जल संसाधन विभाग के अधिकारी एवं लिपिक भ्रष्टाचार के चासनी इस प्रकार डुबकी लगा रहे की नहीं कर रहे नियमों का ख्याल , RTI आवेदक को पत्र लिख विभाग में आवंटन की कमी बताते हुए मांगे 50000 रूपए …

निराला विभाग निराले अधिकारी यहाँ आला अफसर से लेकर लिपिक ऑपरेटर ठेकेदार सभी भ्रस्टाचार के चासनी में गोता लगा रहे है और कार्यवाही के नाम पर दलाली करने वाले आला अफसरों के गाल पर करारा तमाचा वाला कमिशन का मोटा लिफाफा, जनता का माल है लूट सको तो लूट, सरकार आंख खोलेगी जब सब जाएगा छूट

सरगुजा समय रामानुजगंज – जल संसाधन विभाग संभाग क्रमांक 2 की बात हो या उप संभाग की यहां भ्रष्टाचार के चासनी में गोता लगाने में सभी अधिकारी एवं लिपिक भ्रष्टाचारी में मस्त है करोड़ों रुपए हजम करने वाले इन भ्रष्टाचारियों को हर जगह सिर्फ पैसा ही दिख रहा है। आपको बता दे कि इस विभाग के लिए सरकार लिए गूँगा बहरा अंधा सभी कुछ बना हुआ है मिली जानकारी के मुताबिक विभाग में करोड़ो – अरबों रुपये के गोल माल करने वाले अफसर लिपिक ठेकेदार सभी आपसी विवाद में फसे हुए है।
 यह कार्यालय ऐसा है कि आम जनता की वह संपत्ति जो सरकार को टैक्स के रूप में प्राप्त होता है उस आम जनता का पैसा सरकार के पास से अनाब सनाब आवंटन ला कर अपने अय्यासी और रसुखदारी में जम कर उड़ाने के लिए अपने अपने पहुंच एवं आला अफसरों से चापलूसी एवं चाटुकारिता का प्रमाण देने से बाज नहीं आ रहे है । मिली जानकारी के अनुसार करोड़ों रुपए गबन करने वालो में आला अफसरों से लेकर लिपिक ठेकेदार सभी संलिप्त है अधिकांस कार्य कागज में निपटाने में इस विभाग के अफसरों लिपिकों ठेकेदारों को जैसे महारथ हासिल है ।

विभाग के अफसर और उनके गुर्गों के लिए यह कार्यालय सिर्फ भ्रष्टाचार से कमाई का जरिया बनता जा रहा है मिली जानकारी के अनुसार छोटे छोटे लिपिक भी करोड़ों की लागत से बड़ी बड़ी इमारतें अपने भ्रष्टचार के दम पर खड़ा कर ले रहे है और इनका कोई बाल भी बांका नहीं कर पाता है कार्यवाही करने अफसरों एवं जनता के सुख दुख के लिए चयनित हुए जनप्रतिनिधियों को भी ये अपने गर्म जेब के पैकेट में रखते है।


आपको बता दे की यह विभाग भ्रष्टाचार में इतना लिप्त है कि इन्हे सही गलत नियम कानून कुछ भी नहीं सूझता ऐसा ही एक मामला संज्ञान में आया है की सूचना के अधिकार अधिनियम में आवेदक द्वारा जानकारी मांगी गई तब इस विभाग के काबिल लिपिक एवं अधिकारी द्वारा अपने भ्रष्टाचारी वाले काम चोरी को छुपाते हुए आवेदक को एक पत्र जारी करते हुए 50000.00 पचास हजार रुपए कार्यालय में यह कहते हुए जमा करने के लिए कहां जाता की विभाग में अभी किसी प्रकार का आवंटन नहीं है  जिसका कि कोई आधार ही नहीं है |

इनके द्वारा अपने विभाग के मलाईदार कुर्सी एवं भ्रष्टाचार कि चासनी इतनी पसंद आने लगी है कि सिर्फ दिन रात इन्हे पैसा ही पैसा दिखाई देता है। इन्होंने सूचना के अधिकार में आवेदक से 50000.00 रुपए बिना होमवर्क किए मांग पत्र भेज दिया जबकि आवेदक द्वारा चाही गई जानकारी के एवज में विभाग का कर्तव्य बनता है कि आवेदक को अधिनियम में दिए गए प्रावधानों का हवाला देते हुए चाही गई जानकारी में पेजो कि संख्या एवं पेज के साईज का उल्लेख करते हुए टोटल हुए पेज के हिसाब से रकम मांगने कि कार्यवाही कि जाती परन्तु इस विभाग ने ऐसा नहीं किया बल्कि विभाग में आवंटन नहीं होने की बात कहते हुए अपने भ्रष्टाचारी नियत से आवेदक के समक्ष आर्थिक भय दिखाने का प्रयास किया। जो कि नियम विरूद्ध है|