चार दिवसीय इज्तिमा का इस्लाम धर्म की सीख के साथ हुआ समापन

भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के ईंटखेड़ी इलाके में आयोजित चार दिवसीय इस्लामिक सम्मेलन 72वें आलमी तब्लीगी इज्तिमा का सोमवार को समापन हो गया। गत 22 नवम्बर को शुरू हुए इस आयोजन में लाखों की संख्या में इस्लाम के धर्मावलम्बी शामिल हुए। आखिरी दिन भी शाम तक दुआओं का दौर चलता रहा। दुनिया भर से इस्लाम के अनुयायी धर्म की शिक्षा हासिल करने और सिखाने के लिए आए। उलेमा की तकरीरें हुईं। तकरीरों में कुरान में दी गई शिक्षा के मुताबिक जिंदगी गुजारने की सीख दी गई। इस बार 200 इज्तिमाई निकाह हुए। दिल्ली मरकज से आए मौलाना साअद ने निकाह पढ़ाने के बाद खुतबा (धर्मोपदेश) सुनाया। नवदंपतियों के लिए कामयाब जिंदगी की दुआ की। इज्तिमा के समापन के साथ ही सोमवार से ही जमातों का वापस लौटना भी शुरू हो गया है।

इज्तिमा के आखिरी दिन सोमवार को दुआ-ए-खास के दौरान जब दिल्ली मरकज के हजरत मौलाना साअद साहब कांधालवी ने दुआ की शुरुआत की तो लाखों लोगों के मजमे में सन्नाटा पसर गया। पूरे वातावरण में दूर-दूर तक महज मौलाना की दुआ और बीच-बीच में लोगों की आमीन कहने की आवाजें ही गूंज रही थीं। दुआ की गहराई में डूबते-उतरते लोग कभी रोने लगते तो कभी आमीन कहने के लिए अपने रुंधे गले को साफ करते। दोपहर 12 बजकर 4 मिनट पर शुरू हुई दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक चली। दुआ के बाद जब मौलाना साअद साहब ने अपनी बात रोकी तो मजमा कुछ पलों के लिए खामोशी में डूबा रहा और उसके बाद चार माह और चालीस दिनों के लिए रवाना होने वाली जमातों को रवाना करने की तरतीब शुरू हो गई।

सुबह फजिर की नमाज के बाद दुआ-ए-खास से पहले किए बयान में यह बात कही गई कि आज दुनिया में तुम्हें हर चीज, हर बात, हर परेशानी से डर लगता है और छोटी-बड़ी बात पर परेशान भी हो जाते हो। अल्लाह से मांगने की आदत छोडऩे और सभी कुछ उससे होने का अकीदा तोड़ देने की वजह से यह हालात बन रहे हैं। अल्लाह की रस्सी मजबूती से पकड़ लो, तुम्हारी हर परेशानी खत्म हो जाएगी, फिर किसी छोटी-बड़ी परेशानी से तुम्हें डर नहीं लगेगा। नेक रास्ते पर चलने, किसी को तकलीफ न देने, आपसी रिश्ते बेहतर रखने और सबके काम आने की हिदायत भी मजमे को दी गई।

सोमवार को सुबह से ही लोगों की आमद का सिलसिला और तेज होता गया था, जो दोपहर तक जारी रहा। हर तरफ से इज्तिमागाह की तरफ बढ़ते जमाती ही दिखाई दे रहे थे। रास्तेभर वालेंटियर्स इंतजाम संभाल रहे थे और लोगों को तरतीब से और सुकून से वाहन चलाने तथा पैदल चलने की ताकीद कर रहे थे। बड़ी तादाद में पुलिस की कई टुकडिय़ां भी इज्तिमा मार्ग पर तैनात थीं और आने-जाने वालों की सुरक्षा पर नजर रख रही थीं। देश-विदेश के मेहमानोंं की खिदमत में न केवल भोपाल के बाशिंदे बल्कि आसपास जिलों के लोग भी सहयोग देते दिखाई दिए।

ताजुल मसाजिद परिसर में बरसों होते रहे आलमी तब्लीगी इज्तिमा के समय से ही यहां एक बाजार लगने की परंपरा रही है। ताजुल मसाजिद और यतीम खाने के परिसर में लगने वाली सैकड़ों दुकानों से इन संस्थाओं के सालाना खर्चोंं की भरपाई होती आई है। दुआ-ए-खास होने के बाद इस बाजार की शुरूआत हो गई है, जिसमें पहले ही बड़ी तादाद मेंं बाहर से आए जमाती खरीदारी करने पहुंचे।

आलमी तब्लीगी इज्तिमा के दौरान सहयोग करने वाले सभी लोगों और संस्थाओं का इज्तिमा इंतेजामिया कमेटी ने शुक्रिया अदा किया है। कमेटी के प्रवक्ता अतीक उल इस्लाम ने जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नगर निगम, पीएचई, विद्युत विभाग, रेलवे, संचार निगम, स्वास्थ्य विभाग के सभी जमीनी कर्मचारियों और आला अधिकारियों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि इन्हीं के प्रयासों से आलमी तब्लीगी इज्तिमा की व्यवस्थाएं दुरुस्त हो पाई हैं । उन्होंने शहरभर में मुस्तैद रहे वालेंटियर्स, रेलवे स्टेशन और बस स्टेंड के अलावा विभिन्न स्थानों पर इस्तकबालिया कैम्प लगाने वाली संस्थाओं का भी शुक्रिया अदा किया है। हिस