सीसीटीवी लगायेगा , ताकि उनमें से कोई भी व्यक्ति कोरोना संक्रमित होने पर कान्टेक्ट ट्रेसिंग किया जा 06 सके ।

प्रत्येक समिति व आयोजक समय पूर्व सोशल मीडिया में यह जानकारी देवें कि कोविड -19 कोरोना को दृष्टिगत रखते हुये कार्यक्रम सीमित रूप से किया जायेगा। पुतला दहन में कहीं भी सास्कृतिक कार्यक्रम , स्वागत , भंडारा , प्रसाद वितरण , पंडाल लगाने की अनुमति नहीं होगी । आयोजन में उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति को सोशल व फिजिकल डिस्टेंसिंग , मास्क लगाना एवं समय – समय पर सेनेटाईजर का उपयोग करना अनिवार्य होगा। रावण दहन स्थल से 100 मीटर के दायरे में आवश्यकतानुसार अनिवार्यतः बेरिकेडिंग कराया जायेगा। आयोजन के दौरान किसी भी प्रकार के वाद्य यंत्र , ध्वनि विस्तारक यंत्र , डीजे धुमाल , बैंड पार्टी बजाने की अनुमति नहीं होगी । रावण पुतला दहन में किसी भी प्रकार के अतिरिक्त साज – सज्जा , झाकी की अनुमति नहीं होगी । अनुमति उपरांत समिति द्वारा सेनेटाइजर , थर्मल स्क्रीनिंग , ऑक्सीमीटर , हैण्डवाश एवं क्यू मैनेजमेंट सिस्टम की व्यवस्था की जायेगी ।

थर्मल स्क्रीनिंग में बुखार पाये जाने अथवा कोरोना से संबंधित कोई भी सामान्य या विशेष लक्षण पाये जाने पर कार्यक्रम में प्रवेश नहीं देने की जिम्मेदारी समिति व आयोजकों की होगी । कार्यक्रम आयोजन के दौरान अग्नि शमन की पर्याप्त व्यवस्था अनिवार्यतः किया जाना होगा । आयोजन के दौरान यातायात नियमों का पालन किया जावे । किसी प्रकार का यातायात बाधित न हो यह सुनिश्चित किया जाये । आयोजन के दौरान एन.जी.टी , व शासन के द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के लिये निर्धारित मानकों कोलाहल अधिनियम , भारत सरकार , माननीय सुप्रीम कोर्ट के दिशा – निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन किया जाना होगा। नियमों के उल्लंघन करने पर समिति व आयोजक जिम्मेदार होंगे। यदि कोई व्यक्ति जो पुतला दहन स्थल पर जाने के कारण संक्रमित हो जाता है तो इलाज का सम्पूर्ण खर्च पुतला दहन आयोजकों व समिति द्वारा किया जायेगा । कन्टेनमेंट जोन में पुतला दहन की अनुमति नहीं होगी ।

यदि पुतला दहन कार्यक्रम के अनुमति के पश्चात उपरोक्त क्षेत्र कन्टेनमेंट क्षेत्र घोषित हो जाता है तो तत्काल कार्यक्रम निरस्त माना जायेगा एवं कन्टेनमेंट जोन के समस्त निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। एक आयोजन स्थल से दूसरे आयोजन स्थल की दूरी 500 मीटर से कम न हो। आयोजन स्थल के लिए पहले आओ , पहले पाओ नीति के तहत् पहले प्राप्त आवेदनों को प्राथमिकता दी जावेगी । इन सभी शर्तों के अतिरिक्त भारत सरकार , स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के दिनांक 04 जून 2020 के अंतर्गत जारी एसओपी का पालन अनिवार्य रूप से किया जाना होगा । उपरोक्त दिये गये किसी शर्तों का उल्लंघन अथवा किसी प्रकार के अव्यवस्था होने पर इसकी समस्त जिम्मेदारी आयोजन समिति की होगी , जिनके विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही की जावेगी। उपरोक्त शर्तों के अधीन 10 दिवस के पूर्व सम्बन्धित अनुविभागीय दण्डाधिकारी कार्यालय में निर्धारित शपथ – पत्र मय आवेदन देना होगा एवं अनुमति प्राप्त होने के उपरांत ही पुतला दहन की अनुमति होगी । बताया गया है कि निर्देश का उल्लंघन करने पर एपीडेमिक नीज एक्ट एवं विधि अनुकूल नियमानुसार अन्य धाराओं के तहत् कठोर कार्यवाही की जायेगी।